घर का हर शख्स न्यूज़ एंकर सा लगता है

बड़ा ही अजीब जमाना आ गया है, अभी तक तो सिर्फ अपने बापू ही अपुन से आने-जाने से लेकर खर्च-जमा का हिसाब रखते थे, पर जब से यह नेशन वॉन्ट टू नो का चलन चला है, अपुन तो बड़ी मुश्किल में आ गए हैं. अब तो घर का बच्चा भी हर सवाल पूछता है और आंख दिखाओ तो टका सा जवाब देता है कि टीवी नहीं देखते क्या? आजकल सवाल पूछने का चलन जोरों पर है.

अरे भाई, इस चलने ने तो अपुन की जान ही ले ली है. अब तो लगता है कि टीवी से फिर से वह रामारण वाला युग ही आ जाए तो बेहतर है. बच्चों को न्यूज़ देखने की सलाह देकर अपुन तो खुद ही उनके गेस्ट कम टारगेट ज्यादा बन गए हैं. अब तो घर का हर शख्स एंकर सा ही लगता है. वैसे भी पत्रकार के घर में उसके साथ रहते-रहते उसके तर्क-वितर्कों के चलते ही सब घर वाले पत्रकार बन जाते हैं और ऊपर से यह टीवी के बहस के चलते रोज की चिक-चिक से झिक-झिक देखकर, अब तो हर कोई बस अपनी बात को लंबी से लंबी खींच के ले जाने में निपुण होता जा रहा है.

कल तो हद ही हो गई है, जब अपुन ने बच्चों के पिज्जाई टेस्ट से दूर जाकर मालपुए बनाने के लिए घर की सीनियर मोस्ट एंकर की तरह व्यवहार करने वाली श्रीमती जी से कहा, तो आज के जुकरबर्गीय बच्चों ने सबसे पहले यह ही सवाल दाग दिया कि नेशन वॉन्ट्स टू नो वॉट इज़ मालपुआ. वो तो खैर रही कि गूगल बाबा की मदद से अपुन ने उन्हें मालपुआ की फोटो के दर्शन करा दिए, वरना पता नहीं कहीं यह भी टि्‌वटर पर ट्रेंड करकर हमारी तो इज्जत की ग्लोबली बेइज्जती कर देता. पर जब फेसबुक पर हमने फीलिंग हैप्पी, ईटिंग मालपुआ लिखा तो न जाने मालपुए को लेकर कितने पिज्जुओं को इसका टेस्ट भी कराना पड़ा. लो जी, अपुन के आधे मालपुए तो नेशन को समझाने-चटवाने में ही निपट गए. पर एक राहत है कि अब कुछ महीनों से बच्चों के जल्दी सोने पर सन्नाटे से चीरते हुए उनके सनसनी टाइप सवालों से जरूर बच जाते हैं. पर यह जो नए ठुमकने वाले प्रोग्राम दिनभर चलते हैं, इनके नित्य-नित्य नए नृत्य शैलियों पर दागे जा रहे सवालों से आजकल अपुन घायल हो रहे हैं.

अपुन ने तो घर में टीवी इसलिए लगवाया था कि सबका मन लगे और ज्ञान बढ़े पर अब तो इसके चलते हमारे ही ज्ञान की रोज टेस्टिंग होती रहती है. बस सहारा है गुगलु महाराज का. इधर सवाल तो उधर मोबाइल पर गुगलु वर्जन से पाया जवाब. तो भइया, अगली बार तो ऐसा डिश कनेक्शन लेंगे जिसमें सवाल दागते ही टीवी वाले कम ही दिखें. नहीं तो घर में एंकर बने हमारे लोग कहीं इतने ग्रूम ने हो जाए कि नेशन से यूनिवर्सल तक के सवाल अपुन पर ही दागते रहें.

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