Flipkart और OLA ने कहा, विदेशी निवेश स्वीकार है, विदेशी कंपनियां नहीं

flipkartनोटबंदी के बाद कैश्लेश लेन- देन पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में कई विदेशी कंपनियां भारत के डिजिटल प्लेटफोर्म में शुरुआत करना चाहती हैं या निवेश करना चाहती हैं। देखा जाये तो अभी भी भारतीय कंपनियां ऑनलाइन बिजनस में कुछ खास मुकाम हासिल नहीं कर पाई हैं। देश जाने माने इंटरनेट उद्यमी फ्लिपकार्ट के सचिन बंसल और ओला के भावीश अग्रवाल ने कहा है कि डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए सरकार को भारतीय कंपनियों को बढ़ावा देना चाहिए।
कार्नेगी इंडिया ग्लोबल टेक्नॉलजी समिट में दोनों व्यवसायियों ने कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे भारतीय ई- कॉमर्स कंपनियों को फायदा हो, इससे देश का पैसा देश में रहेगा और देश का विकास होगा। फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर और एग्जिक्युटिव चेयरमैन बंसल ने कहा है कि हमें चीन की स्ट्रेटजी अपनानी चाहिए। हमें विदेशी निवेश का स्वागत तो करना चाहिए, लेकिन हमें विदेशी कंपनियों को अपने देश में तवज्जो नहीं देना  चाहिए। बंसल और अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी इंटरनेट प्लेटफोर्म ऐमजॉन और ऊबर भारत में लगातार अपना विस्तार कर रहे हैं, जरुरी है कि इन कंपनियों को देश में अपना पाँव पसारने से रोका जाये । दरअसल वे जिन सेगमेंट में काम करते हैं, वहां इनोवेशन  के लिए कोई जगह नहीं बल्कि पूंजी ही सबसे बड़ी ताकत है ।
ओला के सीईओ अग्रवाल ने कहा कि ऑनलाइन ई-कॉमर्स और ऐप बेस्ड टैक्सी एग्रीगेटर बिजनस में विदेशी कंपनियां इनोवेशन की बात करती है, लेकिन वास्तव में असल मुकाबला तो पैसे से लड़ा जा रहा है। पैसे के बल पर मार्केट को खराब किया जा रहा है। विदेशी कंपनियों और देशी कंपनियों में बड़ा मुकाबला पैसे के निवेश को लेकर है। फ़िलहाल फ्लिपकार्ट और ओला अमेरिकी कंपनियों अमेजॉन और ऊबर से आगे हैं। दोनों ग्लोबल कंपनियां खुद को मार्केट में सबसे आगे बताती हैं, जबकि दोनों घाटे में चल रही हैं और भारत में अपनी जड़ें ज़माने के लिए काफी निवेश कर रही हैं। ऐमजॉन और ऊबर ने फ्लिपकार्ट और ओला के बाद भारत में बिजनस शुरू किया था, लेकिन उनके मार्केट शेयर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बंसल और अग्रवाल ने कहा कि अगर लोकल कंपनियों का बाजार पर दबदबा होगा तो सिक्यॉरिटी, डेटा और प्राइवेसी सब पर भारतीयों का नियंत्रण होगा। इससे देश भी सुरक्षित रहेगा।
बंसल ने कहा कि सरकार को दूसरों के तय मानकों के आधार पर खुद को आदर्श देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने देश को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनानी चाहिए।

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