डेटा रिकवरी के सुरक्षित और आसान विकल्प

भले ही आप कितनी भी सावधानी बरतें, आपका कंप्यूटर कभी न कभी, किसी न किसी कारण से क्रैश हो ही जाता है. ऐसी स्थिति में यदि आपके डेटा का बैकअप न हो तो कई बार यह आपके लिए मुश्किल का सबब बन जाता है. आइए जानते हैं अपने कंप्यूटर डेटा को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए. इस समस्या से बचने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Data recoveryनई दिल्ली, (श्याम सुन्दर प्रसाद ): कंप्यूटर का काम करते-करते किसी आंतरिक गड़बड़ी की वजह से करप्ट हो जाना कोई नई और आश्‍चर्जनक बात नहीं है. लेकिन ऐसा होने से कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम वाली ड्राइव या डेक्सटॉप में रखी आपकी जरुरी फाइलों के डिलीट हो जाने से आपके लिए परेशानी खड़ी हो जाती है. कई बार तो हमें इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. हार्डडिस्क या हार्ड ड्राइव को कंप्यूटर का दिमाग कहा जाता है. जिसमें कंप्यूटर की सारी जानकारियां एकत्रहोती है,यदि कंप्यूटर में हार्डडिस्क न हो तो वह काम नहीं कर सकता है. सामान्य परिस्थितियों में  हमें कंप्यूटर का बैकअप लेते रहना चाहिए, यदि हम ऐसा करते हैं तो हम अपने सिस्टम के  डेटा को पिछले बैकअप को बिना किसी परेशानी के वापस प्राप्त कर सकते हैं. इसे तकनीकि भाषा में सिस्टम को री-स्टोर करना कहते हैं.

किन बातों का रखें ख्याल?

कभी-कभी आप कोई आवश्यक डेटा डेस्कटॉप या माई डाक्यूमेंट में रख देते हैं. ऐसा न करना सबसे बेहतर होता है. बतौर सावधानी आप अपना डेटा डेक्सटॉप या हार्डडिस्क के उस ड्राइव में न सेव करें, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम इन्सटॉल किया गया हो. यदि सिस्टम के ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी तरह की त्रुटि (इरर)आती है और आपका सिस्टम बूट नहीं कर पाता हो तो आपको उस ड्राइव को फॉर्मेट करना पड़ता है, ऐसे में उसमें रखी गईं सारी फाइलों या डेटा को वापस पाना सामान्य तौर पर मुश्किल हो जाता है. यदि डेटा आपने किसी दूसरी ड्राइव में सेव किया गया है तो ड्राइव को री-फॉर्मेट करने के बाद भी डेटा सुरक्षित रहेगा. आम तौर पर लोग डेस्कटॉप पर वही फाइल या फोल्डर रखते हैं जिन्हें आप बार-बार प्रयोग में लाते हैं. ऐसी स्थिति में उस फाइल या फोल्डर को दूसरी ड्राइव में सेव करें और उसका शॉर्टकट आप डेस्कटॉप पर रख सकते हैं ऐसा करने से डेटा लॉस की संभावनायें न्यूनतम हो जाती हैं.

समय-समय पर अपने जरुरी फाइल्स और फोल्डर्स का बैकअप किसी सीडी, डीवीडी, एक्सटर्नल हार्डडिस्क, पेनड्राइव में लेते रहें. ये कुछ सामान्य जानकारियां हैं जिन्हें ध्यान में रखकर आप कई बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं.

डेटा-रिकवरी से पहले क्या न करें.

डेटा का नुकसान कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि कम्प्यूटर हार्डडिस्क काम करना बंद कर दे, डेटा करप्ट हो जाए, फाइल फॉर्मेट में बदलाव हो जाए या गलती से कोई फाइल डिलीट हो जाए. यदि इनमें से किसी वजह से आपके कंप्यूटर का डाटा लॉस हो गया है तो आप कोई जल्दीबाजी ना करें. समझदारी और संयम से काम लें, आपका डेटा वापस आ सकता है. इसके लिए आप अपने सिस्टम में इनस्टॉल रिकवरी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं जो विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम में पहले से इनबिल्ट(उपलब्ध) होता है, इसका प्रयोग करके आप अपना डेटा वापस पा सकते हैं, इसके अलावा आप अन्य सॉफ्टवेयर या कहें थर्ड पार्टी डेटा रिकवरी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं. रिकवरी सॉफ्टवेयर का उपयोग करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें.

