स्किन कैंसर जानलेवा नहीं है

Screen-cancer

स्किन कैंसर क्या है?
स्किन कैंसर में स्किन की कोशिकाएं जरूरत न होने पर भी नई कोशिकाओं में बदलती रहती हैं. पुरानी कोशिकाओं का नई कोशिकाओं में बदलना शरीर के लिए सामन्य बात है, लेकिन अगर नई कोशिकाओं के जरूरत न होने पर भी स्किन की कोशिकाएं विभाजित होती रहती हैं, तो स्किन कैंसर हो सकता है.

स्किन कैंसर के लक्षण
स्किन पर रैशेज, तिल या लच्छन (बर्थ मार्क्स) में होने वाले बदलाव स्किन के कैंसर का लक्षण हो सकता है. स्किन के कैंसर के दौरान स्किन पर कई तरह के बदलाव होते हैं जो मेलेनोमा (धूप से होने वाले) या नॉन-मेलेनोमा (बेहद गंभीर) कैंसर के लक्षण हो सकते हैं.
शरीर के लच्छन यानी बर्थ मार्क्स, तिल में बदलाव, इसके आकार बढ़ने लगे, रंग बदलने लगे, इस पर खुजली हो या खून निकले या तिल के आस-पास का रंग बदले, तो स्किन कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं.

  • स्किन पर अगर धब्बे चार हफ्तों से ज्यादा हों तो यह स्किन के कैंसर का संकेत हो सकता है.
  •  एक्जिमा यानी खाज भी स्किन के कैंसर का लक्षण हो सकता है. खासतौर पर अगर यह समस्या कोहनी, हथेली या घुटनों पर दिखे तो इसे लेकर लापरवाही न बरतें.
  •  स्किन पर रोजेशिया की समस्या यानी बहुत अधिक लाली और जलन भी स्किन के कैंसर का लक्षण हो सकता है. माथा, गाल, ठुड्डी और आंखों के आस-पास की स्किन लाल हो और उसमें खूब जलन हो तो यह स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है.

स्किन कैंसर के प्रकार
बेसल सेल कार्सिनोमा-यह कैंसर सबसे सामन्य होता है. यह स्किन की निचली परत के मूल कोशिकाओं में बढ़ता है. यह धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर के अन्य भागों में फैलता है. शुरू में ही इसका इलाज कराना जरूरी है. यह कैंसर शरीर के उस भागों में होता है जो कि धूप में अधिक आते हैं, जैसे चेहरा, कान, खोपड़ी आदि.

  • धूप में ज्यादा रहने वाले लोग बेसल सेल कैंसर का अधिक शिकार होते हैं. विशेषकर यदि वे श्‍वेत और नीली आंखों वाले हों या जिनकी स्किन गोरी हो उन्हें यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है. सैक्वमस सेल कार्सिनोमा-संयुक्त राज्य अमेरिका में सैक्वमस सेल कार्सिनोमा दूसरा सबसे आम पाया जाने वाला स्किन कैंसर है.
  • सैक्वमस सेल कार्सिनोमा स्किन की ऊपरी परत को प्रभावित करता है. ज्यादातर मामलों में सैक्वमस सेल कार्सिनोमा, स्किन के असुरक्षित, दीर्घकालिक सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने से होता है. ये आम तौर पर उन लोंगो में पाया जाता है जो लोग ज्यादा समय धूप में बिताते है, विशेष रूप से गोरे और नीली आंखों वाले लोग.
  • मेलेनोमा- मेलेनोमा कैंसर, यह तीन मुख्य प्रकार के स्किन कैंसर में सबसे कम देखने को मिलता है, लेकिन यह सबसे घातक हो सकता है. इस कैंसर में गले में सूजन या खुजली महसूस कर सकते हैं, यह शरीर पर कहीं भी हो सकता है. मेलेनोमा में तेजी से घाव बढ़ जाते हहैं जो अक्सर बहु रंग, काले और गुलाबी रंग के होते हैं. जब स्किन मेलेनोमा का उपचार नहीं किया जाता, तो यह स्किन से परे शरीर के अन्य भागों में फैलता है, जिससे हालत बहुत गंभीर हो सकती है. यह सूरज के संपर्क में ज्याादा रहने के जोखिम के कारण होता है. उन लोगों में आम होता है जिनको बुरा सनबर्न हो गया हो, बहुत सारे मोल्सब हो, गोरी स्किन हो, या परिवार में किसी को मेलेनोमा हो.

