अहद की पाबन्दी

ahadनबुव्वत मिलने से बहुत पहले ही पैग़म्बर-ए-इस्लाम की दोस्ती, वफादारी,अहद की पाबन्दी (वचनबद्वता) और अमानत दारी के चर्चे दूर दूर तक फैल चुके थे. एक अरब मुहक़्क़ि (शोध कर्ता) अबूदाऊद ने अपनी किताब में लिखा है:

जब खुदा के रसूल लगभग तीस साल के थे तो एक सौदागर ने उनसे एक जगह मिलने का वादा किया ताकि कारोबार के सिलसिले में बातचीत कर सकें।  वह आदमी अपने वादे को भुला बैठा और निर्धारित समय में निर्धारित जगह पर हाज़िर नहीं हुआ।  इस घटना के तीन दिन बाद जब वह आदमी उस जगह से गुज़रा तो यह देख कर हैरान रह गया कि हज़रत मुहम्मद (स) अभी तक वहां खड़े  हुए हैं। यानी खुदा के रसूल अपने वादे का पास करते हुए तीन दिन तक उस आदमी का इंतज़ार करते रहे थे.

 

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