मनरेगा में फर्जीवाड़े का खेल

manregaगरीबों को रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा का खेल जारी है. यदि हकीकत का जायजा लेना है तो मुंगेर आइये. यहां यह योजना घोटालों की भेंट चढ़ चुकी है. मनरेगा से जुड़े अभियंता, पदाधिकारी करोड़ों रुपये डकार गये. कहीं वृक्षारोपण के नाम पर तो कहीं नहर के नाम पर राशि का बंदरबांट किया गया.

लूट का आलम यह है कि लाखों रुपये से विभिन्न क्षेत्रों में जो वृक्षारोपण किये गये, उनका कहीं कोई अता-पता नहीं है. एक तरफ जहां वृक्षारोपण की खानापूर्ति कागज पर ही कर के सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया, तो वहीं दूसरी ओर इससे गरीब-मजदूरों की भी हकमारी हुई है. मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिहार में मजदूरों को इस योजना के तहत 30 दिन का भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है.

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में घपलेबाजी का आलम यह है कि यहां जिले का चार प्रखंड एक ही कनीय अभियंता के जिम्मे है. तारापुर में पदस्थापित कनीय अभियंता अनिल कुमार पिछले छह वर्षों से इसी प्रखंड में पदस्थापित हैं, जबकि ऊंची पहुंच व पैरवी के बल पर उन्होंने  असरगंज, टेटियाबंबर व हवेली खड़गपुर प्रखंड का भी पदभार ग्रहण कर लिया. कनीय अभियंता की विभाग में तूती बोलती है. आलम यह है कि कई अधिकारी इनसे खुद परहेज करते हैं.

इन्होंने अपनी पत्नी सहित कई रिश्तेदारों के नाम पर फर्म खोल रखा है और मनरेगा के सामग्री की आपूर्ति उसी फर्म के नाम पर की जाती रही हैै. यही कारण है कि रोक के बावजूद असरगंज प्रखंड के मामले में उन्होंने अपने रिश्तेदार के फर्म के नाम पर 40.82 लाख की राशि की अवैध निकासी करवा दी. जिला पदाधिकारी उदय कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए असरगंज के मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी से 48 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा था.

इस मामले में सामग्री मद में भुगतान पर रोक के बावजूद कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा लगभग 40.82 लाख रुपये का भुगतान मनरेगा से जुड़े कनीय अभियंता के संबंधी के फर्म को कर दिया गया. जिलाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण प्रतिवेदन में साफ तौर पर लिखा है कि सामग्री मद में भुगतान पर रोक के बावजूद असरगंज प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी ने 40.82 लाख रुपये का भुगतान किया. यह राशि कनीय अभियंता के संबंधी के खाते में डाला गया है.

जिलाधिकारी के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह मामला वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है. सूबे में प्रशासनिक कार्रवाई की अपनी अलग ही रफ्तार है. दूसरी ओर मनरेगा के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी से लेकर कनीय अभियंता तक मामले को दफन करने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं. हालांकि जिलाधिकारी द्वारा मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी से जो स्पष्टीकरण मांगा गया था उस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई अभी तक स्पष्ट नहीं हो पायी है.

मुंगेर के तारापुर अनुमंडल के असरगंज, तारापुर एवं खड़गपुर अनुमंडल के टेटियाबंबर में मनरेगा योजना के तहत करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया हैै. वृक्षारोपण के नाम पर बिना वृक्ष लगाये ही राशि की अवैध निकासी कर ली गयी हैै. मापी पुस्तिका तैयार करने में भी घालमेल किया गया है.

बदहाली का आलम यह है कि कई योजनाओं में बिना मापी पुस्तिका तैयार किये मास्टर रौल के ही मजदूरों के नाम पर राशि की निकासी की गयी है. पारामाउण्ट एकेडमी विद्यालय से खानपुर तक नाला सफाई एवं पक्की निर्माण कार्य के योजना कोड ओपी/169918 में दोषी कार्यक्रम पदाधिकारी से जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा है.

कार्यक्रम पदाधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में ग्राम पंचायत धोबई, लौना, खैरा एवं बिहमा में बगैर वृक्ष लगाये, बिना चापाकल गाड़े और बिना तकनीकी पदाधिकारी द्वारा मापी पुस्तिका तैयार किये, एक स्वयं सेवी संस्था के नाम पर लाखों रुपये की फर्जी निकासी करा दी. वृक्ष पटवन के लिए 44 चापाकल की बोरिंग की जानी थी.

