एक साथ दो फ़िल्में रिलीज़, बॉलीवुड के लिए घाटे का सौदा   

मुंबई, (लेखराज) : रईस और क़ाबिल एक साथ रिलीज़ हुईं | दोनों ही फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट भी हो गयीं | फिल्मों की रिलीज़ से पहले जिस बॉक्स ऑफिस व्यवसाय को लेकर अंदेशा जताया जा रहा था, दोनों ही फिल्मों के निर्माता उससे उबर गए | लेकिन विचार करने वाली बात यह है कि क्या दोनों फिल्मों को एक साथ रिलीज़ करने के निर्णय को टला नहीं जा सकता था | अगर टाला जा सका होता, तो निस्संदेह दोनों ही फ़िल्में बहुत बड़ी हिट साबित हुई होतीं, जिसका फ़ायदा फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन से जुड़े सभी लोगों को होता | लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ |

ये टकराव दो सुपर सितारों के अहं का टकराव है और जब भी इस तरह का टकराव सामने आता है, नुक़सान हमेशा निर्माताओं के साथ साथ वितरक और फिल्म प्रदर्शकों को होता है | हालांकि शाहरुख़ खान रईस के सहनिर्माता थे और काबिल को ऋतिक रोशन के पिता राकेश रोशन ने बनाया था, लेकिन उन दोनों के बीच एक साथ फिल्म रिलीज़ टालने को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका | सूत्रों से पता चला है कि राकेश रोशन ने काबिल के निर्माण से पहले ही अपनी फिल्म की रिलीज़ डेट तय कर दी थी और रईस की रिलीज़ को कई बार टालना पड़ा |

इस टालने की वजह के पीछे कहीं न कहीं शाहरुख़ खान के द्वारा असहिष्णुता पर दिया गया बयान बताया जा रहा था, जिसकी वजह से उनकी पिछली फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी | शाहरुख़ खान ने अंतिम रूप से रईस की रिलीज़ के लिए पच्चीस जनवरी को चुना, जो कि काबिल की भी रिलीज़ डेट थी | निस्संदेह शाहरुख़ खान अपने आप में बहुत बड़े सितारे हैं, लेकिन उन्होंने क्रिस्मस पर आमिर की दंगल के साथ रिलीज़ न करते हुए अपनी फिल्म को 25 जनवरी 2017 को ऋतिक रोशन की काबिल के साथ रिलीज़ लिया |

अमूमन फ़िल्में शुक्रवार को रिलीज़ की जाती हैं, लेकिन यह दोनों ही फ़िल्में बुधवार के दिन रिलीज़ हुईं | इसके पीछे निर्माताओं का विचार रहा होगा कि उन्हें 26 जनवरी का नेशनल हॉलिडे मिलेगा, साथ ही पूरा सप्ताहांत भी मिल जाएगा और उन्हें इस बात का लाभ मिला भी | यहाँ पर एक बात और विचारणीय है कि देश भर में सिनेमा स्क्रीन के बँटवारे को लेकर भी दोनों निर्माताओं में कोई सहमती नहीं बन सकी | रईस को 60% और काबिल को 40%सिनेमा स्क्रीन मिले |

कई फिल्म चिंतकों और विश्लेषकों का कहना है कि सितारों के अहं का यह टकराव फिल्म इंडस्ट्री के लिए घातक साबित होगा | एक बड़ा सच यह भी है कि साल में सिर्फ 52 सप्ताह होते हैं और साल भर में कोई 150 से ज़्यादा फ़िल्में बनती हैं, इसलिए हर फिल्म को अलग अलग शुक्रवार मिल जाए, यह संभव नहीं है | फिल्मों का टकराव होना तय है | इस सच को स्वीकार करते हुए कम से कम बड़ी फिल्मों के टकराव को आपसी समझ से टाला जा सकता है |

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