आस्था का केंद्र है गोलू देवता का मंदिर

kattu-devtaउत्तराखण्ड की पावन धरती देवभूमि कही जाती है. कई सारे तीर्थ स्थलों और अनेक मंदिरों की वजह से इस राज्य को देवभूमि की संज्ञा दी गई है. इन्हीं मंदिरों में से एक है गोलू देवता का मंदिर. यह मंदिर न्याय दिलाने और इच्छा पूरी करने के लिए एक अटूट आस्था का केंद्र है. गोलू देवता का मंदिर अल्मोड़ा से छह किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ मोटर मार्ग के समीप है. मंदिर के अंदर घोड़े पर सवार, पगड़ी पहने और धनुष धारण किये गोलू देवता की प्रतिमा है.

ऐसा कहा जाता है कि यहां आने वाले लोगों को यह विश्वास होता है कि अगर आप निराश हैं या फिर आपके अन्याय हुआ है तो गोलू देवता की शरण में जाने से लाभ होगा. जिन लोगों की इसमें आस्था है, उनका कहना है कि अदालत का खर्च वहन नहीं कर पाने वाले तथा अन्याय, क्लेश विपदा से घिरे लोग इस मंदिर में अपनी चिट्ठियों से अर्जी लगाते हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार घंटिया चढ़ाते हैं. गोलू देवता को गोयल देवता और कुल देवता के नाम से भी जाना जाता है.

लोग अपनी अटूट आस्था के अनुसार गोलू देवता को घी, दही, हलवापूरी और दूध चढ़ाते हैं.यह मंदिर अल्मोड़ा से 8 किमी दूर है. यह जागेश्वर धाम रोड पर पड़ता है. यह मंदिर काठगोदाम रेलेवे स्टेशन से 94 किलोमीटर दूर है. यहां से बस से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.