सिंबल मायने नहीं रखता, 90% विधायक मेरे साथ

सपा में जारी अंतर्कलह के बीच मंगलवार को अखिलेश यादव चुनाव आयोग पहुंचे. खबर है कि अखिलेश को अगर साइकल चुनाव सिंबल नहीं मिलता है, तो वे मोटरसाइकल चुनाव सिंबल पर राजी हो सकते हैं. अखिलेश के साथ रामगोपाल, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा भी हैं. अखिलेश खेमा आयोग के सामने यह साबित करने की कोशिश करेगा कि असली समाजवादी पार्टी की अगुआई वे ही कर रहे हैं. इस दौरान अखिलेश और मुलायम सिंह के बीच फोन पर बातचीत हुई. मुलायम ने कहा कि अब सभी बातचीत   लखनऊ पहुंचकर ही की जाएगी.

अखिलेश खुद अपने में सिंबल

अखिलेश को 90 प्रतिशत विधायकों का समर्थन हासिल है. गौरतलब है कि अखिलेश के घर हुई मीटिंग में 207 विधायक शामिल हुए थे. अखिलेश खेमे के लोगों का कहना है कि हमारे साथ 90 प्रतिशत विधायक हैं, इसलिए चुनाव चिह्न हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता है. अखिलेश खेमे के एमएलसी राजपाल कश्यप ने कहा कि हम साइकल सिंबल अपने पास रखेंगे. लेकिन बड़ी बात ये है कि अखिलेश खुद अपने आप में सिंबल हैं. चुनाव में जिसके पास लोगों का सपोर्ट होता है, वही मायने रखता है. किरणमय नंदा ने भी कहा कि हमारे पास सबकुछ है. हम नेताजी से अलग नहीं, बल्कि उनके साथ हैं.

6 माह का लग सकता है समय

उम्मीद है कि चुनाव आयोग की सुनवाई में 6 माह का समय लग सकता है. ऐसे में चुनाव के दौरान आयोग समाजवादी पार्टी के दोनों धड़ों को अलग चुनाव चिह्न दे सकता है. इस दौरान पार्टी के सिंबल को फ्रीज किया जा सकता है. एक विकल्प ये भी है कि चुनाव आयोग दोनों खेमों से अलग-अलग नाम व नए चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए कह सकता है. अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तब चुनाव आयोग भी नए चुनाव चिह्न का सुझाव दे सकता है. हो सकता है कि सपा का एक धड़ा समाजवादी पार्टी (मुलायम) और दूसरा समाजवादी पार्टी (अखिलेश) के नाम से चुनाव मैदान में उतरे.

वहीं वरिष्ठ नेता आजम खान को अब भी उम्मीद है कि मसला हल हो सकता है. उन्होंने कहा कि जो भी हो रहा है, वो चिंता की बात है. लेकिन अभी भी वक्त है. चुनाव सिंबल का मामला तब उछला था, जब अखिलेश और मुलायम ने यूपी चुनाव के मद्देनजर विधानसभा कैंडिडेट्स की अलग-अलग लिस्ट जारी की थी. अब दोनों ही खेमे पार्टी के सिंबल से चुनाव लड़ना चाहते हैं.