बंदू़क और बात साथ नहीं चल सकती

armyसंसद परिसर में भगवंत मान का वीडियो बनाना सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चूक हो सकती है और इस मामले में कार्रवाई किए जाने की जरूरत है. हालांकि, पूरे मुद्दे पर विचार करें, तो चेंबर के भीतर संबंधित सदस्य के लिए लोकसभाध्यक्ष की एक छोटी सी टिप्पणी ही काफी होती. इसकी जगह 9 सदस्यीय कमेटी बनाना जरूरी नहीं था. जाहिर है, इसकी शुरुआत सत्ताधारी दल की तरफ से हुई होगी, जो इस मसले को पेचीदा बनाना चाहती है. यह लोकसभा के काम करने का तरीका नहीं है. असल में, यह कुछ मायनों में लोकसभा की अवमानना ही है. इस मसले के लिए कई बेहतरीन नियम हैं. लोकसभाध्यक्ष को पूरा अधिकार है कि वो इन नियमों का खुद इस्तेमाल करें. चूंकि, लोकसभाध्यक्ष सत्ताधारी दल से हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए, फ्री और फेयर तरी़के से काम करते हुए दिखना चाहिए. अब इस कमेटी को चाहिए कि वो मान को चेतावनी दे   कि पहली बार उनसे इस तरह की गलती हुई है, आगे ऐसा नहीं होना चाहिए. और, बस यहीं मामले को खत्म कर देना चाहिए.

दूसरा मामला है महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन का, जहां वे सत्ता में भी हैं. महाराष्ट्र में यह गठबंधन कुछ बेहतर तरी़के से नहीं चल रहा है. जब बाला साहब ठाकरे जीवित थे तब भाजपा व शिवसेना के बीच गठबंधन बहुत सही तरी़के से चल रहा था. उस दौरान प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे भी थे. उन दिनों दोनों पार्टियों के बीच बेहतर आपसी समझ थी. अभी जनता के बीच ये  लोग जिस तरह से बयानबा़जी कर रहे हैं,  वह ठीक नहीं है. इससे सरकार की प्रतिष्ठा को ही नु़कसान हो रहा है. अब या तो भाजपा एक स्टैंड लेकर गठबंधन को खत्म कर दे. अगर भाजपा को ऐसा लगता है कि वो बहुत अधिक लोकप्रिय है तो फिर क्यों नहीं एक चुनाव करा लेती है. इस तरह की बयानबा़जी का कोई मतलब नहीं है. वास्तविक राजनीति की बात करें तो कांग्रेस और एनसीपी को एक साथ और भाजपा और शिव सेना को एक साथ होना चाहिए. यह ठीक राजनीति होगी. लेकिन, कोई पार्टी अपनी तरफ से बयानबा़जी करने लगे तब तो फिर अंतिम निर्णय जनता की अदालत में ही होगा. मुंबई के निगम चुनाव आ रहे हैं. ये चुनाव शिव सेना के लिए महत्वपूर्ण हैं. भाजपा चाहे तो यह चुनाव अकेले लड़ सकती है. अच्छा यह होगा कि दोनों पार्टियों के नेता मिल कर बैठें, बात करें और समस्या का समाधान निकालेंं. मुख्यमंत्री और उद्धव ठाकरे को लगातार एक-दूसरे के संपर्कमें रहना चाहिए, यही एकमात्र समाधान है.

इसके बाद एक अहम मुद्दा आता है, पड़ोसी के साथ रिश्ता. पाकिस्तान एक निरंतर समस्या रहा है और आगे भी रहेगा. पाकिस्तान जिस मुद्दे पर भी भारत से बात करना चाहता है, भारत उसपर बात करने के लिए तैयार है. लेकिन, बातचीत उस वक्त होगी, जब बंद़ूकें खामोश हो जाएंगी. जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि जब बम धमाकों की आवा़जें  इतनी त़ेज होंगी तो हम बात कैसे कर पाएंगे, आप मेरी आवा़ज कैसे सुन पाएंगे? पहले जमीनी स्तर पर शांति लाइए, फिर बात कीजिए. मैं यशवंत सिन्हा की इस राय से इत्ते़फा़क रखता हूं कि हमें पाकिस्तान से बातचीत करने में बहुत ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखानी चाहिए. अगर दूसरा पक्ष बातचीत में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है तो फिर आप बात करने के लिए क्यों जाते हैं. हम बातचीत करने के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन आतंकवाद और बातचीत साथ साथ नहीं चल सकते. कुछ बुनियादी बातों पर सहमति होनी चाहिए जिसके आधार पर आगे की बातचीत हो. लिहा़जा, बात करने के लिए उत्सुकता दिखाना केवल भारत की ही जिम्मेदारी नहीं है.

दूसरी बात ये कि नेपाल के साथ अपने संबंधों में इस बात का ख्याल रखिए कि वह दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र है. लेकिन, आप उसके साथ संबंधों को संभाल नहीं पा रहे हैं. आपने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि वहां के प्रधानमंत्री भारत से अधिक चीन के साथ खुश दिख रहे हैं. यह एक कम़जोर कूटनीति, कम़जोर राजनीति और कम़जोर विदेश नीति का परिणाम है. बहरहाल, नेपाल में हालात ठीक हो रहे हैं और वहां नए प्रधानमंत्री का चुनाव होना है. ऐसे में हमें पुरानी गलतियां फिर से नहीं दुहरानी चाहिए. हमें बिग ब्रदर का व्यवहार नहीं दिखाना चाहिए. हम उन्हें डरा या धमका नहीं सकते हैं. इससे हालात और खराब होंगे. नेपाल के साथ हमारे संबंध सैकड़ों साल पुराने हैं. अगर आप धार्मिक दृष्टि से देखें, तो सीता और जनक का संबंध नेपाल से ही था. हमें अपना दिल बड़ा करना चाहिए. उदारता दिखानी चाहिए. आ़िखरकार, नेपाल के लाखों नागरिक भारत में काम कर रहे हैं. कभी भी आप उनके इंधन की आपूर्ति रोक देते हैं. ठीक है कि मधेसी, पहाड़ी लोगों से नाराज हैं. हम खुले तौर पर मधेसियों का पक्ष लेकर वहां के प्रधानमंत्री की मुश्किलें नहीं बढ़ा सकते. नेपाल को संभालना आसान है, लेकिन उसके लिए सही राजनयिक की नियुक्ति करनी होगी जो सही तरी़के से काम कर सके, जिसे पीएमओ और विदेश मंत्रालय से सही निर्देश मिले, ताकि समस्या का समाधान हो सके.

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