कप्तानी से माही का किनारा ..पर धोनी की धुन बरकरार

ms dhoniभारतीय टीम के बेहद सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आखिरकार वनडे और टी-20 की कप्तानी से भी किनारा कर लिया है. बीते कुछ महीनों में भारतीय क्रिकेट में कई बदलाव देखने को मिले हैं. दरअसल भारतीय क्रिकेट बोर्ड में लो़ढा कमेटी को लेकर उठापटक का दौर देखा जा सकता है.

लो़ढा कमेटी के लागू होने के बाद बीसीसीआई के कुनबे में आग लग गई. इस कमेटी के आते ही बोर्ड के कई बड़े अधिकारियों की कुर्सी चली गई है. इतना ही नहीं अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई से अलग-थलग कर दिया गया है. ऐसे में महेंद्र सिंह धोनी के अचानक कप्तानी छोड़ने को लेकर कई कयास लगाये जा रहे हैं.

जानकारों की माने तो बीसीसीआई में आये सत्ता परिवर्तन ने माही को कप्तानी से अलग करने में अहम भूमिका निभायी है. बीसीसीआई में अब पूरी तरह से बदलाव कर दिया गया है. लो़ढा कमेटी में कई ऐसे नियम हैं, जो शायद भारतीय क्रिकेट की पूरी तस्वीर को बदल सकते हैं. इतना ही नहीं, सालों से बीसीसीआई को अपना घर बनाकर बैठे कई धाकड़ पदाधिकारी जो राज्य खेल संघों में मलाई काटते, उनकी भी लो़ढा कमेटी के आने के बाद छुटटी हो गई.

दूसरी ओर भारतीय क्रिकेट टीम विराट की कप्तानी में लगातार नया इतिहास बनाने में जुटी हुई है. विराट टेस्ट कप्तानी में लगातार अपना जलवा दिखा रहे हैं. माही टेस्ट क्रिकेट को पहले ही छोड़ चुके हैं. ऐसे में विराट के दमदार प्रदर्शन के आगे उनका रंग का फीका पड़ता दिख रहा है. उनपर लगातार वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ने का दबाव बढ़ रहा था. इतना ही नहीं, हाल ही में वह मुख्य चयनकर्त्ता एमएसके प्रसाद से मुलाकात कर चुके थे.

हालांकि कप्तानी छोड़ने के बाद भी माही विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर टीम इंडिया में बने रहेंगे. कई स्वर्ण जीत के गवाह रहे माही ने हमेशा भारतीय क्रिकेट को बुलन्दियों पर पहुंचाया. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने पहली बार टेस्ट क्रिकेट में नम्बर वन टीम का तमगा हासिल किया. भारत ने उनकी कप्तानी में ही 2011 में विश्व कप जीतकर क्रिकेट जगत में भारत का डंका बजाया. माही के कप्तानी छोड़ने को लेकर कई विवाद सामने आ रहे हैं. क्रिकेट के जानकारों की माने तो शायद माही को पता चल चुका है कि बतौर कप्तान उनके दिन लद चुके हैं.

उसपर से लो़ढा कमेटी का आना शायद माही के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि माही अब बतौर विकेटकीपर  2019 का विश्व कप खेलना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि वह बतौर कप्तान अब अपने करियर को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं. ऐसे में विराट को कप्तानी सौंप कर वह अपने खेल को फिर से पुरानी धार देने में सफल रहेंगे. कप्तानी के दबाव से अलग होकर वह अपने करिश्मायी बल्लेबाजी का नमूना एक बार फिर पेश कर सकते हैं.

जब भी टीम इंडिया के स्वर्णिम युग की बात की जायेगी, तो धोनी का नाम सबसे पहले लिया जायेगा. टीम इंडिया को धोनी का करिश्मा पहली बार 2007 में देखने को मिला. उस दौर में भारतीय टीम सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ जैसे बड़े खिलाड़ियों के बल पर विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना रही थी. हालांकि इन तीनों अनुभवी खिलाड़ियों ने टी-20 में खेलने से मना कर दिया था.

टी-20 विश्व कप के लिए टीम इंडिया को कप्तान की तलाश थी. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने माही की काबिलियत को पहचाने हुए उन्हें टी-20 विश्व कप की कप्तानी सौंपने में देर नहीं की. उस समय की खबरों की माने तो कैफ जैसे खिलाड़ी को भी कप्तानी देने की बात की जा रही थी, लेकिन बाद में यह अफवाह साबित हुई. माही की टीम एकदम युवा जोशों के साथ लबरेज दिख रही थी.

