स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मुहिम

jalजल मनुष्य की बुनियादी ज़रूरत है, इसके बगैर जीवन संभव नहीं है, लेकिन दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ लोग शुद्ध पेयजल से वंचित हैं. कहा जाता है कि वर्ष 2025 के बाद विश्व की 50 फीसद आबादी को भयंकर जल संकट झेलना पड़ेगा. यह भी कहा जाता है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा. हमारे देश में शहरों के घनी आबादी वाले इलाकों में पानी के लिए विवाद की खबरें आए दिन सुनने-पढ़ने को मिलती हैं.

सवाल यह है कि लगातार बढ़ रही जनसंख्या के अनुपात में जल स्रोत कितने बढ़ रहे हैं? वे नष्ट और लुप्त तो नहीं हो रहे? तेजी से शहरीकरण हो रहा है, इमारतों के जंगल खड़े हो रहे हैं, साथ ही प्राकृतिक स्रोतों का लगातार दोहन जारी है. नतीजतन, स्रोत सीमित होते जा रहे हैं.

पानी के मामले में ग़रीब कहा जाने वाला राजस्थान भारत के सबसे सूखे राज्यों में से एक है, जहां सालाना 100 मिमी से भी कम वर्षा होती है. थार रेगिस्तान की इस भूमि पर गर्मियों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है.

पानी की बढ़ती मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए, यह सवाल स्थानीय लोगों को काफी समय से मथ रहा था, जिसका समाधान खोजा है मोरारका फाउंडेशन ने, जो राजस्थान के नवलगढ़ में किसानों, ग्रामीणों, ग़रीबों एवं पिछड़े परिवारों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयासरत है.

मोरारका फाउंडेशन ने स्वयं सहायता समूह, रा़ेजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, सौर ऊर्जा, कम्युनिटी गैस कनेक्शन एवं बंधेज आदि हस्तकलाओं के विकास सरीखे प्रोजेक्ट पर कार्य करके ज़रूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में सफलता हासिल की है. नई-नई परियोजनाएं लाकर, नए-नए रोज़गारों का सृजन करके फाउंडेशन ने लोगों का जीवन खुशहाल बनाया.

फाउंडेशन अब नवलगढ़ में प्योरिफाइड वाटर कियोस्क (पीने का शुद्ध पानी) योजना के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ-साथ इसे रा़ेजगार का माध्यम बनाने की पहल कर रहा है. अभी तक एटीएम का मतलब आप ऑल टाइम मनी जानते होंगे. एटीएम आपको लाइन में खड़े होकर बैंक से पैसे निकालने की टेंशन से मुक्त रखता है.

कहीं भी, कभी भी एक छोटे-से कार्ड में पैसे लेकर घूम सकने की आज़ादी आजकल हर किसी को पसंद है, पर अभी तक आपने एटीएम से पैसे की जगह पानी निकलना शायद नहीं देखा होगा. नवलगढ़ में मोरारका फाउंडेशन ने वाटर एटीएम के रूप में एक नई योजना शुरू की है, जिससे लोगों को शुद्ध पानी मिल सके. वाटर एटीएम का इस्तेमाल करने के लिए एक कार्ड जारी किया जाता है, जिसे समय-समय पर रिचार्ज कराना पड़ता है.

वाटर एटीएम से एक लीटर पानी दो रुपये में, पांच लीटर पानी 10 रुपये में, 15 लीटर पानी 20 रुपये में और 20 लीटर पानी 25 रुपये में बहुत आसानी से हासिल किया जा सकता है. जैसे ही आप अपना कार्ड मशीन में लगाएंगे, पानी की मात्रा लिखेंगे, पैसे अपने आप कट जाएंगे और पानी आपके बर्तन में आने लगेगा. वाटर एटीएम सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होता है.

मोरारका फाउंडेशन की तऱफ से सबसे पहले प्रमोद पटवारी की दुकान के सामने वाटर एटीएम लगाया गया. लोग कार्ड लेकर वाटर एटीएम के पास जाते हैं और अपनी ज़रूरत के मुताबिक पानी निकाल लेते हैं. अधिकांश ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्तर पर पेयजल की सुविधा नहीं है. लोग आज भी कुओं से पानी लेकर उसका भंडारण करते हैं.

जहां सरकार की ओर से पेयजल उपलब्ध कराया जाता है, वहां लोग घर की टंकियों में उसका भंडारण करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. कुओं का पानी प्राकृतिक तो है, पर राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों के चलते उसमें जो प्राकृतिक तत्व कम या ज़्यादा हो रहे हैं, उनका निस्तारण नहीं हो पाता. सरकारी पेयजल में क्लोरीन का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है, साथ ही लापरवाही के चलते वह पीने योग्य नहीं रह जाता.

ऐसे में वाटर प्योरिफायर एक बेहतर विकल्प है, जिसकी पहल नवलगढ़ में मोरारका फाउंडेशन ने की है. शादियों एवं अन्य समारोहों में आजकल प्योरिफाइड पेयजल का चलन तेजी से बढ़ रहा है. गांवों में ऐसा पानी मंगाना काफी महंगा पड़ता है, क्योंकि उसकी सप्लाई सुदूर कस्बों से होती है.

इसलिए हर गांव का अपना कियोस्क होेना फायदे का सौदा साबित होगा. कस्बों एवं शहरों में ऐसे कियोस्क लगाना और घरों में पानी की सप्लाई का काम आज व्यवसाय का रूप ले चुका है. स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का हक़ है. मोरारका फाउंडेशन की यह योजना ग्रामीण अंचलों में पेयजल के प्रति जागरूकता पैदा करेगी.