टेस्ट के बाद वन डे में चमकी टीम इंडिया माही व युवी लौटे रंग में

भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली का सितारा इस समय काफी बुलंद है. क्रिकेट के हर फॉर्मेट में विराट का जलवा देखने को मिल रहा है. मौजूदा समय में बतौर बल्लेबाज उनका कोई सानी नहीं दिख रहा है. उनके बल्ले की ताकत को देख कई बड़े खिलाड़ी उनके मुरीद बन गये हैं. टेस्ट क्रिकेट में उनकी कप्तानी का जलवा देखने को मिल रहा है, लेकिन अब वन डे क्रिकेट में भी वह देश की कप्तानी कर रहे हैं. दरअसल माही ने वन डे क्रिकेट की कप्तानी छोड़ दी है. इसके बाद बोर्ड ने विराट को क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट की कप्तानी सौंप दी. इंग्लैंड के खिलाफ बतौर कप्तान के तौर पर वह हिट साबित हुए.

इंग्लैंड को टेस्ट क्रिकेट में धूल चटाने के बाद विराट की सेना ने वन डे में इंग्लैंड को चारों खाने चित कर दिया है. हालांकि टीम इंडिया तीन मैचों की वन डे सीरीज को 2-1 से जीतने में कामयाब रही, इस सीरीज में टीम इंडिया की बल्लेबाजी की ताकत देखने को मिली. टीम इंडिया के दो पुराने धुरंधरों ने अपने बल्ले से लोगों को एक बार अपना कायल बना दिया है. युवी और माही ने बेहद शानदार बल्लेबाजी करते हुए मेहमान टीम के होश ठिकाने लगा दिये. इतना ही नहीं इस सीरीज में केदार जादव जैसे खिलाड़ी भी अपनी बल्लेबाजी के सहारे रातों रात स्टार बन गये.

केदार ने तीन मैचों की इस श्रृंखला में एक शतक और एक पचासे की बदौलत 232 रन बनाकर मैन ऑफ द सीरीज का खिताब अपने नाम किया है, टीम इंडिया ने इस सीरीज को अपने नाम कर चैम्पियंस ट्रॉफी की मजबूत दावेदारी पेश की है. चैम्पियंस ट्रॉफी से पूर्व टीम इंडिया को केवल इसी सीरीज में वन डे खेलना है. इसके बाद भारत को टेस्ट क्रिकेट में अपना जौहर दिखाना होगा. इस सीरीज ने टीम इंडिया के लिए कई विकल्प सामने लाये हैं. हालांकि टीम के कई बड़े खिलाड़ी चोटिल हैं. ऐसे में नये और पुराने खिलाड़ियों के पास टीम में अपनी जगह पक्की करने का अच्छा अवसर प्रदान किया है.

टीम में रोहित शर्मा अभी फिटनेस को पाने के लिए जूझ रहे हैं, जबकि रहाणे की फॉर्म और फिटनेस को लेकर अभी कयास लगाये जा रहे हैं. दूसरी ओर गेंदबाजी में अच्छे विकल्प तैयार हुए हैं. हालांकि भारतीय गेंदबाजी को लेकर चिंता की बात है क्योंकि इस सीरीज में गेंदबाजी बेहद फ्लॉप रही है, हार्दिक पांडेय ने पांच विकेट चटकाये, जबकि जडेजा ने चार, वहीं आर अश्विन ने तीन और भुवी ने एक विकेट हासिल किया, भारत को अगर चैम्पियंस ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना है तो गेंदबाजी में सुधार करना बेहद जरूरी है.

भारतीय टीम की इंग्लैंड के खिलाफ अपनी मजबूत बल्लेबाजी को लेकर खूब चर्चा हो रही है. माही ने कप्तानी छोड़ने के बाद तर्क दिया था कि बतौर बल्लेबाज अब वह टीम इंडिया में योगदान देना चाहते हैं. हालांकि वह अगले विश्व कप में अपनी बतौर बल्लेबाज टीम में बने रहने की कवायत में जुटे हुए हैं. यह तो समय बताएगा कि माही की फिटनेस अगले विश्व कप तक कैसी रहती है, लेकिन मौजूदा समय में वह अब निडर बल्लेबाज के रूप में सामने आये हैं. आज से कुछ साल पहले माही का यही अवतार देखने को मिलता था, लेकिन बाद में वह कप्तानी के बोझ तले दबते दिखे. धोनी ने इंग्लैंड के खिलाफ चार साल बाद वन डे क्रिकेट में शतक जमाया.

उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वन डे में 134 रन की धाकड़ बल्लेबाजी की. उन्होंने इस पारी के दौरान 122 गेंदों का सामना किया और 10 चौके और छह गगन चुम्बी छक्के जड़ कर पुराने धोनी लौटने का संकेत दे डाला. उन्होंने इससे पूर्व करीब 2013 में कंगारुओं के खिलाफ सैंकड़ा जड़ा था.

उनकी इस पारी ने एक बार फिर दुनिया के गेंदबाजों के लिए दहशत का फरमान जारी कर दिया है. एक समय ऐसा था जब माही के आगे जो विश्व के कई गेंदबाज आने से कतराते थे. माही ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले वन डे में कुछ खास नहीं कर सके थे. ऐसे में दूसरे वन डे में उनपर दबाव बनता दिख रहा था.

टीम इंडिया तीन बल्लेबाजों के सस्ते में आउट होने के बाद माही पर सारा दारोमदार था. उन्होंने युवराज के साथ मिल टीम इंडिया की बल्लेबाजी को संभाल लिया. धोनी लगातार मुश्किल हालात के बड़े खिलाड़ी रहे हैं. वह दबाव में अक्सर टीम इंडिया को जीत दिलाते रहे हैं. टीम इंडिया में डेब्यू करने के तीन साल बाद ही टीम इंडिया की बागडोर संभालने वाले धोनी अपनी बल्लेबाजी के लिए हमेशा सुर्खियों में रहे हैं. उनके शॉट को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है. वह मैच दर मैच भारत के सबसे भरोसेमंद क्रिकेटरों में शामिल हो गये.

यह वही दौर था जब टीम इंडिया में युवा चेहरों की भरमार थी लेकिन उनमें से कई खिलाड़ियों का क्रिकेट करियर खत्म हो चुका है. माही के समय टीम इंडिया में सीनियर खिलाड़ियों का रोल भी अहम माना जाता था. धोनी ने कप्तान बनते ही टीम की पूरी तस्वीर बदल दी, लेकिन अब विराट दौर में वह अपनी विरासत सौंप कर बतौर बल्लेबाज टीम को नई राह दिखाना चाहते हैं. ऐसे में टीम इंडिया को आने वाले समय में काफी फायदा मिलने के आसार हैं. दूसरी ओर इस सीरीज में एक और पुराने खिलाड़ी ने अपनी खोयी हुई लय हासिल कर ली.

युवराज सिंह ऐसा ही नाम है जो एक समय टीम इंडिया का युवराज हुआ करता था, लेकिन बाद में खराब फिटनेस उनके करियर में बाधा बनके सामने आयी. रणजी के रण में अपनी बल्लेबाजी का हुनर दिखाने के बाद टीम इंडिया में जगह मिल गयी. हालांकि उनकी वापसी को लेकर कई बातें मीडिया में चर्चा का सवाल बनी रही. पहले वन डे में लय में दिखे लेकिन उसे जारी रखने में नाकाम रहे. दूसरे वन डे में उन्होंने बेहद खौफनाक बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों पर कहर बन कर टूटते नजर आये. उनकी बल्लेबाजी को देखकर लगा कि पुराना युवराज टीम इंडिया को मिल गया. उनके करियर की सबसे बड़ी पारी खेलते हुए युवी ने धमाकेदार शतक जड़ एक बार फिर सुर्खियां बटोरी है.

सिक्सर किंग के नाम से मशहूर युवराज सिंह ने दूसरे वन डे में छह साल बाद 127 गेंदों में 150 रन की करिश्माई पारी खेलकर  बल्लेबाजी कौशल एक बार फिर दिखाया. उनकी इस बल्लेबाजी को देखकर कई क्रिकेट के जानकारों ने माना कि युवी में अभी क्रिकेट खत्म नहीं हुआ है. युवी ने इस मैच में कई जानदार शॉट लगाए. उनमें सबसे महत्वपूर्ण पुल शॉट तो देखते ही बनते थे. इस पारी के दौरान युवी ने 21 चौके और तीन जोरदार छक्के भी जमाये. युवी का शतक उनके

