मिनी पाकिस्तान के विवाद में भी उलझ गए बंगाल के मंत्री : पचड़ा फंसाने में माहिर हैं हाकिम

mini-pakistanपश्‍चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम चुनाव के दौरान लगातार विवादों में घिरे रहे. पहले तो नारदा कांड में उन्हें और तृणमूल कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं को एक फर्जी कंपनी के दूत से नोटों की गड्डियां लेते हुए दिखाया गया. अभी वह विवाद ठंडा भी नहीं पड़ा था कि उन्हें लेकर एक और विवाद सामने आ खड़ा हुआ. पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन की संवाददाता मलीहा हामिद सिद्दीकी पश्‍चिम बंगाल आईं और उन्होंने फिरहाद हाकिम के चुनाव क्षेत्र- कोलकाता पोर्ट एरिया में घूमने की इच्छा जाहिर की. इसी चुनाव क्षेत्र में गार्डेनरीच पड़ता है. जैसा कि संवाददाता मलीहा ने लिखा है- फिरहाद हाकिम ने अपने चुनाव क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले उनसे कहा- आइए यहां के मिनी पाकिस्तान में चलें. मलीहा ने पाकिस्तान जाकर अपने समाचार पत्र डॉन में हू-ब-हू यही लिखा. जब यहां विवाद उठा तो इस संवाददाता से फोन पर पूछा गया कि मंत्री तो कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसा कहा ही नहीं है, तो मलीहा ने कहा- मैंने जो लिखा है, उस पर कायम हूं. उन्होंने ठीक यही कहा था.

फिरहाद हाकिम के इस बयान से विपक्षी दलों के नेताओं को मुद्दा मिल गया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह और उनके अन्य सहयोगी नेताओं ने कहा कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन तो है ही, देश की अखंडता के खिलाफ टिप्पणी भी है. हाकिम मंत्री हैं और उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली है. वे कैसे कोलकाता के एक इलाके को मिनी पाकिस्तान कह सकते हैं? इस पर फिरहाद हाकिम ने कहा कि मैंने यह बयान नहीं दिया है. मैंने तो पाकिस्तान का नाम ही नहीं लिया. यदि पाकिस्तान की संवाददाता ने यहां घर जैसा महसूस कर ऐसा लिख दिया है तो वे कर ही क्या सकते हैं. हाकिम का कहना है कि अगर उन्होंने ऐसा कहा भी होता तो इसमें कोई बुराई नहीं है. कोलकाता की सड़कें कराची की सड़कों जैसी हैं. इसलिए यदि मैंने कहा भी होता तो यह कोई अपराध नहीं है. चूंकि मैं मुसलमान हूं, और यह चुनाव का समय है,  इसलिए मुझे निशाना बनाया जा रहा है. यह वैमनस्य भड़काने की साजिश है. हाकिम ने कहा- जब प्रधानमंत्री पाकिस्तान जाते हैं तो उनके बारे में कोई कुछ नहीं कहता. वे एक बार नहीं, चार बार जाते हैं. एक बार तो बिना किसी कार्यक्रम के अचानक वे पाकिस्तान पहुंच गए. तब तो किसी ने नहीं कहा.

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अब लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि प्रधानमंत्री के पाकिस्तान दौरे से इस मिनी पाकिस्तान प्रकरण का क्या लेना-देना है. फिर भी वहां के लोगों की प्रतिक्रिया जानना जरूरी है जिसे मिनी पाकिस्तान कहने का आरोप है. यहां के लोगों ने कहा कि वे नाम न लिखने की शर्त पर अपना बयान देना चाहते हैं. इसका कारण है कि फिरहाद हाकिम, जो इलाके में बॉबी हाकिम के नाम से जाने जाते हैं, एक प्रभावशाली नेता हैं. ऐसे भी अनेक लोग हैं जो उनके खिलाफ बोलना नहीं चाहते. तय हुआ कि ठीक है नाम नहीं छापेंगे, आप अपनी प्रतिक्रिया दें. लोगों ने कहा कि हम लोग लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि इस इलाके को मिनी लखनऊ कहा जाता है. एक मंत्री को इस इलाके को मिनी पाकिस्तान नहीं कहना चाहिए. खासतौर से जब 53 विधानसभा सीटों पर चुनाव सिर पर हों तब एक मंत्री के बयान को लोग गौर से पढ़ते और सुनते हैं.

