मगध विश्वविद्यालय : बंटवारे के सवाल पर बवाल

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magdh-universityबिहार के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप में शुमार मगध विश्वविद्यालय के बंटवारे के सवाल पर हंगामा शुरू हो गया है. बिहार सरकार के द्वारा मगध विश्वविद्यालय को दो भागों विभाजित करने के निर्णय से मगध विश्वविद्यालय में एक तरह से भूचाल आ गया है. मगध विश्वविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर तथा छात्र संगठन बंटवारे के खिलाफ एकजुट होकर राज्य सरकार से सीधी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी बिहार सरकार के इस निर्णय को गलत बताया है. मांझी ने कहा कि पटना पहले से ही एजुकेशनल हब बना है. सरकार का मगध विश्वविद्यालय के बंटवारे का निर्णय मगधवासियों के खिलाफ है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हम बिहार सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हैं और हम बंटवारे के विरोध में होने वाले आंदोलन के साथ हैं. मगध विश्वविद्यालय सिनेट के सदस्य तथा मूटा के महासचिव डॉ. ब्रजेश राय ने कहा कि हम लोग बिहार सरकार के इस निर्णय का किसी भी हदतक जाकर विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि मगध विश्वविद्यालय का 1992 में बंटवारा करके वीर कुवंर सिंह विश्वविद्यालय बनाया गया था. उस बंटवारे का दंष अभी तक मगध विश्वविद्यालय के कर्मी झेल रहे हैं. एक साजिश के तहत मगध विश्वविद्यालय का बंटवारा कर पटना में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का मुख्यालय बनाने का राज्य सरकार ने जो निर्णय लिया है, हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं. पटना के पास विश्वविद्यालय बनाने की जमीन नहीं है. वहीं नालांदा के नाम पर पूर्व से संचालित विश्वविद्यालय पटना में किराए के भवन में चल रहा है. मगध विश्वविद्यालय के शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ ने 1 अगस्त 2016 को मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय में बंटवारे के खिलाफ सांकेतिक धरना दिया और दोबारा बंटवारे को मगध विश्वविद्यालय का असामयिक निधन मानते हुए 13 दिन का शोक मनाते हुए श्राद्धकर्म करने का निर्णय लिया.

मगध विश्वविद्यालय के प्रस्तावित बंटवारे के बाद पटना, नालंदा, जहानाबाद तथा नवादा में चल रहे अंगीभूत, संबद्ध, बीएड व वोकेशनल कॉलेज मगध विश्वविद्यालय से कट जाएंगे. फिलहाल मगध विश्वविद्यालय में 44 अंगीभूत, 4 अल्पसंख्यक अंगीभूत, 200 संबद्ध, 56 बीएड तथा कई फार्मेसी व वोकेशनल कॉलेज हैं. मगध विश्वविद्यालय की स्थापना तत्कालीन शिक्षामंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के प्रयास से 1962 में की गई थी. इसके लिए बोधगया स्थित शंकाराचार्य मठ के महंत, बुधौली मठ के महंत तथा अन्य कई मठों के महंतों ने भूमि दान में दी थी. अपने स्थापना के शुरुआती दिनों में ही यह विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर पूरे देश में चर्चित हो गया था, लेकिन 1992 में कुछ लोगों की राजनीतिक साजिश के तहत इस विश्वविद्यालय का बंटवारा  कर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा में बनाया गया. अब दूसरी बार मगध विश्वविद्यालय का बंटवारा करने का प्रयास किया जा रहा है. प्रस्तावित बंटवारे के खिलाफ मगध विश्वविद्यालय के शिक्षक व कर्मी आक्रोशित हैं. प्रस्तावित बंटवारे के खिलाफ यहां के शिक्षक व कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है. यहां के कर्मियों का कहना है कि प्रस्तावित बंटवारे से इस विश्वविद्यालय की स्थिति बौनी हो जाएगी. कभी यह विश्वविद्यालय देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय था, लेकिन 1992 में इस विश्वविद्यालय को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के रूप में बांटे जाने के बाद यह सिर्फ उत्तर भारत के बड़े विश्वविद्यालय के रूप में सिमट गया. प्रस्तावित बंटवारे के बाद मगध विश्वविद्यालय का वजूद राजधानी पटना समेत सात जिले से घट कर मात्र दो जिलों में सिमट जाएगा. मगध विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. डा. सुनील कुमार सिंह ने कहा है कि मगध विश्वविद्यालय का प्रस्तावित बंटवारा इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय का वाजूद समाप्त करने की साजिश है. इसके खिलाफ विश्वविद्यालय के शिक्षक कोई भी कुर्वानी देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने एक तरह से गया की पहचान को खत्म करने की साजिश कर रही है. कभी साहाबाद, कैमूर-रोहतास, मगध व पटना प्रमंडल में इस विश्वविद्यालय का विस्तार था. अब केवल गया, जहानाबाद व औरंगाबाद तक ही सिमट कर रह जाएगा. बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष तथा मगध विश्वविद्यालय के अभियंता रमेश प्रसाद ने कहा कि 1992 में मगध विश्वविद्यालय को काट कर आरा में वीर कुवंर सिंह विश्वविद्यालय बनाया गया, लेकिन अभी तक वहां अपना भवन नहीं बन सका है. मगध विश्वविद्यालय के बंटवारे का विरोध बड़े पैमाने पर किया जाएगा. मगध विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के महासचिव डॉ. अमरनाथ पाठक ने कहा है कि विश्वविद्यालय के कर्मचारी बंटवारे को रोकने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं. डा. पाठक ने कहा कि मगध विश्वविद्यालय का यह बंटवारा वर्तमान कुलपति की अक्षमता का परिचायक है. जनअधिकार पार्टी के मगध विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और छात्र संघ के नेता भवानी सिंह ने यहां तक कह दिया कि हमारी लाश पर ही मगध विश्वविद्यालय का विभाजन होगा. चाहे इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़े, हम सभी छात्र मगध विश्वविद्यालय को दो भागों में बंटने नहीं देंगे. छात्र संघ इसके लिए अनिश्चितकालीन अनशन के साथ आंदोलन भी करेगा. मगध विश्वविद्यालय के दो भागों में बांटने के राज्य सरकार के निर्णय से मगध क्षेत्र के आमलोगों में भी आक्रोश उबल पड़ा है. मगध के विकास के बदले राज्य सरकार द्वारा इसके अस्तित्व को समाप्त करने की कोशिश की बात पर मगध के लोग अब राज्य सरकार के खिलाफ निर्णायक आंदोलन करने की तैयारी में लगे हैं.

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