  • जब तक आप डेटा रिकवरी न कर लें तब तक अपने कम्प्यूटर का प्रयोग कम से कम करें.
  • जिस हार्ड डिस्क से डेटा रिकवरी करनी है उसमें कोई भी नया डेटा कापी न करें.
  • अगर बहुत ज्यादा जरुरी न हो तो रिकवरी तक उस सिस्टम पर इंटरनेट का इस्तेमाल न करें. क्योंकि ब्राउज़िंग या डाउनलोड होने वाला डेटा हार्ड डिस्क पर ही सेव होता है.
  • ऐसे बड़े प्रोग्राम भी नहीं चलाने चाहिए जो प्राइमरी मेमोरी के अलावा हार्ड डिस्क स्पेस लेते हों.
  • डेटा रिकवरी शुरु करने से पहले हार्ड डिस्क में जगह बना लें. ऐसा करने से पुरानी सुरक्षित फाइलें रिकवरी के समय ओवर राइट नहीं होंगी.
  • जिनकी ज़रूरत नहीं है उन फ़ाइलों को डिलीट कर दीजिए या उन्हें दूसरी हार्ड डिस्क में सेव कर दीजिए.
  • री-सायकल बिन को खाली कर दीजिए, और अपने इंटरनेट ब्राउज़र का कैश (Cache)को डिलीट कर दीजिए.
  • यदि आप थर्ड पार्टी डेटा रिकवरी सॉफ़्टवेयर को डेटा के नुकसान होने के बाद इंस्टाल करते हैं, तो डेटा के ओवर राइट होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं. यदि आप सौभाग्यशाली हैं और आपका डेटा सुरक्षित है तो आपको डेटा के किसी नुकसान से पहले ही अपने कम्प्यूटर पर डेटा रिकवरी प्रोग्राम इंस्टाल कर लेना चाहिए. एक डेटा रिकवरी प्रोग्राम को आपके डेटा का अच्छा इंशोरेंस माना जाता है. इसलिए जिस हार्ड डिस्क पर डेटा लॉस हुआ हो उसमें रिकवरी सॉफ्टवेयर इंस्टाल नहीं करना चाहिए.
  • अगर हार्ड डिस्क बूट नहीं कर रही हो या प्राइमरी हार्ड डिस्क के रूप में चल पाने में सक्षम नहीं हो, और उसमे जरुरी डेटा है तो इस स्थिति में आप उस हार्ड डिस्क को दूसरे कंप्यूटर में सेकेन्ड्री हार्ड डिस्क के रूप में इस्तेमाल कर डेटा वापस पाया जा सकता है.

बैकअप के लिए सुरक्षित पेरिफिरल डिवाइस

वैसे तो आम तौर पर बैकअप हार्डडिस्क के दूसरे पार्टीशन में या अन्य किसी भी मीडिया स्टोरेज डिवाइस में लिया जा सकता है पर आज के समय में कुछ खास और उपयोगी डिवाइस उपलब्ध हैं जिन्हें हम आसान और सुरक्षित तरीके से बैकअप के लिए उपयोग में ला सकते है. आमतौर पर डेटा के साइज के आधार पर डिवाइस का चयन किया जा सकता हैः-

1. यूएसबी स्टोरेज

यूएसबी कहें या पेन-ड्राइव यह बैकअप लेने का सबसे सरल और आसान तरीका है. अलग-अलग क्षमता की पेन ड्राइव बाजार में उपलब्ध हैं. इनके साथ सबसे अच्छी बात यह है कि इनका आकार काफी छोटा होता है इस वजह से इन्हें हमेशा अपने पास रखा जा सकता है.