टीम के कई खिलाड़ी अपनी बल्लेबाजी हुनर की बदौलत देश का मान बढ़ाने का दावा भी पेश कर रहे थे. युवा टीम के सहारे नया इतिहास गढ़ने की कला तो केवल माही से सीखी जा सकती है. उन्होंने इस टी-20 में शानदार कप्तानी कर भारत को टी-20 विश्व कप का खिताब दिलाया. धोनी ने इस विश्व कप में मैच के दौरान कई चौंकाने वाले फैसले लिये, लेकिन उनका हर दाव सटीक बैठा और टीम इंडिया ने इतिहास बनाया. यहीं से लगने लगा कि माही भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल सकते हैं.

उन्होंने इसके बाद वनडे और टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की बागडोर अपने हाथों में ले ली. भारतीय टीम में फैब फोर के रूप में जाने जाने वाले द्रविड़, सचिन, गांगुली और लक्ष्मण जैसे क्रिकेटरों ने माही को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि यह भी सत्य है कि इन्हीं की बदौलत माही ने खूब सुर्खियां बटोरी. इसके बाद धोनी अपने हिसाब से टीम इंडिया को बनाने में जुट गये. टीम बनाने के चक्कर में कई बड़े खिलाड़ियों से टकराव भी सामने आया. वीरू से उनके संबंध को लेकर हमेशा मीडिया में कई बातें सामने आयीं. सहवाग का करियर खराब फॉर्म की भेंट चढ़ गया. इस दौरान दोनों के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिली.

इतना ही नहीं, हरभजन सिंह और युवराज सिंह का करियर भी माही की कप्तानी में उतना सफल होता नहीं दिखा. दोनों ही खिलाड़ी अपनी खराब फिटनेस और फॉर्म के चलते टीम इंडिया से बाहर होते रहे. दूसरी ओर रैना को माही की कप्तानी में खूब मौका मिला. एक समय रैना का बल्ला लम्बे अरसे से खामोश था, लेकिन कप्तान धोनी ने उन्हें खूब मौके दिये.

इसको लेकर माही की पहले खूब किरकिरी हुई, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की. धोनी की कप्तानी में सचिन ने लगातार कई रिकॉर्ड बनाये. यहां से टीम इंडिया जीत की पटरी पर दौड़ती नजर आयी. कई बड़े टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन बेहतर रहा. 2011 विश्व कप में टीम इंडिया ने सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट का प्रदर्शन करते हुए कप अपने नाम किया.

यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि 1983 के बाद पहली बार भारतीय टीम विश्व क्रिकेट का सरताज बनी. सचिन ने अपने करियर में तमाम उपलब्धियां हासिल की थी, लेकिन विश्व कप जीतना उनके क्रिकेट करियर के लिये बेहद खास था. बाद में दिग्गज खिलाड़ियों के सन्यास का सिलसिला भी शुरू हो गया. एकाएका टीम बदली हुई नजर आने लगी. इस टीम में माही एक अलग किरदार के रूप में सामने आये.

टीम के हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका से अवगत कराने में माही ने कोई कसर नहीं छोड़ी. 2011 का विश्व कप जीतने के बाद धोनी की ब्रांड वैल्यू बढ़ गई. छोटे शहर के बेहद सााधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले धोनी का क्रिकेट की दुनिया में कामयाबी का यह सफर एक चमत्कार से कम नहीं है. एक लीडर के तौर पर उन्होंने भारत को कई सीरीज तोहफे में दिये. धोनी के नेतृत्व में ही भारतीय टीम ने 2008 में कंगारूओं को सीबी सीरीज में परास्त किया था. यह जीत इसलिए अहम थी, क्योंकि इस टीम में दादा और द्रविड़ को मौका नहीं दिया गया था.

धोनी लगातार आगे बढ़ रहे थे, लेकिन टीम के दो भागों में बटने की खबर से पूरे क्रिकेट जगत में भूचाल सा आ गया. दरअसल माही टीम बनाने के चक्कर में कई अनुभवी खिलाड़ियों को साथ रखना नहीं चाहते थे. जानकारों की माने तो माही सचिन, गम्भीर, सहवाग व दादा जैसे उम्रदराज खिलाड़ियों को टीम में रखना नहीं चाहते थे.

वह अक्सर खराब फिटनेस के लिए इन खिलाड़ियों पर निशाना साधते हुए दिखे. धोनी भारत के अकेले ऐसे कप्तान हैंै, जिनकी अगुवायी में भारत ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों में चैम्पियन का ताज पहना है. माही ने 199 मैचों में टीम की बागडोर संभाली और 110 में जीत का परचम लहराया, जबकि टेस्ट क्रिकेट को वह पहले ही अलविदा कह चुके हैं. उन्होंने 60 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया की कप्तानी करते हुए 27 जीत दिलायी.

