बर्थ-डे स्पेशल : फ़कीर का गाना सुनकर इंस्पायर हुए थे मोहम्मद रफ़ी

mohammed rafiनई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): मोहम्मद रफ़ी भारतीय सिनेमा में सुरों के बेताज़ बादशाद थे, हैं, और रहेंगे. रफ़ी जी के गाए हुए रोमांटिक गानें आज भी लोगो के होठों पर रहते हैं. चाहे प्यार के लिए इंतेज़ार का हो, देर से आने का हो या प्यार को याद करने का हो प्यार करने वालो के हाथों पर रफ़ी जी के ही गाने ही होते हैं. रफ़ी आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा हैं और रहेंगे.
आज ही के दिन 24 दिसंबर, 1924 को सुरों के दिग्गज  का जन्म अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था. यह एक मध्यवर्गीय परिवार से थे. रफ़ी सात वर्ष की छोटी सी आयु से गाना शुरू किया था. उनको गानें की प्रेरणा एक फ़क़ीर से मिली थी और उस फ़क़ीर से आशीर्वाद भी मिला कि बेटा तुम एक बहुत श्रेष्ठ गायक बनोगे. जो आगे चलकर फलीभूत भी हुआ.
रफ़ी जी 13 साल की आयु में पहली बार आमंत्रित श्रोताओं के सामने अपनी सुरीली राग छेड़ी. उसके बाद रफ़ी के कैरिअर का करवा आगे निकल पड़ा. इसके बाद पंजाबी फिल्म ‘गुल बलोच’ (1944) के लिए अपने सुरों के ताल को उस फिल्म के गाने में भर दिया. कुछ सालों बाद रफ़ी ने मुम्बई जाने का फैसला किया।
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार नौशाद जी के संगीत से सजी फिल्म ‘अनमोल घड़ी’ (1946) के गीत ‘तेरा खिलौना टूटा’ से रफी को पहली बार मुकाम हासिल हुआ. उसके बाद  ‘शहीद’, ‘मेला’, और ‘दुलारी’ के लिए भी रफी के गाए गीत लोगो के द्वारा खूब सहारा गया लेकिन ‘बैजू बावरा’ के गीतों ने रफी को उस टाइम  के फेमस गायकों में लाकर खड़ा कर दिया.
रफी के गाए गानों पर दिलीप कुमार, भारत भूषण, देवानंद, शम्मी कपूर, राजेश खन्ना, धर्मेद्र जैसे टॉप क्लास के सितारों ने अभिनय किया.
रफी छह बार सर्वश्रेष्ठ गायक के रूप में फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं
  • ‘चौदहवीं का चांद’ (1960) के शीर्षक गीत के लिए रफी को पहली बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला    उन्हें 1965 में पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया.
  • 1977 में (फ़िल्म: हम किसी से कम नहीं) क्या हुआ तेरा वादा गाने के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड से पुरस्कृत किया गया है.
  • रफ़ी ने 19 भाषाओं ने गाना गाए हैं और लगभग 5000 से ज्यादा गाना गए हैं.