सुप्रीम कोर्ट के झटके से चेत जाएं खेल संघ

anurag thakurभारत की सबसे बड़ी खेल संस्था भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को सुप्रीम कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है. बीसीसीआई न केवल भारत बल्कि विश्व क्रिकेट में अपने अलग रुतबे के लिए जाना जाता है. इतना ही नहीं उसकी हनक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद तक दबाव में रहती है.

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पर कड़ा रुख अपनाते हुए बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को पद से हटाने का फारमान जारी कर दिया है. बोर्ड के सचिव अजय शिर्के को भी चलता कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें मानने से जो भी इंकार करेगा उसे बीसीसीआई से जाना होगा. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड लगातार सुर्खियों में रहा है. लोढ़ा कमेटी से बचने के लिए अनुराग ठाकुर ने कई तरह के हथकंडे अपनाए लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से बोर्ड की बोलती बंद कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद क्रिकेट ही नहीं अन्य खेलों के पदाधिकारियों के माथे पर भी बल आ गया है.

उन तमाम खेल संघों के लिए खतरे की घंटी बजी है, जो खेल के साथ खिलवाड़ करने में लगे रहते हैं. खेलों को साफ सुथरा बनाने की मुहिम को अब नया बल मिल गया है. दुनिया का सबसे अमीर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड लगातार लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों से किनारा कर रहा था. लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर बोर्ड शुरू से ढुलमुल रवैया अपनाता रहा. कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी बोर्ड लगातार अपना बचाव करने में ही जुटा रहा.

बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर लगातार सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे थे और अजय शिर्के उनका साथ दे रहे थे. इन दोनों पर ही बीसीसीआई में सुधार को लेकर लोढ़ा पैनल की सिफारिशों को लागू कराने का जिम्मा था, लेकिन दोनों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई. सुप्रीम कोर्ट से मिल रही लगातार फटकार के बाद भी दोनों ने राज्य क्रिकेट संघों का हवाला देकर इसे लागू करने से कन्नी काटने की कोशिश की. लेकिन आखिरकार बोर्ड शीर्ष अदालत के हत्थे चढ़ ही गया.

विश्व क्रिकेट में अपना जोरदार दबाव रखने वाला भारतीय क्रिकेट बोर्ड इससे पहले कई मामलों में घिरा. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के सहारे पैसों की खान बनाने वाला बोर्ड शुरू में अपनी ताकत के बल पर कई मामलों को दबाने में सफल रहा. साल 2013 शायद बीसीसीआई के लिए सबसे बुरा दौर था.

यही वह साल था जो बीसीसीआई की बर्बादी का कारण बना. आईपीएल में फिक्सिंग का गंदा खेल इसी साल पूरी दुनिया के सामने आया और बोर्ड के पैरों तले जमीन खिसक गई. तब भेद खुला कि आईपीएल फिक्सिंग और अय्याशी का अड्डा बन गया है. आईपीएल के मैच

खुलेआम फिक्स हो रहे थे. टीमों के कई मालिक और खिलाड़ियों का इसमें सबसे अहम रोल था. इसी आईपीएल विवाद में राजस्थान रॉयल्स के तीन नामी गिरामी खिलाड़ी मैच फिक्सिंग में दबोचे गए. तीनों खिलाड़ियों पर फिक्सिंग के नए स्वरूप यानी स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा.

जाचों के लम्बे दौर के बाद इसमें उस वक्त के बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मय्यपन का नाम सामने आया. इसके बाद पूरे क्रिकेट जगत में हड़कम्प मच गया. इस खेल में गुरुनाथ मय्यपन के आलावा कई और लोगों से कड़ी पूछताछ की गई.

बोर्ड ने भी आनन फानन में कई बड़े फैसले लेने की बात की. इसी दौरान श्रीनिवासन को लेकर भी कई बातें सामने आईं. बोर्ड इस मामले को रफा-दफा करने में जुटा रहा लेकिन कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद बोर्ड की मुश्किलें बढ़ती ही चली गईं. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मुकुल मुद्गल के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई. जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद

बीसीसीआई के होश उड़ गए. कमेटी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा कमेटी बना डाली. इस कमेटी ने बीसीसीआई पर लगाम लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की. लोढा कमेटी की कई सिफारिशों पर बोर्ड ने पहले तो हामी भर दी लेकिन बाद में वह इसे मानने से कन्नी काटने लगा.

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट को सीधे आदेश देकर अध्यक्ष और सचिव को हटाना पड़ा. बोर्ड के 88 साल के इतिहास में पहली बार किसी अध्यक्ष और सचिव को इस तरह से हटना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खेल संस्थाओं का ढांचागत बदलाव होना तय है. क्रिकेट में चल रही तानाशाही पर भी अब लगाम लगेगी.