2. क्लाउड कम्प्यूटिंग

क्लाउड कंप्यूटिंग सूचना प्रौद्योगिकी का एक नया क्षेत्र है. इसमें हम अपना डेटा इंटरनेट के माध्यम से किसी कंपनी के सर्वर पर सेव रखते हैं जिसे इंटरनेट के माध्यम से कहीं भी कभी भी उपयोग में ला सकते हैं. आज कल गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, याहू जैसी आईटी कंपनियां ये सेवा अपने उपयोगकर्ताओं को मुफ्त प्रदान कर रही हैं, लेकिन ये एक सीमित स्पेस मुहैया कराती हैं, यदि किसी यूजर को ज्यादा स्पेस की जरूरत है तो वह इसके लिए आवश्यक फीस देकर उसे बढ़वा सकता है. लेकिन इसकी दो खामियां हैं पहली यह कि इसे एक्सेस करने के लिए इंटरनेट की जरुरत होती है दुसरी यह कि आपकी निजि जानकारियां और फाइलें दूसरे के सर्वर पर सेव होती हैं इस वजह से इसे सुरक्षित नहीं माना जाता है.

3. एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव

यदि आप एक USB पेन ड्राइव से एक अधिक वॉल्यूम चाहते हैं तो आप  एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव को प्रयोग में ला सकते हैं. बाजार में पोर्टेबल एक्सटर्नल हार्डड्राइव उपलब्ध है जो की आपके पूरे इंटरनल हार्ड डिस्क का बैकअप एक साथ लेने में सक्षम है. अभी बाजार में GB, TB और PB (1 पेंटा बाइट = 1000 PB ) में एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव उपलब्ध हैं सो अपने जरुरत और बजट के हिसाब से आप उसका चुनाव कर सकते हैं. आज-कल USB एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव को लोग ज्यादा वरीयता दे रहे हैं जो की प्लग एंड प्ले, इसका मतलब यह कि इसे चलाने के लिए इसमें पावरसप्लाई नहीं करनी पड़ती है यह पेन ड्राइव की तरह इस्तेमाल की जा सकती है.

4. ई-मेल बैकअप

यदि डिजिटल बैकअप के ऊपर दिए गए साधनों में आपके पास कुछ नहीं है और आप तत्काल खरीदने में सक्षम नहीं हैं तो आप क्लाउड कंप्यूटिंग या ई-मेल को प्रयोग में ला सकते हैं. पर ई-मेल पर बैकअप हम सिर्फ उन्हीं फाइलों का बना सकेंगे जो बहुत जरुरी हो और उसका वॉल्यूम 20 से 25 एमबी(मेगा बाइट)( 1024 केबी= 1 एमबी) के अंदर हो. क्योंकि अधिकांश ई-मेल प्रोवाइडर (गूगल, याहू, माइक्रोसॉफ्ट व रेडिफ-मेल) इतने बड़े मेल को भेजने की अनुमति देती है. इससे भी विश्‍व के किसी भी कोने से कहीं भी कभी भी एक्सेस किया जा सकता है. पर उसके लिए इंटरनेट होना अनिवार्य है.

कंप्यूटर फाइल सिस्टम

सिस्टम बैकअप के लिए जरूरी है कि आपकी ड्राइव NTFS फाइल सिस्टम के जरिए फॉरमेट की गई हो. विंडोज में हार्ड डिस्क के पाटीर्शन को दो अलग-अलग फाइल सिस्टमों में फॉरमेट करने की सुविधा मौजूद है. ये हैं FAT और NTFS फाइल सिस्टम. हालांकि आजकल करीब-करीब सभी लोग बेहतर और नए NTFS फाइल सिस्टम का ही प्रयोग करते हैं. अपने कंप्यूटर में विंडोज इन्स्टॉल करते समय आप इस बात का ध्यान रखें या अगर आप किसी हार्डवेयर इंजीनियर से सिस्टम फॉर्मेट करवा रहे हैं तो फॉर्मेट करवाते समय उससे कह दें कि वह उसे NTFS फाइल सिस्टम में ही फॉर्मेट करें क्योंकि उसमें डेटा की सुरक्षा, एक्सेस और बैकअप की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं.

श्याम सुन्दर प्रसाद

लेखक एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं.
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श्याम सुन्दर प्रसाद

लेखक एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं.