यहां एक हफ्‌ते में फेल हुई नोटबंदी

venezuela नई दिल्ली, (चौथी दुनिया ब्यूरो): बेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो 11 दिसंबर को नेशनल टीवी पर आते हैं. वे भी हमारे पीएम मोदी की तरह हवा में हाथ नचाते हुए अचानक नोटबंदी की घोषणा करते हैं. जनता स्तब्ध. अब क्या होगा? लोगों को नोट बदलने के लिए 10 दिन का समय दिया गया. अगले दिन से लोग बैंक के बाहर कतार में लगने लगे. लेकिन शायद उनमें भारत के लोगों की तरह बर्दाश्त करने का माद्दा नहीं था. हिंसा और झपटमारी शुरू हो गई.

जनता की परेशानियों और हिंसा व लूटपाट को देखकर सरकार ने तत्काल फैसले को वापस ले लिया. राष्ट्रपति मादुरो ने 11 दिसंबर को फैसला लिया था कि 100 बोलिवर के नोट बंद कर दिए जाएंगे. देश की कुल करेंसी का 77 प्रतिशत हिस्सा 100 बोलिवर के नोट में था. इस फैसले के बाद देश में कैश की भारी कमी हो गई. नई करेंसी नहीं मिलने से लोग सड़कों पर निकल पड़े. प्रदर्शन के दौरान पुलिस से मुठभेड़ में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई.

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 दस दिन का मिला था समय

लोगों को नोट बदलने के लिए 10 दिन का समय दिया गया था. कैश की कमी होने से लोगों को खाने-पीने की भी समस्या होने लगी. साथ ही लोग क्रिसमस गिफ्‌ट भी नहीं खरीद पा रहे थे. इसे देखते हुए सरकार ने नोटबंदी के फैसले को जनवरी तक के लिए टालने का निर्णय लिया है.

माफिया पर नकेल के लिए नोटबंदी

मादुरो ने माफिया पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी का फैसला किया था. उन्होंने कहा था, माफिया ने 100 बोलिवर के अरबों नोट छिपा कर रखे हैं. ये नोट कोलंबिया और ब्राजील के शहरों में भी हैं. अब अपनी असफलता को छिपाने के लिए प्रेसिडेंट नोटबंदी के विफल होने का कारण विदेशी ताकतों को बता रहे हैं.

गौरतलब है कि क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों के कारण बेनेजुएला की आर्थिक व्यवस्था लड़खड़ा गई थी. 100 बोलिवर का मूल्य घटकर करीब 675 रुपए रह गया था. बेेनेजुएला सरकार ने 100 बोलिवर के पुराने नोट की जगह 500, 2000 और 20,000 बोलिवर की नई करेंसी जारी की थी.