पंजाब और गोवा चुनाव पर आम आदमी पार्टी का ध्यान : केजरीवाल के बूते बढ़ती आप

aap-in-goaअरविंद केजरीवाल का कहना है कि पार्टी में वे महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि पार्टी महत्वपूर्ण है. गोवा में चुनावी अभियान का शंखनाद करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जब यह कह रहे थे तो साथ ही यह भी दिख रहा था कि आप में उनके अलावा प्रस्तुति लायक कोई दूसरा बड़ा चेहरा पार्टी में नहीं है. केजरीवाल से यह पूछा गया था कि क्या उनकी छवि आम आदमी पार्टी से बड़ी बन रही है. अरविंद केजरीवाल इस बात से सहमत नहीं होने का उपक्रम करते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि पंजाब और गोवा में सशक्त दावेदारी पेश करने के बाद भी पार्टी के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं, जिसे मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जा सके. आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष कहते हैं, यह रणनीति की बात है कि हम इन चुनावों में सीएम पद के उम्मीदवार के साथ आगे बढ़ें या नहीं. वे कहते हैं कि हमारे पास कई योग्य नेता हैं जो ये जिम्मेदारी बखूबी निभा सकते हैं. आशुतोष की बातों के समानान्तर सच यही है कि अरविंद के अलावा पार्टी के पास कोई दूसरा चेहरा नहीं जिसके बूते इन राज्यों में चुनावी वैतरणी पार करने का जोखिम उठाया जा सके. यही कारण है कि अरविंद बार-बार इन राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं. उन्हें लोगों से कहना पड़ रहा है कि सही वक्त पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नेता का चुनाव होगा.

गोवा, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. आम आदमी पार्टी की नजर अभी पंजाब और गोवा चुनाव पर टिकी है. पंजाब में ड्रग्स तस्करों और राजनीतिकों के नेक्सस को चुनौती देने के लिए आम आदमी पार्टी ने पूरी रणनीति तैयार कर ली है. चुनाव से पहले उड़ता पंजाब फिल्म ने चुनाव की पटकथा तैयार कर दी है, बस अब चुनावी बिगुल फूंके जाने का इंतजार है. वहीं, कांग्रेस पार्टी अभी पंजाब में चुनाव प्रभारी तय करने में ही उलझी हुई है. अन्य पार्टियां यह प्रचार करने में जुटी हैं कि जो पार्टी अपना चुनाव प्रभारी तक नहीं तय कर पा रही है, वह किस बूते चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस के रणनीतिकारों को अंदेशा है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती है. कांग्रेस इस राज्य में फिर वापसी करने के इंतजार में है. नशे का बढ़ता कारोबार और एंटी इनकमबेंसी फैैैैक्टर सत्तारूढ़ अकाली दल-भाजपा की राह का रोड़ा बने हैं. आप का मानना है कि बादल सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप और अकाली दल-भाजपा में अनबन की खबरों से उकताए लोग अब राज्य में बदलाव चाहते हैं. आप इन सभी मुद्दों को भुनाने की तैयारी में पहले से ही मैदान में है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी राज्य में कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनाव प्रभारी तय करने की विफलता से निराश हैं. आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनाव प्रचार के लिए वीडियो जारी कर दिया गया है. वीडियो के अंत में पांच साल केजरीवाल गाना बजता है. अब ड्रग्स, भ्रष्टाचार छंटने वाला है, केजरीवाल आने वाला है के नारों से यह तय है कि यह चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाना है. ये ऐसे चुनावी मुद्दे हैं, जिस पर सत्तारूढ़ पार्टी बेबस नजर आती है.

राजनीतिक दल केजरीवाल को सियासी डगर पर सधे कदम से, बिना डिगे खामोशी से बढ़ता देखकर हतप्रभ भी हैं और चौकन्ने भी. तमाम राजनीतिक विश्लेषकों की भविष्यवाणियों को धता बताते हुए अरविंद गोवा व पंजाब में चुनाव प्रचार के दौरान किसी हड़बड़ी में नहीं दिखते हैं. वे आम जनता से संवाद स्थापित करने के लिए अपने को उन लोगों के बीच का आम आदमी बताना भी नहीं भूलते. लच्छेदार भाषणों के बजाय आमफहम भाषा में संवाद अदायगी के अंदाज पर जनता भी खुश है. उनके विरोधियों को लगता है कि केजरीवाल सादगी का विज्ञापन करने में माहिर हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में अति आत्मविश्वास से भरे केजरीवाल हार से सबक लेने के बाद अब राष्ट्रीय पटल पर एक मंजे राजनीतिक की तरह उभरे हैं.

यही कारण है कि गोवा में आम आदमी पार्टी की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा से सत्तारूढ़ भाजपा समेत अन्य पार्टियों में खलबली मची है. अरविंद गोवा में जनता से एक ही बात कहते हैं, हम 40 में से 35 सीट जीत रहे हैं. अब राष्ट्रीय पार्टियों को उनका यह आत्मविश्वास, ओवर कॉन्फिडेंस नहीं लगता. एक समय गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि जिस तरह बाजार में नए और अनजान व्यापारी का चेक नहीं चलता, उसी तरह  केजरीवाल राजनीति में नए हैं, जनता को पहले उन्हें दो-तीन साल तक परखना चाहिए. इस बयान के बाद गंगा में बहुत पानी बह चुका है. अब उनके धुर राजनीतिक विरोधियों को भी पता है कि अरविंद चुनावी बिसात को पलटने का दम-खम रखते हैं. दिल्ली चुनाव का भयानक सच आज भी भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को परेशान करता है. उन्हें डर है कि कहीं गोवा और पंजाब में भी उनकी हालत दिल्ली जैसी न हो जाए.

पंजाब में कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी दबे मन से यह स्वीकार करते हैं कि यहां के चुनाव में फिलहाल आप को बढ़त हासिल है. आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष कहते हैं, हमें पता है कि हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अपील है. लेकिन चुनावी समर में उतरने से पहले हम अपना संगठन मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और सभी दक्षिणी राज्यों में सांगठनिक स्तर पर प्रमुखता से काम हो रहा है. पंजाब में चार लोकसभा सीट जीतने के बाद से ही पार्टी विस्तार के लिए रणनीति तैयार करने में जुटी थी. पंजाब, गोवा के बाद गुजरात में भी आम आदमी पार्टी अपने संगठन का विस्तार कर रही है. नरेंद्र मोदी को घर में ही घेरने की तैयारी में आप के रणनीतिकार जुटे हैं. गुजरात के कथित विकास मॉडल को चुनौती देने के लिए दिल्ली का विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है. राष्ट्रीय पटल पर मोदी विरोधी की पहचान बनाकर केजरीवाल समाज के एक धड़े को पार्टी के साथ जोड़ने में सफल रहे हैं. गोवा और पंजाब के चुनाव में केजरीवाल अगर अपनी यह पहचान बनाए रखने में सफल रहे, तो राष्ट्रीय फलक पर वे एक मजबूत नेता के तौर पर उभरेंगे.

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