टीम इंडिया को मिलामजम्बोफकोच

anil-kumbleटीम इंडिया की कोचिंग को लेकर चल रही माथापच्ची आखिरकार अनिल कुंबले के नाम पर खत्म हो गई. पिछले एक महीने से टीम इंडिया के नए कोच की तलाश चल रही थी. बीसीसीआई ने इस बार नए कोच के लिए काफी मेहनत की थी. 2015 में डंकन फ्लेचर के जाने के बाद से टीम इंडिया के कोच का पद खाली था. इस दौरान अस्थायी तौर पर रवि शास्त्री किसी न किसी रूप में यह जिम्मेदारी निभाते रहे थे. दरअसल विदेशी और देसी कोच को लेकर इस बार बोर्ड बेहद गंभीर दिखा. कोच नियुक्त करने से पहले बीसीसीआई ने विज्ञापन जारी किया था. इसके बाद 57 आवेदकों को इसमें जगह मिली थी. बोर्ड ने इसके लिए सलाहकार समिति बनाई थी. इस समिति में सचिन, सौरभ व लक्ष्मण जैसे कई बड़े पूर्व क्रिकेटर शामिल थे. टीम इंडिया का कोच बनने की दौड़ में कई दिग्गज क्रिकेटर लाइन में थे, लेकिन कुंबले के स्पिन के आगे कई नामी गिरामी क्रिकेटरों की नहीं चली. अनिल कुंबले ने रवि शास्त्री व संदीप पाटिल जैसे खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए टीम इंडिया का कोच बनने का गौरव हासिल किया. यह इसलिए अहम है, क्योंकि 16 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी को टीम इंडिया का कोच बनने का मौका मिला है. 16 साल पहले कपिल देव को भारतीय टीम का कोच बनाया गया था. कपिल के बाद टीम इंडिया ने विदेशी कोच पर भरोसा किया. लेकिन भारत में कोचिंग को लेकर हमेशा विवाद होता रहा है. विदेशी कोच पर कई बार सवाल भी उठाए जा चुके हैं.

1992 से टीम इंडिया में कोच रखने की प्रथा शुरू हुई. भारत के पहले कोच के रूप में अजित वाडेकर को चुना गया था. वह 1996 तक टीम इंडिया के कोच रहे. इसके बाद संदीप पाटिल, मदन लाल, अंशुमन गायकवाड़ और कपिल देव जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने इसकी जिम्मेदारी निभाई. साल 2000 में जॉन राइड के रूप में भारत को पहला विदेशी कोच मिला. यह वह दौर जब टीम इंडिया की कमान सौरभ गांगुली के हाथ में थी. दादा और जॉन राइड की जोड़ी ने भारतीय क्रिकेट को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. दोनों की शानदार जुगलबंदी से टीम इंडिया ने कई खिताब अपने नाम किए. उनके कोच बनते ही वीरू से लेकर कैफ तक खूब चमके. जॉन राइड के बाद से भारत लगातार विदेशी कोच की सेवाएं ले रहा है. इस दौरान कोच को लेकर काफी किच-किच देखने को मिली. ग्रेग चैपल के कोच बनते ही टीम इंडिया में दरार आ गई थी. चैपल अपने फायदे के लिए टीम इंडिया को चला रहे थे. चैपल और दादा के बीच काफी मतभेद उभरकर सामने आया था. खैर इसके बाद गैरी कर्सटन के कार्यकाल में टीम इंडिया के प्रदर्शन में काफी सुधार आया.

कुल मिलाकर यह देखना रोचक होगा कि कोच जम्बो टीम इंडिया को कहां पहुंचाते हैं. जम्बो को ऐसे वक्त में टीम इंडिया को कोच बनने का अवसर मिला है जब धोनी व विराट के बीच कप्तानी को लेकर खिंचातानी चल रही है. मौजूदा दौर में अनिल कुंबले का हर कोई सम्मान करता है. खुद विराट कोहली ने अनिल कुंबले की तारीफ की है. अनिल कुंबले जिन्हें क्रिकेट की दुनिया में जम्बो कहते हैं, के प्रशिक्षण में टीम इंडिया कैसा प्रदर्शन करती है, इसका लोगों को इंतजार है.

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