आम के कुछ ऐसे गुण जिसे जान कर रह जायेंगे आप हैरान

  • mango   विसूचिका- 20 ग्राम आम के पत्तों को कूट कर आधा लीटर जल में पकाकर क्वाथ बनाएं, चतुर्थांश शेष रहने पर, छानकर पिलाने से लाभ होता है.
  •    आम का शर्बत या आम का पना बार-बार पिलाने से विसूचिका में लाभ होता है.
  •    परिणाम शूल (अल्सर)- प्रातः 8 बजे और सायंकाल 4 बजे 2-3 मीठे पके आमों को खाने के बाद 250 मिली दूध पी लें, पानी बिल्कुल न पीएं. एक घंटे बाद उबालकर ठंडा किया हुआ पानी, जरूरत हो तो पी लें. दोपहर के भोजन में आम के रस के साथ गेहूं की रोटी का सेवन करें. इस अवधि में अन्य कोई भोज्य पदार्थ न लें. एक सप्ताह में आशातीत लाभ होता है.
  •    आम के ताजे कोमल पत्ते 10 नग और काली मिर्च 2-3 नग दोनों को जल में पीसकर गोलियां बना लें,

किसी भी दवा से बंद न होने वाले उल्टी-दस्त इससे बंद हो जाते हैं.

  •    भस्मक रोग- मीठे आम का रस 250 मिली, 40 ग्राम घी, 50 ग्राम खांड़ तीनों को एक साथ मिलाकर सेवन करने से भस्मक रोग (अत्यधिक भूख लगना) में लाभ होता है.
  •    उदरकृमि- 250 से 500 मिग्रा कच्चे आम की गुठली के चूर्ण को दही या जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से उदरकृमियों का शमन होता है.

वृक्कवस्ति रोग :

  •    मधुमेह-आम के छाया में सुखाए हुए 10 पत्तों को आधा किलो जल में उबालें, चौथाई जल शेष रहने पर प्रातः सायं पिलाने से मधुमेह में लाभ होता है.
  •    2-5 ग्राम छाया शुष्क पत्र चूर्ण को गुनगुने जल के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है.
  •    आम की 25 ग्राम ताजी छाल को यवकुट कर रात्रि में 250 मिली जल में भिगो कर प्रातः काल मसलकर, छानकर पीने से सुजाक तथा प्रमेह में लाभ होता है.
  •   आम पत्र के छाया शुष्क 6 ग्राम चूर्ण को प्रातः सायं ताजे जल के साथ सेवन करने से लाभ होता है.
  •    आम की ताजी अन्तः छाल के 20 मिली रस में 5 मिली चूने का निथरा हुआ जल मिलाकर पिलाने से प्रमेह एवं सूजाक में लाभ होता है.

त्वचा रोग :

  •    आम के कच्चे फलों को तोड़कर (जिनमें जाली न पड़ी हो), कुचलकर कपड़े से छानकर रस निकाल लें. रस का चौथाई भाग विकृत स्प्रिट या शुद्ध एल्कोहल मिलाकर शीशी में भरकर रखें. इसे दो दिन बाद प्रयोग करें. इसको लगाने से पुरानी दाद, खुजली आदि व्याधियां शीघ्र मिटती हैं. इसे रूई की फुहेरी से लगाने से फूटी हुई गले की गांठें, भगंदर, पुराने फोड़े आदि जड़ से दूर हो जाते हैं.
  •    आम को तोड़ते समय, आम फल की पीठ में जो गोंदयुक्त रस निकलता है, उसे दाद पर लगा देने से छाला पड़ जाता है और फूटकर पानी निकल जाता है. दो-तीन बार लगाने से दाद से छुटकारा मिल जाता है.
  •    आम वृक्ष के गोंद को थोड़ा गर्म कर लगाने से फोड़ा पककर, फूटकर बह जाता है और घाव आसानी से भर जाता है.
  •    घमौरियां- गर्मी के दिनों में शरीर पर पसीने के कारण छोटी-छोटी फुन्सियां हो जाती हैं, इन पर कच्चे आम के भुने हुए गूदे को लगाने से लाभ होता है.
  •    अग्निदग्ध- गुठली की गिरी को थोड़े पानी के साथ पीसकर आग से जले हुए स्थान पर लगाने से दाह तथा वेदना का शमन होता है.

सर्वशरीर रोग  :

  •    शरीर पुष्टि के लिए- नित्य प्रातः काल मीठे आम चूसकर, उपर से सोंठ व छुहारे डालकर पकाए हुए दूध को पीने से पुरुषत्व में वृद्धि और शरीर पुष्ट होता है. विष चिकित्सा
  •    आम की गुठली को जल के साथ पीसकर दंश स्थान पर लगाने से भंवरी, मधुमक्खी, बर्र, ततैया, बिच्छू आदि विषैले कीड़े मकौड़े के दंश से उत्पन्न दाह तथा वेदना का शमन होता है.

