बजट : स्वास्थ्य सेवाओं को सेवाकर में छूट मिले

Budget, health service, service tax स्वास्थ सेवायें  महंगी  होने  के कारण इसका लाभ सभी को नहीं मिल पाता, ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार  बजट में हेल्थ सेक्टर को लेकर कुछ खास कदम उठाए.

इंडस हेल्थ प्लस के संयुक्त प्रबंध निदेशक अमोल नाइकवाड़ी कहते हैं कि जिस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं को अभी सेवाकर में छूट मिल रही है वो बजट में भी लागू रहना चाहिए. बजट में संभावित करों की दरें 18 प्रतिशत के आस पास रहने की उम्म्मीद है, ऐसे में आम आदमी के ऊपर महँगी स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ पड़ सकता है. ऐसे में या तो स्वास्थ्य निवारक सेवाओं पर कोई कर न लगाया जाए अथवा वर्तमान न्यूनतम छूट की दरें लागू रहनी चाहिए.

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साथ ही कर  में छूट की दरें 20,000.00 तक बढ़ाई जायें ताकि लोग स्वास्थ्य जांच सेवाओं का लाभ उठा सकें और डायबिटीज, दिल की और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में छूट से लाभान्वित हो सकें.  कर दाता को स्वास्थ्य संबंधी करों में मात्र 5000.00 रुपये की छूट पूरे एक परिवार को देखते हुये नगण्य है. कर दाता के परिवार में  सदस्यों की संख्या चार माने तो यह छूट प्रति व्यक्ति मात्र रूपये 1000ही ठहरती है.

       इसके अतिरिक्त हेल्थ केयर इंडस्ट्री की एक बहुत पुरानी मांग ये है कि स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जाये और सरकार को आगामी बजट में इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
कॉर्पोरेट्स को भी इन सेवाओं के लिए करों में विशेष छूट दी जानी चाहिए ताकि वो भी अपने कर्मचारियों की बेहतरी और अच्छे स्वास्थ्य के लिये निवेश कर सकें.

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