साइकिल पर सवार हुई इरोम शर्मिला, संघर्ष को दी नई दिशा

irom sharmila, cycle नई दिल्ली,(विनीत सिंह) : सेना के अत्याचारों के खिलाफ 16 तक भूख हड़ताल करने वाली इरोम शर्मिला ने अब साइकिल को अपना नया हथियार बना लिया है. अब इरोम साइकिल पर सफ़र करके अपने संघर्ष को मुकाम तक पहुचायेंगी. इस सफर पर उन्होंने सीएम के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। आफ्सपा का विरोध करने वाली शर्मिला का कहना है कि जब तक उनका मकसद पूरा नही होता वो अपना संघर्ष जरी रखेंगी.

इरोम 4 नवम्बर, 2000 को भूख हड़ताल पर बैठी थीं और उन्होंने लगातार 16 सालों तक अपनी हड़ताल जारी रखी. कहा जाता है की जब असम राइफल्स के जवानों ने 10 लोगों को मार दिया था तब से इरोम इसका विरोध कर रही हैं. इरोम ने भूख हड़ताल तोडऩे के बाद सीएम बनने की इच्छा जताई थी ताकि वह मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ सकें।

1958 से लागू अफ्सपा कानून के तहत सुरक्षा बलों को गिरफ्तारी या बल प्रयोग के खास अधिकार हासिल हैं और इसी अधिकार का गलत फायदा उठाए जाने के खिलाफ इरोम आजतक विरोध कर रही हैं. साइकिल सफ़र के पहले दिन इरोम ने राज्य के मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है. इरोम सिर्फ मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती हैं.

इरोम ने ‘टेन फार चेंज’ का नारा दिया है जिसका मतलब है कि इस बदलाव की इस लड़ाई में प्रत्येक व्यक्ति दस रुपए का सहयोग दे. और दस वोटरों को पार्टी से जोड़ेगा व पार्टी की नीतियां इन लोगों को बताएगा। उम्मीद है की फरवरी में यहां चुनाव होना है।

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