अब भारत के पास भी हैं उम्दा तेज गेंदबाज

cricketविश्व क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजों की धमक हमेशा से देखी गई है. हाल के दिनों में भी भारतीय बल्लेबाजी अव्वल मानी जाती है. मौजूदा समय में हमारे पास कई ऐसे बल्लेबाज हैं, जो अपने पराक्रम की बदौलत पूरे क्रिकेट जगत में राज कर रहे हैं. विराट कोहली की बात की जाए तो वे इस समय विश्व क्रिकेट के सबसे चमकदार बल्लेबाज हैं. उनकी बल्लेबाजी की कायल पूरी दुनिया है.

सचिन युग के बाद भारत को विराट के रूप में एक शक्तिशाली बल्लेबाज मिला, जो रिकार्डों की झड़ी लगा रहा है. सचिन से पहले सुनील गावस्कर का नाम चर्चा में रहता था. खैर बल्लेबाजों के अलावा गेंदबाजी में भी अब टीम इंडिया मजबूत दिख रही है. मौजूदा समय में भारतीय टीम के पास आला दर्जे के स्पिन गेंदबाज हैं, जो अपनी फिरकी की बदौलत दुनिया के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं.

आलम यह है कि रविचंद्रन अश्विन जैसे खतरनाक स्पिनर के आगे दुनिया के कई बल्लेबाज, चारो खाने चित हो रहे हैं. एक समय था, जब टीम इंडिया में स्पिनरों का बोलबाला देखा जाता था. 90 के दशक में कुम्बले, राजू और चौहान की तिकड़ी ने भारतीय पिचों पर करिश्माई गेंदबाजी से दिल जीत लिया था. इसके बाद हरभजन सिंह ने भी अपनी घूमती हुई गेंदों के लिए खूब वाहवाही बटोरी.

हालांकि हरभजन सिंह इस समय टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए जूझ रहे हैं. खराब फिटनेस और फॉर्म के चलते भज्जी को टीम इंडिया से बेदखल कर दिया गया है. स्पिनरों को छोड़ दिया जाए तो अरसे बाद टीम इंडिया में तेज गेंदबाजों का भी जलवा देखने को मिल रहा है. भारत के पास स्विंग के साथ-साथ स्पीड के मामले में भी अब गेंदबाजी आगे दिख रही है.

मोहम्मद शमी व उमेश यादव की गेंदों में गजब की तेजी देखी जा सकती है. इतिहास गवाह है कि भारतीय क्रिकेट में हमेशा तेज गेंदबाजों का टोटा देखा जाता था, लेकिन लगता है कि यह बात अब पुरानी हो चुकी है. टीम इंडिया के पास अब तेज गेंदबाजों की लम्बी कतार देखी जा सकती है. एशियाई देशों में पाकिस्तान जैसी टीम के पास हमेशा तेज गेंदबाजों का जखीरा रहा है.

इमरान से लेकर शोएब अख्तर तक ने अपनी गेंदबाजी के लिए खूब वाहवाही बटोरी है. किसी जमाने में वकार, वसीम और आकिब जावेद जैसे तेज गेंदबाज विश्व क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं. लेकिन अब भारतीय टीम भी तेज गेंदबाजों के मामले में धनी होती दिख रही है. कपिल देव ने भारतीय गेंदबाजी, खासकर तेज गेंदबाजी का परचम बुलंद किया था.

कपिल देव के पास भले ही उतनी गति नहीं थी, लेकिन उनकी सटीक लाइन लेंथ क्रिकेट जगत के कई बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द साबित हुई थी. कपिल देव को विश्व क्रिकेट में शानदार ऑलराउंडर के रूप में देखा गया है. उनकी शानदार कप्तानी में टीम इंडिया ने 1983 का विश्व कप अपने नाम किया. कपिल ने 131 टेस्ट में 434 विकेट हासिल कर क्रिकेट जगत में खूब नाम कमाया.

कपिल के दौर में मनोज प्रभाकर जैसे गेंदबाज प्रतिभा होने के बावजूद कमाल नहीं कर सके. इसके बाद जवागल श्रीनाथ ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से सबको खूब चौंकाया. कपिल के संन्यास के बाद श्रीनाथ ने अपने मजबूत कंधों के बूते टीम इंडिया की गेंदबाजी को एक अलग आयाम दिया. श्रीनाथ की गेंदों में अच्छी खासी रफ्तार थी.

