हर POK विस्थापित को मिलेंगे साढ़े पांच लाख

pokमोदी सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से आए शरणार्थियों को 2000 करोड़ रुपए का पैकेज देगी. यह राशि विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे. केंद्र इस राशि को जम्मू-कश्मीर सरकार के पास भेजेगा. इसके बाद राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए राशि विस्थापित परिवारों तक पहुंचाएगी. कुछ विश्‍लेषकों का मानना है कि पीओके विस्थापितों को दो हजार करोड़ रुपए जारी कर सरकार पाकिस्तान सरकार पर नैतिक दवाब डाल रही है कि वह भी पीओके में रह रहे लोगों की जरूरतों पर ध्यान दे.

अनुमान है कि 36 हजार से अधिक परिवार पीओके से यहां आकर बसे हैं. इसके तहत प्रत्येक परिवार को साढ़े पांच लाख रुपए दिए जाएंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हर परिवार को साढ़े पांच लाख रुपए की सहायता दी जाएगी. यह राशि विस्थापित परिवारों को बसने के लिए दिया जाएगा. ये लोग पश्‍चिमी पाकिस्तान खासकर पीओके से आकर जम्मू, कठुआ और राजौरी जिले में बस गए हैं.

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 अजीब है इनकी संवैधानिक स्थिति

इनमें से कुछ विस्थापित परिवार 1947 के बंटवारे के दौरान भारत में आकर बसे हैं. वहीं कुछ परिवार 1965 और 1971 के युद्ध के बाद से यहां आकर बस गए थे. आश्‍चर्य की बात है कि ये विस्थापित लोग लोकसभा चुनाव में तो वोटिंग कर सकते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सकते हैं. इसका कारण ये है कि जम्मू-कश्मीर के संविधान के मुताबिक ये वहां के नागरिक नहीं हैं.

मांग रहे थे 9200 करोड़ रुपए 

पीओके के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही संस्था जम्मू-कश्मीर शरणार्थी कार्य समिति (जेकेएसएसी) ने अगस्त में सरकार से 9200 करोड़ रुपए मांगे थे. शरणार्थियों की समस्याओं पर विचार करने के बाद मोदी सरकार ने जनवरी 2015 में इनके लिए कुछ रियायतें देने की घोषणा की थी. इसके तहत अर्धसैनिक बलों में विशेष भर्ती, राज्य में समान रोजगार अवसर उपलब्ध कराने और उनके बच्चों का दाखिला केंद्रीय विद्यालयों में किए जाने जैसे कुछ कदम उठाए गए थे.

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