भारत की व्यापक कश्मीर नीति पर सर्वदलीय बैठक की एक राय : पीओके भी भारत का हिस्सा है

kashmir-policyकश्मीर में महीने भर से जारी हिंसा और कर्फ्यू के मसले पर सड़क से लेकर संसद तक मामला गरमाने के बाद कांग्रेस की मांग पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने विपक्षी दलों पर फुहारें डालने का काम किया. बैठक के बाद बाहर आए भाकपा नेता डी राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए जब यह कहा कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर भारत का आंतरिक हिस्सा है और उसकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता, तो ऑल पार्टी मीटिंग का लब्बोलुआब समझ में आ गया. बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाई जा रही है. बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के बदतर हालात के बारे में भी दुनिया को बताया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत का हिस्सा बताया.

ऑल पार्टी मीटिंग में सभी दलों के नेता शामिल हुए थे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर के मुद्दे पर विपक्षी दलों के नेताओं से बात करते हुए बलूचिस्तान और पीओके को लेकर पाकिस्तान को खूब लताड़ा. इस बैठक के बाद ही बलूच के नेताओं ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. बलूची एक्टिविस्ट नायला बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग बहुत परेशानी में हैं और हम सब को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीदें हैं. हम बलूचिस्तान, गिलगित और पीओके के लोग प्रधानमंत्री मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहेंगे कि उन्होंने हमारा समर्थन किया. एक अन्य बलूची नेता हम्माल हैदर बलोच ने कहा, हम सब को अच्छा लगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी आज़ादी की लड़ाई को सपोर्ट किया. ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत के प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान के लोगों को समर्थन देने की बात की है. सच में यह बहुत ही कठिन फैसला है. हम बलूच लोग भारत की ही तरह सेकुलर डेमोक्रेटिक सरकार चाहते हैं. पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं मानता. वह बलूचिस्तान के लोगों को मारता रहता है. अब वक़्त आ गया है जब दुनिया को इस बारे में आगे आकर बोलना होगा. पाकिस्तान सिंधी एक्टिविस्टों को भी चुन-चुन कर मार रहा है. प्रधानमंत्री ने भी कहा कि पाकिस्तान भूल जाता है कि वह अपने ही देश के नागरिकों पर लड़ाकू विमान से बम बरसाता है. अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को विश्‍व के सामने बलूचिस्तान में और पाक-अधिकृत कश्मीर में लोगों पर हो रहे अत्याचारों का जवाब देना होगा.

ऑल पार्टी मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम जब जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, तो हमें जम्मू-कश्मीर राज्य के चारों भाग जम्मू, कश्मीर-घाटी, लद्दाख, और पाक-अधिकृत कश्मीर को लेकर बात करनी चाहिए. मोदी ने राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रति आभार जताया कि उन्होंने जम्मू और कश्मीर की मौजूदा स्थिति के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की. लोकतंत्र द्वारा पिछले छह दशकों से पोषित समृद्ध परंपरा ही देश की एकता और अखंडता की सबसे बड़ी ताकत रही है. यही वजह है कि कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हुए भी देश की अखंडता और संप्रभुता के मसले पर सब एकजुट रहते हैं. प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर में हाल में हुई घटनाओं पर गहरा दुख जताया और कहा कि हम कश्मीर के मुद्दे का संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप स्थायी और शांतिपूर्वक हल के लिए प्रतिबद्ध हैं. असल में जम्मू और कश्मीर सर्व पंथ समभाव की सदियों पुरानी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जहां पर हिन्दू, सिख, बौद्ध एवं मुसलमान सदियों से एक साथ रहते आए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ तत्वों के दुष्प्रचार के बावजूद कश्मीर में भ्रम और अशांति फैलाने वालों का प्रतिशत बहुत कम है. हर कश्मीरी अमन-चैन चाहता है और लोकतंत्र में विश्‍वास रखता है. इसलिए अलगाववादी तत्वों की धमकियों के बावजूद कश्मीर की जनता ने हर बार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आस्था व्यक्त की और चुनाव में हिस्सा लिया.

