साईं वंदना : प्राणिमात्र का कल्याण ही एकमात्र उद्देश्य

sai-babaमत्कार : सद्गुरु की सूक्ष्म कार्य-प्रणाली
क्या सद्गुरु चमत्कार करते हैं?
जैसा हम समझते हैं कि किसी कार्य को कोई करता है-मकान बनाना, नौकरी करना आदि, तो सद्गुरु भी इसी प्रकार चमत्कार का कोई कार्य करते होंगे, सद्गुरु इस प्रकार कोई कार्य करने की तरह चमत्कार नहीं करते. उनके काम का दायरा इतना वृहत् है कि वे हजार-हजार प्राणियों की एक ही समय में, एक साथ उन्नति कर सकते हैं. एक ही स्थूल शरीर लेकर यदि वे इतना करना चाहेंगे तो यह संभव नहीं होगा, क्योंकि इस स्थिति में समय और दूरी से वे सीमित हो जाएंगे. इसलिए उनका कार्य एक सूक्ष्म शक्ति के द्वारा होता है, जिसको समझ न सकने के कारण हम उसे चमत्कार कहते हैं. सूक्ष्म शक्ति के द्वारा कार्य करना उनका स्वभाव है और वे उसके बारे में सोचते भी नहीं हैं. उदाहरण के लिए जब आदमी पैरों से चलता हो और पक्षी अपने पंख से उड़ता हो, तो वह यह नहीं सोचता कि वह चल रहा है या उड़ रहा है, क्योंकि यह उसका स्वभाव है. उसी प्रकार जिसे लोग चमत्कार कहते हैं, वह सद्गुरु का सूक्ष्म स्वभाव है. प्रकृति की सारी शक्तियां उनकी शक्ति से स्वतः चालित होती हैं. जैसे आग का बुझ जाना, बारिश का रुक जाना या किसी की अलौकिक उपाय से मदद करना.
चमत्कार : सामूहिक कल्याण के लिए प्रयुक्त ईश्‍वरीय शक्तियां 

ऐसा देखा गया है कि कुछ तथाकथित साधु-संन्यासी, फकीर आदि जिन्हें छोटी-छोटी सिद्धियां प्राप्त होती हैं, अपनी शक्तियों का दंभ रखते हैं और उनका चमत्कारिक प्रदर्शन करते हैं. इस संबंध में आपकी क्या धारणा है?
बहुत कम लोगों को असली सिद्धियां प्राप्त होती हैं. ये सिद्धियां भी प्रकृति की शक्तियां होती हैं, जो अद्भुत कार्य करती हैं. चमत्कारिक प्रदर्शन के लिए किए जाने वाले कृत्यों में ईश्‍वरीय शक्ति नहीं अपितु निम्न स्तर की तन्त्र या टोटका विद्या होती है. जिनहें वास्तविक शक्ति कहते हैं, वह ईश्‍वरीय शक्ति होती है, जिसका उद्देश्य सामूहिक कल्याण होता है. जब तक अहंकार रहेगा, तब तक ईश्‍वरीय शक्ति का आना सम्भव नहीं है. अहंकार खत्म होने से ही ईश्‍वरीय शक्तियों का आविर्भाव होता है. लोगों को प्रभावित करने के लिए या दूसरों का अहित करने के लिए शक्तियों के चमत्कारपूर्ण प्रदर्शन का दंभ अनुचित है. यदि कोई इन सिद्धियों का, शक्तियों का अनुचित प्रयोग करता है, तो ये शक्तियां उसी व्यक्ति के लिए विनाशकारी सिद्ध होती हैं और उसका साथ छोड़ देती हैं. जिसके पास ईश्‍वरीय शक्तियां होंगी उसे उनका रंचमात्र भी दंभ नहीं होगा. सद्गुरु का हाथ सुदृढ़ मुट्ठी की भांति होता है, जिसमें विश्‍व की आधारभूत अगणित शक्तियां बंधी हुई होती हैं, जो कभी भी मिथ्या चमत्कार प्रदर्शन या अमंगल के लिए नहीं खुलती. यह बात दूसरी है कि आर्तजनों के कल्याण के लिए अनेक बार उनके द्वारा विस्मयकारी घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिन्हें लोग चमत्कार का नाम दे देते हैं, किंतु, सद्गुरु स्वयं उन अलौकिक समझे जाने वाले कृत्यों से बेखबर होते हैं. वे सिद्धियों के पीछे नहीं, सिद्धियां उनके पीछे चलती हैं. प्राणिमात्र का कल्याण ही उनका एकमात्र उद्देश्य होता है.
गुरु और चमत्कार 

अक्सर लोग अपने गुरु के चमत्कारिक कृत्यों का बढ़ा-चढ़ा कर उल्लेख करते हैं. इस विषय में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
गुरु के चमत्कारों का उल्लेख कर प्रमाणित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए. अपने घर में या समाज में मेरा धर्म, मेरा गुरु-यह प्रमाणित करना नहीं है. अगर वास्तव में धर्म और गुरु में गुण होंगे, शक्तियां होंगी तो वे स्वयं भासित होंगी. आपको गुरु का झूठा प्रचार-प्रसार करने की जरूरत नहीं है. गुरु के बारे में बोलने से कि-मेरे गुरु ऐसा अलौकिक कार्य कर रहे हैं-फोटो से शहद झर रहा है-ऐसा झूठ बोलने से महापाप होता है. केवल गुरु सत्य हैं. वे तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम) से अतीत हैं. मैं हर स्थान पर कहता हूं, कभी भी श्री साईंनाथ के बारे में गलत बातें बढ़ा-चढ़ा कर मत बोलना.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *