समाजवादी पार्टी के राज में आतताइयों का राज : वोट नहीं दिया तो बस्ती फूंक दी

sitapurपंचायत चुनाव के दरम्यान समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देने का फैसला सीतापुर के दलितों और अति पिछड़ों पर कहर बन कर टूटा, लेकिन इस पर प्रदेश और देश ने ध्यान नहीं दिया. दलितों और अति पिछड़ों की पूरी बस्ती फूंक दिए जाने और दो बच्चों को जिंदा जलाए जाने की घटना पर राहुल गांधी या ढोंगी बुद्धिजीवियों का ध्यान नहीं गया और न ढिंढोरची मीडिया का ही इस ओर ध्यान गया जो रोहित वेमुला पर ढोल पीटते हैं और दलितों की बस्ती फूंकदिए जाने पर शातिराना चुप्पी साध लेते हैं. रिहाई मंच ने सही ही कहा कि चुनावी वैमनस्यता में दलितों की बस्ती फूंक देना और बच्चों को जिंदा जला डालना मध्ययुगीन बर्बरता का प्रमाण है. सीतापुर में ही रेवसा के बिंबिया गांव में 8 मार्च 2012 को सपा को जीत मिलने के बाद दलितों के 13 घर जला दिए गए थे, क्योंकि दलितों ने सपा को वोट नहीं दिया था.
उसी तरह की घटना को ज्यादा बड़े वीभत्स रूप में फिर से अंजाम दिया गया.

राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर के गांव पट्टी दहलिया में दलित व कहार जाति के अतिपिछड़े लोगों के घरों को पिछले दिनों वहां के प्रधान कमलेश वर्मा के गुंडों ने फूंक डाला. घटना में दो बच्चे तीन साल की प्रियांशी (रमाकांत व रजनी देवी की बेटी) और आठ साल के मुकेश (सियाराम व सुनीता देवी का बेटा) की दर्दनाक मौत हो गई और कुछ जानवर झुलसकर मर गए. इस घटना पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और न ही भुक्तभोगियों के लिए किसी मुआवजे की घोषणा की गई. घटना को अंजाम देने वाले लोग खुलेआम घूम रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं. जिला प्रशासन मौन साधे है.

इतनी बड़ी वारदात हो जाने के बावजूद गांव में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं. पूरे गांव में सन्नाटा छाया है और पुलिस का एक सिपाही भी वहां नज़र नहीं आता. बस्ती में अधिकांश घर कहार जाति के अति पिछड़े गरीब और दलितों के हैं. गांव के लोग मजदूरी करके अपना जीवन गुजारते हैं. उनसे केवल यह गलती हुई कि वर्तमान प्रधान कमलेश वर्मा को उन्होंने वोट नहीं दिया था. प्रधान ने उस गलती की उन्हें सजा दी, लेकिन प्रशासन ने सत्ता संरक्षण में पलने वाले अपराधी प्रधान पर कोई कार्रवाई नहीं की.

आपराधिक आगजनी के पीड़ितों की सरकार ने कोई सुध नहीं ली. कुछ राजनीतिक दल और कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मौके पर जाकर पीड़ितों का हालचाल पूछा और सरकार से उनकी आर्थिक मदद और अपराधियों पर कार्रवाई करने की मांग की. पीड़ितों से उनके गांव जाकर मिलने वाले संगठनों में रिहाई मंच, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), भाकपा माले (रेड स्टार), इंसाफ अभियान, पिछड़ा समाज महासभा, संगतिन किसान मजदूर संगठन के प्रतिनिधि शामिल थे. इन लोगों ने मौके पर देखा कि किस तरह प्रधानी के चुनाव में दबंग प्रत्याशी को वोट न देने के कारण दलितों और कहारों के तकरीबन दो दर्जन घर फूंक दिए गए. इसमें दो बच्चों और 12 मवेशियों के जलकर मरने के अलावा 35 से अधिक परिवार गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं.

बस्ती के रामपाल ने बताया है कि प्रधान कमलेश वर्मा और उसके गुर्गे उनके घरों में आग लगा रहे थे और कटाक्ष भी कर रहे थे कि सरकार 25-25 हजार रुपये देगी और पक्का मकान देगी. बस्ती के महिला-पुरुष विरोध करते रहे लेकिन प्रधान और उसके गुंडे बाज नहीं आए. ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान के आदमी मेड़ीलाल व कुछ अन्य लोग खुद ही छप्परों में आग लगा रहे थे. थाने में एफआईआर दर्ज कराने गए पप्पू ने बताया कि प्रधान कमलेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात पर कोतवाल ने उल्टा उन्हें ही डांटा और भगा दिया.

बहुत मुश्किल से बाद में एफआईआर दर्ज हुई पर आज तक कमलेश की गिरफ्तारी नहीं हुई. मौके पर गए प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, प्रधान को निलम्बित कर उसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाने, जिनके घर जले हैं उन्हें सरकारी आवास योजना के तहत पक्के मकान आवंटित करने और मृत बच्चों के निर्धन अभिभावकों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की सरकार से मांग की है. यह भी कहा है कि जिला प्रशासन बतौर अंतरिम सहायता पीड़ितों को खाद्य सामग्री, कपड़े और बिस्तर वगैरह उपलब्ध कराए और उनकी सुरक्षा की गारंटी करे.

घटना स्थल का दौरा करने वालों में रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडेय, संगतिन किसान मजदूर संगठन की ऋचा सिंह, भाकपा माले रेड स्टार के डॉ. बृज बिहारी, राजीव यादव, शाहनवाज आलम, पिछड़ा समाज महासभा के अध्यक्ष एहसानुल हक़ मलिक व महासचिव शिव नारायण कुशवाहा, इंसाफ अभियान के शबरोज मोहम्मबी, शकील कुरैशी, मौलाना इरशाद, मोहम्मद अबू अशरफ, बीएचयू के छात्र मोनीश बब्बर, आचार्य नरेन्द्र देव युवजन सभा के पवन सिंह यादव, हाजी जावेद, डॉ. एजाज, अकरम अली, शेख सिराज, अनुराग आग्नेय, प्रशांत मिश्रा, बुद्धि प्रकाश, अमर शिवा मिश्रा वगैरह शामिल थे.

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