बेंगलूरू छेड़-छाड़ मामला: महज़ क़ानून बनाना काफी नहीं है

Bangluru molestationबेंगलूरू में नए साल का जश्न मना रही लड़कियों के साथ सामुहिक बदसलूकी और छेड़छाड़ के बाद एक और सीसीटीवी फूटेज सामने आया है जिसमेँ दो स्कूटर सवार एक महिला को छेड रहे हैँ. खबरोँ के मुताबिक़ महिला को उसके घर के पास ही दो स्कूटर सवारोँ ने हमला किया और छाड़ की गई.

गौर तलब है कि बेंगलूरू मेँ पहली जनवरी की पार्टी में महिलाओँ के साथ बदसलूकी की गई थी. उस घटना की कई वीडियो और तस्वीरें भी मीडिया में सामने आई हैं. पीड़ित लड़कियों का कहना है कि वहां पर किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी भीड़ ने उन पर हमला किया और बदसलूकी की.

ज़ाहिर है महिलाओं के साथ होने वाली इस तरह की घटनाएँ एक खास तरह की मानसिकता से प्रेरित होती हैं. और यह मानसिकता न सिर्फ घटना को अंजाम देने वालों में होती है बल्कि देश और समाज में सम्मानित पदों पर विराजमान लोग भी होते हैं जिनके कथन ऐसे असामाजिक तत्वों की हौसलाअफजाई करते हैं.

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पहली जनवरी की घटना को लेकर कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा है कि इस तरह की चीज़ें तो होती रहती हैं. उन्हीं से मिलता जुलता बयान पुलिस की तरफ से भी आया. पुलिस ने कहा कि ऐसी घटनाएं आम हैं और अब तक कोई महिला औपचारिक शिकायत के लिए सामने नहीं आई है.

ज़ाहिर है परमेश्वरा के बयान पर विपक्षी पार्टियों ने तीखी आलोचना की है. सोशल मीडिया पर भी परमेश्वरा पर लोग अपना ग़ुस्से निकाल रहे हैं. दिल्ली में निर्भय काण्ड के बाद केंद्र सरकार ने महिलाओं के साथ होने वाले ऐसे अपराधों के लिए सख्त कानून पास किया था. लेकिन जब तक ऐसी कृत्य करने वालों को त्वरित सजा नहीं मिलेगी तब तक महज़ कानून बना देने से ऐसी घटनाओं को नहीं रोका जा सकता है.