बैठक में मौजूद विपक्षी दलों ने भी यह माना कि कश्मीर में अशांति की जड़ सीमा पार से पोषित आतंकवाद है. इस आतंकवाद के कारण कश्मीर में आम जन-जीवन प्रभावित हो रहा है. विपक्ष के समक्ष यह आंकड़ा पेश किया गया कि 1989-1990 से अब तक विभिन्न कार्रवाइयों में 34 हजार से अधिक एके-47 राइफलें बरामद हुईं. पांच हजार से अधिक ग्रेनेड लॉन्चर बरामद हुए. करीब 90 लाइट मशीन गन (एलएमजी) बरामद हुईं. 12 हजार से अधिक पिस्तौलें और रिवॉल्वर बरामद हुए, तीन एंटी टैंक और चार एंटी एयर क्राफ्ट गन्स बरामद हुए. 350 से अधिक मिसाइल लॉन्चर बरामद किए गए. आरडीएक्स  समेत 65 हजार किलोग्राम विस्फोटक और एक लाख से अधिक ग्रेनेड आदि बरामद हुए. इस अवधि में पांच हजार से अधिक विदेशी आतंकवादी, जो सेना की पांच बटालियनों के बराबर थे, मारे गए. यह पाकिस्तान की तरफ से भारत पर थोपा गया छद्म युद्ध ही तो है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर न केवल हमारी क्षेत्रीय अखंडता का मुद्दा है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीयता की परिभाषा भी है. हमें इन वास्तविकताओं से भी इंकार नहीं करना चाहिए कि सुरक्षा बलों ने हर प्रकार की चोटें सही हैं, उनके ऊपर सुनियोजित हमले हुए हैं, इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने संयम दिखाया है. आंकड़े बताते हैं कि सुरक्षा बल बड़ी संख्या में घायल हुए हैं.

कश्मीर घाटी में सदियों से रह रहे कश्मीरी पंडितों को अपने पूर्वजों के घरों से विस्थापित किया जाना भी कम दुखद नहीं है. एक समुदाय विशेष के विरुद्ध इस प्रकार की ज्यादती पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों और उनसे सहानुभूति रखने वालों का काम है. कश्मीरियत में विश्‍वास रखने वालों का यह काम नहीं है. जम्मू एवं कश्मीर के सर्वांगीण विकास के लिए पिछले दिनों ही राज्य सरकार की राय से 80 हजार करोड़ से ऊपर का एक विकास पैकेज मंजूर हुआ है. रोजगार के लिए 10 हजार स्पेशल पुलिस बल, 1200 अर्ध सैनिक बल और पांच आरआरबटालियन में लगभग चार हजार नियुक्तियां किए जाने का फैसला किया गया है. इसके अतिरिक्त उड़ान व हिमायत योजना में लगभग सवा लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है ताकि बेरोजगारों को उचित रोजगार मिल सके.

केंद्र ने विपक्ष के समक्ष अपनी नीति स्पष्ट तौर पर सामने रखी कि सरकार आतंक की कार्रवाइयों से समझौता नहीं करेगी. लोकतांत्रिक परंपरा के अनुकूल सिविल सोसाइटी को नागरिक गतिविधियों से जोड़ते हुए प्रोत्साहित किया जाएगा. कश्मीर के नवयुवकों को राज्य की सक्रिय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की व्यवस्था में तेज़ी लाई जाएगी. यह व्यवस्था भी की जाएगी कि जिन दूसरे राज्यों में जम्मू-कश्मीर के लोग रह रहे हैं, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, वे जम्मू-कश्मीर में रह रहे अपने सगे-संबंधियों से संपर्क साध कर अपनी और दूसरे प्रदेशों में हो रही प्रगति का विवरण दें, ताकि विकास के प्रति रुझान का माहौल बन सके. विदेश मंत्रालय से भी यह कहा गया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग जो विभिन्न देशों में रह रहे हैं, उनसे संपर्क साध कर उनसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करे और विश्‍व समुदाय को उसकी जानकारी दे. चार घंटे तक चली बैठक में गुलाम नबी आजाद और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पक्ष-विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर का मसला हल करने के लिए मुख्यधारा और गैर-मुख्यधारा के लोगों से बातचीत करने की भी सलाह दी.

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