बड़े काम की है ‘बड़ी इलायची’, बीमारिया रहेंगी दूर

black Cardamomपरिचय

बड़ी इलायची के फल एवं सुगंधित बीजों से भला कौन अपरिचित हो सकता है. भारतीय रसोई में यह इस तरह से रची बसी है कि इसका प्रयोग मसालों से लेकर मिष्ठानों तक में किया जाता है. इसकी एक प्रजाति, मोरंग इलायची भी होती है. यह पूर्वी हिमालय प्रदेश में विशेषतः नेपाल, पश्‍चिम बंगाल, सिक्किम, असम आदि में पायी जाती है. छोटी इलायची का भी प्रयोग औषधियों में होता है. बड़ी इलायची की मुख्य प्रजाति के अतिरिक्त एक और प्रजाति पाई जाती है जिसका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है.

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औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि

  •       शिरो रोग- बड़ी इलायची को पीसकर मस्तिष्क पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिर दर्द का शमन होता है.
  •       मुख रोग- बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर मुंह में छालों पर लगाने से मुखपाक में लाभ होता है.
  •       दांत दर्द- बड़ी इलायची और लौंग तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर दांतों पर मलने से दंत दर्द का शमन होता है.
  •       लार का बहना- यदि अधिक थूक आता हो तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर, 1-2 ग्राम मात्रा में लेकर चूसते रहने से यह कष्ट दूर हो जाता है.
  •       दमा- 5-10 बूंद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है.
  •       हिचकी- एक कप पानी में दो बड़ी इलायची पीसकर उबालें. आधा शेष रहने पर छानकर, ठंडा कर पिलाने से हिचकी में तुरंत         लाभ होता है.
  •       पाचन-शक्ति- 2 ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन-शक्ति बढ़ती है.
  •       10 नग छिलकों सहित बड़ी इलायची को लेकर कुट कर 250 मिली दूध और 250 मिली जल के साथ पकाएं, दूध मात्र शेष रहने पर छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर दिन में चार बार पिलाएं इससे पेशाब की जलन व रुकावट दूर होती है.
  •       पथरी– बड़ी इलायची के बीज चूर्ण में खरबूजों के बीज और मिश्री मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर निकल जाती है.
  •       वात- वेदना- 1-2 बड़ी इलायची के चूर्ण को दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से वात वेदना का शमन होता है.
  •  ज्वर- सभी प्रकार के ज्वर में बड़ी इलायची के बीज 2 भाग तथा बेल छाल के 1 भाग को मिलाकर चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण को दूध और पानी में मिलाकर पकाएं और केवल दूध शेष रहने पर 20 मिली की मात्रा में सुबह, दोपहर तथा सायं सेवन करने से ज्वर में लाभ होता है.

प्रयोज्यांग : बीज, फल तथा बीज-तेल.

मात्रा- 1-3 ग्राम अथवा चिकित्सक के परामर्शानुसार.

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