आलोचकों को करारा जवाब है, जो उनके करियर के खात्मे की बात करते थे. युवी ने तीसरे वन डे में अच्छी बल्लेबाजी की, युवराज सिंह ने क्रिकेट करियर में बहुत कुछ देखा है. कैंसर जैसी बीमारी को हराने के बाद मैदान पर युवराज का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. टीम में वापसी के लिए वह लगातार पसीना बहा रहे थे लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती थी. टीम में अंदर और बाहर होने की वजह से युवी का बल्ला कुंद पड़ता दिखा. इतना ही नहीं वह इससे काफी परेशान थे, लेकिन रणजी सीजन में उन्होंने अपने बल्ले को अलग तरह की धार दी. इसके बाद विराट ने उनको टीम में शामिल करने का फैसला किया. युवराज ने इस प्रदर्शन से अपने चयन को भी सही साबित कर दिया है. माही के साथ वह पहले भी कई मैच जिताऊ पारी खेल चुके हैं.

दूसरी ओर टीम इंडिया में इस समय विराट के अलावा भी कुछ बल्लेबाज हैं, जिनके बल्ले की दहाड़ बहुत तेजी से सुनायी पड़ रही है. उनमें सबसे प्रमुख है केदार जाधव. केदार लगातार अपने बल्ले के करिश्माई अंदाज की बदौलत खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. इंग्लैंड के खिलाफ पहले वन डे में ऐसा ही कुछ देखने को मिला. इंग्लैंड ने पुणे वन डे में पहले बल्लेबाजी करते हुए 351 रन का पहाड़नुमा लक्ष्य रखा, लेकिन केदार जाधव ने विराट के साथ मिलकर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया.

विराट और जाधव ने इस मुकाबले में 200 रन की बेजोड़ साझेदारी कर डाली और इससे इंग्लैंड के गेंदबाजों के पैरों तले जमीन खिसक गयी. विराट जहां एक ओर भारतीय बल्लेबाजी की अहम कड़ी बन चुके हैं, वहीं जाधव जैसे बल्लेबाज अब टीम इंडिया के नये स्टार के रूप में सामने आये हैं. जाधव ने इस मुकाबले में तूफानी बल्लेबाजी करते हुए केवल 76 गेंदों में 120 रन बना डाले और टीम इंडिया की जीत की मजबूत इमारत खड़ी की. जाधव ने इस पारी के दौरान 12 चौके और चार जोरदार छक्के भी लगाए थे.

इंग्लैंड ने भारत के चोटी के बल्लेबाजों को ढेर कर टीम इंडिया पर दबाव बना डाला था, लेकिन विराट और जाधव ने अपनी बल्लेबाजी के सहारे इंग्लैंड के गेंदबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. यह भी तीसरा मौका है जब टीम इंडिया ने इतना बड़ा लक्ष्य हासिल किया है. इतना ही नहीं तीसरे वन डे में उन्होंने बेहद शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 रन की तेज पारी खेलकर पूरी इंग्लैड टीम को हक्का-बक्का कर दिया था, उनकी इस पारी के चलते टीम इंडिया एक समय जीत के बेहद करीब पहुंच गई थी.

इस बीच विराट की तारीफ जितनी भी की जाए, वह कम होगी. मैच दर मैच कोहली की बल्लेबाजी का डंका बज रहा है. टेस्ट हो या वन डे विराट पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. उन्हें टीम इंडिया का अगला सचिन भी कहा जा रहा है. जानकारों की मानें तो वह अगर इसी तरह से रन बनाते रहे तो वह सचिन के रिकॉर्ड को भी बौना साबित कर देंगे. वन डे में कप्तानी मिलने के बाद उनके खेल में गजब का आत्मविश्वास देखा जा सकता है. दबाव में उनका खेल और निखर कर सामने आता है.

टीम इंडिया को जब भी जरूरत होती है, उनका बल्ला निराश नहीं करता है. लक्ष्य का पीछा करने में विराट की बल्लेबाजी चरम पर देखी जा सकती है. विराट ने पहले वन डे में 122 रन की धांसू पारी खेलकर एक बार फिर साबित किया कि वह भारतीय क्रिकेट के अब सबसे बड़े बल्लेबाज बन चुके हैं. कुल मिलाकर देखा जाये तो टीम इंडिया के लिए अच्छा संकेत है कि टीम के पास अब लम्बी बैटिंग लाइन है, जो वक्त के हिसाब से अपना खेल दिखाने में माहिर है.

Loading...