आयुर्वेद का खज़ाना है कदम्ब

kadambपरिचय

भारत में सुगन्धित पुष्पों में कदम्ब का बहुत महत्व है. इसके पुष्प भगवान् कृष्ण को अत्यन्त प्रिय थे. आयुर्वेद में कदम्ब की कई जातियों तथा राजकदम्ब तथा राजकदम्बर, धारा कदम्ब, धूलिकदम्द तथा भूमिकदम्ब आदि उल्लेख प्राप्त होता है. चरक, सुश्रुत आदि प्राचीन ग्रंथों में कई स्थानों पर कदम्ब का वर्णन प्राप्त होता है. यह एशिया, प्रशांत क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल एवं म्यांमार में पाया जाता है. भारत में यह हिमालय के निचले भागों में तथा दक्षिण में उत्तरी-पश्‍चिमी घाट में पाया जाता है. सड़क के किनारे तथा उद्यानों में अलंकारिक वृक्ष के रूप में प्रायः लगाया जाता है. इसके अतिरिक्त इसकी एक और प्रजाति पाई जाती है, जिसे भूमि कदम्ब कहते हैं.

औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि

  • नेत्र रोग- कदम्ब काण्ड त्वक् को पीस-छानकर, उससे प्राप्त स्वरस को नेत्रों के बाहर चारों तरफ लगाने से नेत्र पीड़ा तथा नेत्र दाह का शमन होता है.
  • मुंह के छाले- कदम्ब के पत्तों का क्वाथ बनाकर गरारा करने से मुंह के छाले मिटते हैं.
  • पांच-दस मिली कदम्ब त्वक् क्वाथ में एक ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर रात के समय तीन दिन तक पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है.
  • अतिसार- कदम्ब के एक-दो फलों का सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है.
  • कृमिरोग- कदम्ब, भृंगराज तथा निर्गुण्डी की नवीन कोमल पत्तियों को पीसकर, उसमें आटा गूंथकर, रोटी बनाकर सेवन करें तथा बाद में तक्र पीने से उदरांत्र कृमियों का शमन होता है.
  • एक-दो ग्राम कदम्ब मूल चूर्ण में 500 मिग्रा कृष्ण जीरक, बिल्व मज्जा चूर्ण तथा 500 मिग्रा आर्द्रक चूर्ण मिलाकर, खाली पेट उष्ण जल के साथ सेवन करने से अश्मरी टूट-टूट कर निकल जाती है.
  • 10-20 मिली कदम्ब काण्ड त्वक् क्वाथ में पांच मिली आर्द्रक स्वरस मिलाकर पीने से श्‍वेत प्रदर एवं शुक्रमेह में लाभ होता है.
  • त्वचा रोग- कदम्ब के पत्तों को पीसकर शरीर पर लगाने से दद्रु, कण्डू आदि त्वचा रोगों का शमन होता है.
  • कदम्ब काण्ड त्वक् को पीसकर लगाने से सम्पूर्ण शरीर की दाह का शमन होता है.
  • कदम्ब फल का सेवन करने से कमजोरी तथा उच्चरक्तदाब में लाभ होता है.
  • कदम्ब छाल का क्वाथ बनाकर 10-20 मिली मात्रा में पिलाने से ज्वर में लाभ होता है.
  • पांच मिली कदम्ब फल स्वरस में 500 मिग्रा जीरा तथा शर्करा मिलाकर पिलाने से बच्चों के आमाशयिक क्षोभ का शमन होता है.
  • कीट दंश- कदम्ब काण्ड छाल को पीसकर दंश स्थान पर लेप करने से दंशजन्य वेदना, जलन आदि में लाभ होता है.

प्रयोज्यांगः पत्र, काण्डतवक्, मूल तथा पुष्प.

मात्राः चिकित्सक के परामर्शानुसार.