तो इसलिए मोदी ने तय किया माणा नहीं जाना

modi in himachalचीन की सीमा से लगे भारत के आखिरी गांव माणा जाकर सीमा पर तैनात सैनिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीपावली मनाने और बद्रीनाथ धाम का उनका कार्यक्रम कांग्रेस की किचकिच के कारण टल गया. कार्यक्रम को आखिरी पल में टालने के पीछे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक बयान को मुख्य कारण माना जा रहा है.

रावत ने मोदी की यात्रा के ठीक पहले कहा कि इस बार के चुनाव में मोदी ऐसे ही शीर्षासन करते नज़र आयेंगे. मोदी सैनिकों के साथ दिवाली मनाने के कार्यक्रम को सियासी तौर पर विवादित नहीं बनाना चाहते थे, लिहाजा यह कार्यक्रम आखिरी वक्त पर टाल दिया गया. इसके बाद ही मोदी ने हिमाचल के किन्नौर जाकर सैनिकों के साथ दीवाली मनाने का निर्णय लिया.

मोदी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उत्तराखंड के कई वरिष्ठ भाजपा नेता माणा गांव पहुंच भी चुके थे. चमोली जिला प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली थी. माणा गांव के भोटिया जनजाति के लोगों ने भी प्रधानमंत्री के आने की खुशी में पूरे गांव को सजा रखा था. सेना के जवान भी खुश थे. लेकिन सियासत ने उन सबकी खुशियों पर पानी फेर दिया. उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश के साथ ही चुनाव होना है. दोनों राज्यों में राजनीतिक माहौल है.

सारे राजनीतिक दल हर गतिविधि को राजनीतिक फ्रेम में कसकर देख रहे हैं. जबकि चीन सीमा पर भारत के आखिरी गांव में सैनिकों के साथ दीपावली मनाने का मोदी का कार्यक्रम गैर राजनीतिक था. सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ मोदी का यह कार्यक्रम चीन के लिए सामरिक-संदेश भी देने वाला था, लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसकी संवेदनशीलता नहीं समझी. रावत के बयान की सियासी नजाकत समझते हुए मोदी ने कार्यक्रम टाल दिया और हरदा मौका चूक गए. मोदी ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में जवानों के साथ दीवाली मनाई.

पिछले साल मोदी ने अमृतसर के खासा में डोगराई वॉर मेमोरियल का दौरा किया था. वर्ष 2014 में मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे सैन्य पोस्ट सियाचिन में जवानों के साथ दिवाली मनाई थी. मोदी की हिमाचल यात्रा को उत्तराखंड के लिए एक राजनीतिक झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है. मोदी का दौरा स्थगित होना कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर नुकसानदेह साबित हुआ, क्योंकि देवभूमि के लोग मोदी की यात्रा स्थगित होने के लिए कांग्रेस सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं.