हाइवे के शराब विक्रेताओं पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा, 1 अप्रैल से बंद होगी दुकान

highway-liquor-shopसुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में नैशनल हाइवे पर या उसके आसपास पड़ने वाली शराब की दुकानों को बंद करने की बात कही है. गुरुवार को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई वाली बेंच ने यह फैसला दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी राज्यों में नैशनल हाइवे पर या उसके आसपास पड़ने वाली शराब की दुकानों के लिए लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे.

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि नैशनल हाइवे पर स्थित ये दुकान लाइसेंस में दिए गए वक्त तक शराब बेच सकेंगे. उसके बाद उनके लाइसेंस का रिनुअल नहीं होगा. इसके लिए कोर्ट ने 31 मार्च तक की समय सीमा तय की है. इसके बाद हाइवे पर स्थित शराब दुकानों का लाइसेंस रिनुअल नहीं होगा.

कोर्ट ने यह आदेश एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. अराइव सेफ नाम के एनजीओ ने हाइवे पर स्थित दुकानों को बंद कराए जाने को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. एनजीओ का कहना था कि हाइवे पर आसानी से शराब की उपलब्धता नशे में गाड़ी चलाने को बढ़ावा देता है.

एनजीओं के मुताबिक हर साल एक लाख 40 हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. इनमें से अधिकतर हादसों की वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है. इससे पहले 7 दिसंबर को इसी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार व शराब माफियाओं को फटकार लगाई थी.

कोर्ट ने राज्य सरकारों की खिंचाई करते हुए कहा था कि वे शराब का लाइसेंस देकर पैसे बना रही हैं, लेकिन लोगों की जिंदगी और सुरक्षा जैसी जरूरी बातों को दरकिनार कर रही हैं. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के शराब विक्रेताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि जो लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं, वे शराब विक्रेता नहीं हैं.

Read Also: शशिकला के ‘अम्मा’ बनने की राह में दीपा बन रही हैं रोड़ा, बदल सकते हैं TN के सियासी समीकरण !

इस पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि अगर आपको इतनी चिंता है कि लोग शराब पीकर हंगामा करते हैं, तो फिर आप शराब की होम डिलिवरी क्यों नहीं शुरू कर देते?

loading...