उनके कप्तानी छोड़ने के बाद पूरी दुनिया में उनके द्वारा बनाये गये रिकॉर्ड की चर्चा हो रही है. पूर्व खिलाड़ी उनकी शान में कसीदा गढ़ते दिख रहे हैं. धोनी के बाद उनकी जगह लेने वाले विराट कोहली ने भी माही की जमकर तारीफ की और यहां तक कह डाला कि धोनी ने ही उन्हें टीम से बाहर होने से बचाया.

विराट के अनुसार, करियर के शुरुआती दौर में उनकी बल्लेबाजी बेहद खराब थी लेकिन माही के सपोर्ट से उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया. धोनी ने अब भारतीय क्रिकेट की कप्तानी छोड़ दी है और अब बेफिक्र होकर खेलना चाहते हैं. माही की निगाह 2019 में होने विश्व कप पर है.

उनकी फिटनेस को देख कर लग रहा है कि वह अगला विश्व कप खेल सकते हैं, लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि आने वाले महीनों में उनका बल्ला कितना दहाड़ता है. इसमें कोई शक नहीं कि उनके पास काबिलियत है. उनके शॉट में अब भले ही पुरानी बात न हो, लेकिन अब भी वह भारतीय क्रिकेट में लम्बा योगदान दे सकते हैं. अब देखना रोचक होगा कि इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हो रही वनडे सीरीज में वह कैसा प्रदर्शन करते हैं.

हार कर भी जीत गए धोनी

भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी को अपने आखिरी कप्तानी मैच में हार तो मिली लेकिन वे अपने प्रशंसकों का दिल जीतने में कामयाब रहे. धोनी के प्रशंसकों ने उनका जितना सम्मान मैदान के अंदर किया, उससे ज्यादा मैदान से बाहर और सोशल मीडिया पर किया गया.

धोनी ने क्रिकेट के लिए जो किया, उसका रिकॉर्ड छू पाना मुश्किल है. धोनी ने अपने 11 साल के करियर में रिकॉर्डों की ऐसी झड़ी लगाई कि उन्हें तोड़ पाना किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए बहुत मुश्किल है. धोनी भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर भी हैं. आंकड़े भी ऐसा ही बोलते हैं. विकेटकीपर धोनी पहले भारतीय हैं, जिनके नाम 350 विकेट (261 कैच और 89 स्टंपिंग्स) हैं. उनसे आगे सिर्फ कुमार संगकारा (482), एडम गिलक्रिस्ट (472) और मार्क बाउचर (424) हैं. कोई दूसरा भारतीय धोनी के आस-पास भी नहीं है.

धोनी सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय विकेटकीपर हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में अब तक कुल 14,706 (तीनों फॉर्मेट जोड़कर) रन बनाए हैं. धोनी ने अपने करियर की शुरुआत में ही श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की पारी खेली थी. वनडे में किसी भी विकेटकीपर-बल्लेबाज द्वारा खेली गई यह सबसे बड़ी पारी है. दूसरे नंबर पर एडम गिलक्रिस्ट की 172 रनों की पारी है. धोनी सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी भी हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक कुल 302 छक्के लगाकर धोनी इस सूची में अन्य भारतीय बल्लेबाजों से कोसों आगे हैं. वर्तमान का कोई भी बल्लेबाज उनके आस-पास भी नहीं है.

धोनी सबसे सफल भारतीय कप्तान के रूप में तो स्थापित हो ही चुके हैं. धोनी की कप्तानी में भारत ने 107 वनडे और 27 टेस्ट मैच जीते हैं. दूसरे नंबर पर सौरव गांगुली हैं, जिनकी कप्तानी में 76 वनडे मैच और 21 टेस्ट मैच भारतीय टीम ने जीते. इसके अलावा महेंद्र सिंह धोनी आईसीसी के सभी टूर्नामेंट जीतने वाले इकलौते कप्तान हैं. भारत ने धोनी की कप्तानी में 50-50 ओवरों का वर्ल्ड कप, टी-20 वर्ल्ड कप और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती. ऐसा कारनामा करने वाले धोनी विश्व के इकलौते कप्तान हैं.

युवराज की वापसी पर उठे सवाल बेमानी

भारतीय टीम से लम्बे अरसे से बाहर चल रहे युवराज सिंह एक बार फिर भारतीय टीम में वापसी करने में सफल रहे हैं, लेकिन उनकी वापसी को लेकर कई सवाल उठाया जा रहा है. दरअसल माही के कप्तानी छोड़ने के बाद उनकी टीम में एकाएक जगह बन गई, तो इस पर सवाल उठने शुरू हो गए. जबकि युवी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. युवराज ने रणजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ मुकाबलों में 724 रन बनाकर अपने बल्ले की ताकत दिखाई. उन्होंने इस सीजन में 260 रन की जबरदस्त पारी खेल कर अपनी वापसी का दावा ठोका था.

loading...