आम के अन्य प्रयोग :

  •    पके हुए मीठे देशी आमों का ताजा रस 250-350 मिली, 50 मिली गाय का ताजा दुहा हुआ गर्म दूध अदरक का रस एक चम्मच तीनों को कांसे की थाली में अच्छी तरह फेंट लें, लस्सी जैसा हो जाने पर धीरे-धीरे पी लें, 2-3 सप्ताह सेवन करने से मस्तिष्क की दुर्बलता, सिर की पीड़ा, सिर का भारी होना, आखों के आगे अंधेरा हो जाना आदि दूर होता है. यह कल्प यकृत्‌ के लिए भी विशेष लाभदायक है.
  •    कच्चे आम की गुठली जिसमें जाली न पड़ी हो का चूर्ण 60 ग्राम, जीरा, काली मिर्च व सोंठ का चूर्ण, 20 ग्राम आम्रवृक्ष के गोंद का चूर्ण 5 ग्राम तथा अफीम का चूर्ण 1 ग्राम इनको खरल कर, वस्त्र से छानकर बोतल में बंद कर सुरक्षित करें. 3-6 ग्राम तक अवस्थानुसार दिन में 3-4 बार सेवन करने से संग्रहणी, आम अतिसार, रक्तस्राव शूलादि का शमन होता है.
  •    आम की मंजरी का क्वाथ (10-20 मिली) या चूर्ण (1-2 ग्राम), अतिसार, पुरानी पेचिश और सूजाक में उपयोगी है. इसके चूर्ण का धुआं मच्छरों को भगाता है.
  •    10-20 मिली आम के फूलों का काढ़ा या 1-2 ग्राम चूर्ण सेवन करने से अथवा इनके चूर्ण में चौथाई भाग मिश्री मिला सेवन करने से अतिसार, प्रमेह, अरुचि, रक्तदोष, दाह एवं पित्त के उपद्रव नष्ट होते हैं.
  •    10-20 मिली आम के फूलों के रस में 10 ग्राम खांड मिलाकर सेवन करने से प्रदर में लाभ होता है.
  •    आम का ताजा कोमल पत्र तोड़ने से जो एक प्रकार का द्रव पदार्थ निकलता है, उसे नेत्र-पिडका पर लगाने से, या पत्रों के बीच की लकड़ी (मध्य शिरा) की भस्म लगाने से लाभ होता है. पत्रों के उक्त द्रव पदार्थ  को बिवाई में भर देने से तुरंत लाभ होता है.
  •    आम के 11 पत्र, जो वृक्ष पर ही पककर पीले रंग के हो गए हों, उसे लेकर 11 लीटर पानी में उबालें, जब पानी आधा शेष रह जाए तो उतार कर शक्कर और दूध मिलाकर चाय की तरह पिएं. यह चाय शरीर के समस्त अवयवों को शक्ति-प्रदान करती है.
  •    आम की गुठली की गिरी का अनाज और चारे की जगह अच्छा प्रयोग हो सकता है. इसमें प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाए जाते हैं.
  •    आम में मक्खन से कई गुना अधिक पोषक तत्व विद्यमान हैं, उचित तरीके से प्रयोग करने पर आम स्नायु तंत्र को मजबूत बनाता है. शुद्ध रक्त बहुतायत से उत्पन्न होता है और शक्ति वृद्धि होती है.
  •    जिन व्यक्तियों को मंदाग्नि, संग्रहणी, पुराना अतिसार, अजीर्ण, प्रमेह, धातुक्षीणता, क्षय, उदर रोग, प्लीहा, वायुगोला, नसों में सूजन हो गया हो, जिनके शरीर में कफ और पित्त का निरंतर प्रकोप रहता हो, दिल दिमाग कमजोर हो गया हो, ऐसे रोगियों को आम का कल्प लाभदायक है.
  •    आग से झुलसना, खरोंच लगना आदि के लिए आम के पत्तों की भस्म एक उत्तम औषधि है.
  •    रक्तप्रदर एवं अर्श- 10-20 मिली छाल स्वरस को दिन में दो

बार पीने से बवासीर, अत्यधिक मासिक-स्राव या रक्तातिसार के कारण होने वाले रक्तस्राव में लाभ होता है.

प्रयोज्यांग : फल, पत्र, बीज गिरी, छाल, पुष्प तथा मंजरी.

मात्रा : चिकित्सक के परामर्शानुसार.