90 के अंतिम दशक में श्रीनाथ ने पूरे क्रिकेट जगत में अपनी गेंदबाजी से दुनिया के कई बल्लेबाजों को ढेर किया. श्रीनाथ ने कई मौकों पर 150 किलोमीटर की रफ्तार से गेंदें डाली थी. उन्होंने करियर के अंतिम दौर में नेहरा और जहीर खान को भी आगे बढ़ाया. तीनों गेंदबाजों ने साल 2003 के विश्व कप में दादा की कप्तानी में अलग छाप छोड़ी.

इसमें नेहरा अभी तक अपनी गेंदबाजी का जलवा दिखा रहे हैं, जबकि जहीर खान अब क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं. जहीर और नेहरा के साथ-साथ इसी दौर में इरफान पठान ने भी विश्व क्रिकेट पर दस्तक देना शुरू किया था. इरफान पठान की गेंदबाजी की सबसे खास बात है, स्विंग.

एक वक्त ऐसा लग रहा था कि वसीम अकरम के बाद कोई गेंदबाज आया है, जो स्विंग के सहारे मजबूत बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस करने का हुनर रखता है. लेकिन बाद में इरफान पठान अपनी लय कायम नहीं रख सके और उन्हें टीम इंडिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

इसके बाद इरफान पठान ने कड़ी मेहनत कर टीम इंडिया में वापसी का दावा पेश किया, लेकिन अभी तक उन्हें टीम में आने का मौका नहीं मिला है. माना जाता है कि उस जमाने में कोच रहे चैपल ने इरफान पठान की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया था. इसके बाद ही इरफान पठान का करियर गर्त की ओर बढ़ने लगा. खैर यह बात तो अब अतीत का रूप ले चुकी है.

वर्तमान में टीम इंडिया के पास स्विंग के साथ-साथ तेज गेंदबाजों का अच्छा विकल्प देखा जा सकता है. टीम में तेज गेंदबाजों की बात की जाए, तो इसमें अब कई नाम शामिल हैं. उनमें इशान शर्मा, उमेश यादव व मोहम्मद शमी जैसे धाकड़ गेंदबाज अपनी तूफानी गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं.

वरुण अरोन की गेंदों में भी अलग तरह की पेस देखी जा सकती है. इतना ही नहीं स्विंग के मामले में भुवी का भी कोई जवाब नहीं है. भारतीय क्रिकेट टीम अगर टेस्ट में अभी जलवा दिखा रही है, तो इसमें मोहम्मद शमी का भी खास योगदान देखा जा सकता है.

मोहम्मद शमी के पास रफ्तार के साथ-साथ खतरनाक बाउंसर भी है, जिसने दुनिया के बल्लेबाजों को डराया है. उनकी गेंदों में इतनी तेजी है कि स्टम्प तक टूट जाता है. शमी की गेंदबाजी में खास बात यह है कि स्पीड के साथ वे अच्छी स्विंग की बदौलत भी अपना हुनर रखते हैं. शमी ने बेहद कम आयु में ही क्रिकेट की एबीसीडी सीखनी शुरू कर दी थी.

मुरदाबाद में कोच बहरुद्दीन ने उनकी प्रतिभा को निखारना शुरू किया था. शमी की मेहनत को तब और बल मिला जब 2010 में 20 साल की आयु में ही उन्हें रणजी मैच खेलने का मौका मिला. इसके बाद शमी ने घरेलू स्तर पर अपनी गेंदबाजी की छाप छोड़ी और जल्दी ही भारतीय टीम में शामिल हो गए.

शमी के अलावा भी अन्य तेज गेंदबाज हैं, जिनमें जसप्रीत भुमरा जैसे तेज गेंदबाज शामिल हैं. भुमरा की गेंदों में अच्छी पेस देखी जा सकती है. कुल मिलाकर भारतीय टीम के पास अब अच्छी पेस वाले खिलाड़ियों की लम्बी लिस्ट तैयार हो गई है. विदेशी बल्लेबाज भी टीम इंडिया की तेज गेंदबाजी डरने लगे हैं जो भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत है.प