यह इलाका चुनाव आयोग के 1,467 संवेदनशील बूथों में शामिल है. अस्सी के दशक में दो गुटों की व्यापक हिंसा के दौरान वहां पहुंचे पोर्ट इलाके के तत्कालीन डिप्टी कमिश्‍नर विनोद कुमार मेहता और उनके अंग रक्षक मुख्तार अली खान की हत्या हो गई थी. सामान्य लोगों की हत्याएं भी हुई हैं. लेकिन यहां के लोग कहते हैं कि यह पुरानी बात हो गई. अब यहां वैसा हिंसा का माहौल नहीं है. यहां के ज्यादातर लोग व्यवसाय करते हैं. अनेक लोग सिलाई का कारोबार करते हैं या भवन निर्माण सामग्री के  सप्लायर हैं. इलाके के करीब 600 लोग यहां की शिपिंग कंपनियों में नौकरी करते हैं. प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने वाले लोग ज्यादा हैं, सरकारी नौकरी वाले कम.

अंग्रेजों ने जब अवध के पांचवें नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से उतार दिया तो इस पांचवें नवाब ने यहीं पर अपना बसेरा बनाया था. उनके साथ संगीतकार, नौकर-चाकर, पालतू जानवर और ढेर सारे लोग भी यहां पहुंच गए. यह छह मई 1856 के आसपास की बात है. वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने फोर्ट विलियम में कैद किया था. लेकिन इस डर से कि सिपाही उनसे देश भक्ति का पाठ पढ़ेंगे, उन्हें रिहा कर दिया गया. तब वे इसी इलाके में आ गए. लेकिन वे लखनऊ की मीठी यादों को भुला नहीं पाए. इसीलिए इस इलाके को वैसा बनाना चाहा. लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो सका. उन्हीं की याद में इस इलाके को आज भी मिनी लखनऊ कहा जाता है. कोलकाता नगर निगम के करीब आठ वार्ड इसमें पड़ते हैं. इससे सटा हुआ इलाका मटियाबुर्ज है. वहां दर्जी का काम करने वाले लोग बहुत हैं.

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पुरानी आबादी होने के कारण कई इलाके बहुत ही गझिन (घने) और संकरे हैं. कोलकाता पोर्ट या बंदरगाह अंग्रेजों ने ही स्थापित किया था. तब से इसे कोलकाता पोर्ट एरिया नाम से जाना जाता है. इसीलिए विधानसभा की सीट का नाम है- कोलकाता पोर्ट. पिछली बार इस सीट से चुनाव लड़ने वाले फिरहाद हाकिम को 63,866 वोट मिले थे और वे जीतकर पहली बार मंत्री बने. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी फॉरवर्ड ब्लॉक के मोइनुद्दीन शम्स को 38,833 वोट ही मिल पाए थे. इस बार माकपा और कांग्रेस में गठजोड़ है. यहां से तृणमूल कांग्रेस के फिरहाद हाकिम के खिलाफ कांग्रेस के राकेश सिंह और भाजपा के अवध किशोर गुप्ता खड़े हैं. इसलिए इस सीट पर इस बार चुनाव सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए निश्‍चित तौर पर कठिन था.

चुनाव अभी चल ही रहे थे कि तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और परेशानी खड़ी हो गई. इस बार टीएमसी के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने गलती कर दी. एक प्रेस कांफ्रेंस में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के हाथ से माकपा नेता प्रकाश करात को मिठाई खिलाते हुए फोटो दिखाकर कह दिया कि भाजपा और माकपा मिले हुए हैं. जबकि असल फोटो में राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिठाई खिला रहे हैं. डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे की जगह प्रकाश करात का चेहरा लगा दिया. भाजपा ने तुरंत इसका खंडन किया और असली फोटो जारी कर दी. उसी दिन कोलकाता के एक प्रमुख अखबार ने मुख पृष्ठ पर असली और नकली फोटो अगल-बगल छापकर इस फर्जीवाड़े को उजागर कर दिया. फर्जी फोटो कांड में पकड़े जाने के बाद लोगों में तृणमूल कांग्रेस को लेकर शंकाएं पैदा हुईं. इससे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का एक हद तक मनोबल गिरा.

कई लोगों का कहना है कि फिरहाद हाकिम की जीत की संभावनाएं इस बार फिर बन गई हैं. लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी राकेश सिंह निश्‍चय ही कुछ विद्रोही वोट पाएंगे. सबकी निगाहें 19 मई को घोषित होने वाले चुनाव नतीजों पर हैं.

 

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