डायबिटीज़ में ऐसे रखें अपने पैरों का ख़ास ख्याल

diabetes-foot-careनई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है तो उसे अपने पैरों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है. डायबिटीज और पैरों से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं का थोड़ी-सी देखभाल और उचित फुटवियर चुनकर काफी हद तक समस्या से निजात पाया जा सकता है. किसी भी व्यक्ति को पैरों से संबंधित निम्न समस्याएं हो सकती हैं, जिसका जिक्र हम इस लेख में कर रहे हैं. ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें डायबिटीज है, उनके पैरों से जुड़ी आम समस्याओं को अगर अनदेखा कर दिया जाए तो ये इंफेक्शन या दूसरी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं. इंफेक्शन बढ़ने की अवस्था में प्रभावित अंग को काटना भी पड़ सकता है. आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि विश्‍व भर में डायबिटीज के कारण हर तीस सेकेंड में एक व्यक्ति अपना पांव गंवाता है.

डायबिटिक तंत्रिका विकृति के कारण असंवेदनशीलता या दर्द और सर्द-गर्म महसूस करने में अक्षमता जैसी मुश्किलें शुरू हो सकती हैं. तंत्रिका विकृति के चलते गोखुर व हैमरटोस जैसी बीमारियां हो सकती हैं. डायबिटीज के कारण शरीर की त्वचा व अन्य ऊतकों को ऑक्सीजन व अन्य पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते, जिसकी वजह से भी पैरों से संबंधित बीमारियां होती हैं. हाई ब्लड शुगर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से बीमारियों का असरदार इलाज नहीं हो पाता. इसके अलावा डायबिटिक व्यक्ति की त्वचा में फंगल इन्फेक्शन की संभावना की भी शिकायत रहती है. इन सभी लक्षणों को अगर नजरअंदाज किया जाए तो यह पैरों में होने वाले अल्सर में तब्दील हो सकता है. कभी-कभी अल्सर के चलते प्रभावित अंग को काटना भी पड़ता है.

ऐसा नहीं है कि इन समस्याओं पर काबू नहीं पाया जा सकता. तार्किक दृष्टिकोण अपनाया जाए तो डायबिटीज से संबंधित पैरों में होने वाले अल्सर व अंग विच्छेदन को काफी कम किया जा सकता है. हम सभी के लिए अच्छी खबर तो यह है कि 85 प्रतिशत मामलों में अंग विच्छेदन को ब्लड शुगर पर कंट्रोल करके, पैरों की बेहतर देखभाल करके और पैरों के अल्सर की उचित देखभाल से रोका जा सकता है.

कुछ बातों का ध्यान रखकर डायबिटीज से जुड़े पैरों की समस्याओं से बचा जा सकता है. क्या करें- 

1. स्वस्थ जीवनचर्या का पालन करें. नियमित रूप से दवा लें और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए व्यायाम करें.

2. नियमित तौर पर अपने पैरों के हर हिस्से को छुएं और किसी भी तरह की चोट लगने पर इलाज कराएं

3.  अपने पैरों को साफ रखें और सूखा रखें, विशेषकर पंजों को. पैरों को गुनगुने पानी से धोएं. अधिक गर्म पानी से परहेज करें.

4.  पैरों के नाखूनों को काटकर साफ रखें.

5.  सूखी त्वचा पर कोई अच्छा मॉश्‍चराइजर लगाएं. इस बात का ध्यान रखें कि पंजों की उगलियों के बीच में लोशन न लगाएं, क्योंकि इससे इंफेक्शन हो सकता है.

6. पैरों में चोट न लगने पाए, इसका ध्यान रखें. तलवों में पड़ने वाले घट्टे या पूरी तरह विकसित न हुए नाखूनों का इलाज प्रोफेशनल्स से ही कराएं.

7.  अपने पैरों पर एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन या नुकीली चीजों का प्रयोग न करें.

8. अपने जूतों को दिन में दो बार हिलाकर देखें कि अंदर कोई पत्थर या कुछ अन्य चीज न पड़ा हो, जो आपके पैरों को नुकसान पहुंचा सके.

9. जब भी नये जूते खरीदें, आरामदायक जूतों को ही वरीयता दें, जो आपके पंजों में पूरी तरह से फिट हो. ऊंची हील वाले और संकरे पंजे वाले जूतों से बचें.

10.पैरों में अच्छे और फिट जूते-मोजे पहनें. नंगे पांव बाहर न जाएं. घर पर घरेलू जूते पहनें.

11. गर्म पानी से पैरों को बचाएं. गर्म बालू, गर्म पानी की बोतलों और हीटिंग पैड का इस्तेमाल सावधानी से करें.

12. स्वीमिंग और साइक्लिंग पैरों के लिए अच्छी एक्सरसाइज मानी जाती है.

13. अगर आप स्मोकिंग करते हैं या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं तो उसे छोड़ना पैरों से जुड़ी समस्याओं के लिए सबसे बेहतर होगा.

14. वर्ष में एक बार अपने पैरों की ब्लड सर्कुलेशन व असंवेदनशीलता की जांच कराएं. गोखुर या हैमरटोस हो तो उसका ऑपरेशन करवाएं.

अगर ये लक्षण सामने आएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

पैरों में कोई भी चोट/अल्सर व चोट

कटने पर होने वाला इंफेक्शन

पैरों में लालिमा हो, सूजन हो या पैर गर्म हो रहे हों

पैरों में कोई हिस्सा ठंडा या गर्म महसूस हो रहा हो

अविकसित नाखून हो

पैरों में चलते समय या आराम के समय दर्द महसूस हो

पैरों या टखनों के आकार में कोई बदलाव महसूस हो

ब्लड शुगर का स्तर बढ़ रहा हो

इंफेक्शन और हाई ब्लडशुगर के चलते कई बार स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और इन कारणों के चलते सामान्य सी चोट भी गंभीर रोग में बदल जाती है. डायबिटिक व्यक्ति के पैर में अगर छोटा-सा भी घाव है तो वह पैरों में बड़ी क्षति पहुंचा सकता है. हालांकि डायबिटिक फूट की समस्याओं का इलाज संभव है. कुछ बातों का ध्यान रखकर, जैसे शुगर को नियंत्रित करके, लेकिन सबसे अच्छा तरीका तो यही है कि उन कारकों को ही दूर किया जाए, जिसकी वजह से डायबिटीज होता है. इसलिए दोस्तों, डायबिटीज पर नियंत्रण कीजिए, इसके पहले कि यह आपको नियंत्रित करे. साथ ही डायबिटीज पर नियंत्रण कर अपने पैरों को भी सुरक्षित बनाइए.