लेकिन एक भी चापाकल नहीं लगा और इसके नाम पर फर्जी तरीके से निकासी कर ली गयी. मनरेगा के तहत शौचालय निर्माण कार्य में भी फर्जी तरीके से निजी फर्म के नाम पर राशि की निकासी कर ली गयी है. जिससे लाभुक अनभिज्ञ हैं. इस अनियमितता के साक्ष्य को छुपाने के लिए विगत माह संचिका एवं कम्प्युटर चोरी की प्राथमिकी भी स्थानीय थाना में मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा दर्ज करायी गयी थी. उस मामले के पर्यवेक्षण में पुलिस निरीक्षक ने चोरी की घटना को झूठा करार दिया है.

साथ ही गलत प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में सूचक के विरुद्ध उलटा केस करने की अनुशंसा की है. मामला सिर्फ तारापुर का ही नहीं है, जगह-जगह ऐसी अनियमितता हुई है. मनरेगा योजना के तहत असरगंज प्रखंड के अमैया, रहमतपुर एवं चौरगांव पंचायत में वृक्षारोपण में भारी अनियमितता बरती गयी है.

आंकड़ों के मुताविक अमैया पंचायत में लगभग 4800, चौरगांव में 2400 एवं रहमतपुर में 2800 पौधा लगाया गया. लेकिन जमीन पर बीस प्रतिशत पौधे भी दिखाई नहीं दे रहे हैं. मनरेगा से जुड़े लोगों का कहना है कि अमैया पंचायत में बाढ़ के पानी में कुछ पौधे नष्ट हो गये. वृक्ष की सुरक्षा के लिए लगाये गये गैबियन भी कहीं नजर नहीं आ रहे. अमैया पंचायत के ग्रामीण विलास यादव, अर्जुन यादव, बिंदेश्वरी यादव आदि का कहना है कि इस पंचायत में तो वृक्ष ही नहीं लगाये गये हैं.

अधिकारी व बाबू लोग मिल कर सभी राशि डकार गये हैं. दूसरी ओर चौरगांव में कुछ स्थानों पर जीर्णशीर्ण अवस्था में गैबियन पड़ा हुआ है. पौधा पटवन के लिए लगाया गया चापाकल भी अब स्थल पर दिखाई नहीं दे रहा. बरियारपुर प्रखंड के हरिणमार व झौवा बहियार पंचायत में वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों की घपलेबाजी हुई है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में इन दोनों पंचायतों में 605 यूनिट पौधा लगाने की स्वीकृति मिली थी.

जिसमें प्रति यूनिट 2.11 लाख का प्राक्कलन तैयार किया गया था और 1.22 लाख मजदूरों को भुगतान होना था. हरिणमार पंचायत को 605 यूनिट पौधों के लिए 6.43 करोड़ तथा झौवा बहियार पंचायत को 6.33 करोड़ रुपया आवंटित किया गया. लेकिन इसमें भारी अनियमितता बरती गयी. यहां तक कि वृक्ष की खरीद से लेकर वृक्षारोपण, उसकी घेराबंदी और चापाकल लगाने में राशि का बंदरबांट किया गया.

इन दो पंचायतों में ही अधिकारी, अभियंता व मनरेगा से जुड़े पदाधिकारी करोड़ों रुपये डकार गये. अखिल भारतीय भ्रष्टाचार निमुर्लन संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव विजय कुमार मंडल एवं जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार जयसवाल ने इस घोटाले की जानकारी प्रधानमंत्री, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को दी है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

इनलोगों का कहना है कि कनीय अभियंता को चार-चार प्रखंडों का प्रभारी बनाकर रखना और उनके रिश्तेदारों द्वारा चलाये जा रहे फर्म को राशि का आवंटन करना बड़े घोटाले को उजागर कर रहा है. मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जो जांच की कार्रवाई प्रारंभ हुई, वह महज खानापूर्ति बनकर रह गयी है.

मनरेगा घोटाले के संबंध में नौ प्रखंडों की जांच के लिए 19 दिसंबर को जिला पदाधिकारी द्वारा जांच टीम गठित की गयी. टीम ने 21 दिसंबर को निर्धारित प्रखंडों व पंचायतों में मनरेगा योजना की जांच की. हालांकि निर्धारित पंचायतों में वे अधिकांश पंचायत शामिल नहीं हैं, जिनमें वृक्षारोपण के नाम पर लाखों-करोड़ों की अनियमितता हुई है. जांच टीम में शामिल एक वरीय पदाधिकारी ने कहा कि इस मामले में तो सब कुछ पूर्व से ही तय है जांच तो महज एक खानापूर्ति है.