ये तीनो कैंसर थोड़ा अलग दिख सकते हैं, लेकिन आप सभी प्रकार के स्किन कैंसर के खतरे का उपचार एक ही प्रकार से कर सकते हैं. सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए आप एसपीएफ सनस्क्रीन लगाए, टोपी पहने और लंबी आस्तीन का उपयोग कर सकते है.

स्किन कैंसर से बचाव
स्किन कैंसर एक गंभीर रोग है और इसकी सही जानकारी और इसके प्रति गंभीर सोच बचाव का सबसे कारगर उपाय है. हालांकि इस समस्या से बचने के लिए कुछ अन्य सावधानियां भी बरती जा सकती हैं. तो चलिए जानते हैं कि स्किन कैंसर से बचाव कैसे किया जाए.

  • सनस्क्रीन का प्रयोग
    दरअसल सूरज की पराबैंगनी किरणें शरीर में भीतर जाकर कोशिकाओं की आनुवांशिक संरचना को ही बदल सकती हैं. इस कारण स्किन का कैंसर हो सकता है. इसलिए तेज धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का प्रयोग करें. यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से स्किन की रक्षा करता है. कुछ समय पूर्व ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने एक शोध में पाया था कि सनस्क्रीन न सिर्फ सनबर्न से स्किन की सुरक्षा होती है, बल्कि यह तीन प्रकार के स्किन कैंसरों से लड़ने वाले सुपरहीरो जीन की भी रक्षा करने में सक्षम होता है.
  • यूवीए और यूवीबी प्रोटेक्शन
    अल्ट्रा वॉयलेट किरणें यूवीए और यूवीबी इन दो प्रकार की होती हैं. यूवीए किरणें स्किन की पिग्मेंटेशन को बढ़ाती हैं, जबकि यूवीबी किरणें टैनिंग और स्किन कैंसर का कारण बनती हैं. इसलिए यूवीए से बचाव के लिए एसपीएफ का चिन्ह और यूवीबी से बचाव के लिए अपने सनस्क्रीन की जांच जरूर कर लें. यूवीबी किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन कम से कम एसपीएफ 30 वाला प्रयोग करें.
  • आहार भी है मददगार
    विटामिन डी की सही मात्रा लें. यह हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्किन को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से भी बचाकर स्किन कैंसर के खतरे को भी कम करता है. इसके अलावा चाय पिएं इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट यौगिक स्किन को हानिकारक किरणों से बचाते हैं. ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनल स्किन कैंसर से बचाव करता है. आप टमाटर और अंगूर भी खांए.
  • तेल लगाएं
    स्किन पर तेल मालिश करें. बादाम और नारियल के तेल में प्राकृतिक तौर पर एसपीएफ होता है. वहीं रसभरी के बीज के तेल में एसपीएफ 30 तथा गेहूं के तेल में विटामिन ई होता है जो आपको एसपीएफ 20 प्रदान करता है.

स्किन का इलाज
सर्जरी-बेसल सेल और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का आसानी से मामूली सर्जरी और स्किन की सतह का दवाओं के साथ इलाज किया जा सकता. सर्जरी विकिरण या रसायन चिकित्सा के बाद की जाती है. सर्जरी शरीर में ऊतकों के एक क्षेत्र को नष्ट कर सकती हैं. हालांकि, इन तकनीकों में स्किन को काटने के लिए नलियों का इस्तेमाल नहीं करते हैं.

रेडियोथेरेपी-ऊर्जा किरणों और कणों का उपयोग (प्रोटॉन, फोटॉनों या इलेक्ट्रानों) कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए किया जाता है. विकिरण उपचार शरीर के बाहर केंद्रित रहते हैं और स्किन के कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी के साथ प्राथमिक उपचार भी किया जाता है. विकिरण भी अन्य उपचारों के साथ संयोजन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

  • एक्ससिशनल सर्जरी
    इसमें कैंसर के आस-पास के स्किन के साथ सुरक्षा के कारणों से उसके चारों तरफ के सामान्य स्किन को हटाने के लिए स्केलपेल का प्रयोग करते हैं. सर्जरी के आस-पास के घाव को टांके के साथ बंद कर दिया जाता है. इससे इसका इलाज 92 प्रतिशत तक सही हो जाता है.
  • रेडिएशन
    रेडिएशन से इलाज में कैंसर के ऑपरेशन की कोई जरूरत नहीं होती है. ट्यूमर को ठीक करने के लिए सीधे एक्स-रे किरणे उस पर डाली जाती हैं इसके लिए मरीज को एनेसेथीसिया के जरिए बेहोश भी नहीं करना पड़ता. ट्यूमर को समाप्त करने कलिए लंबे उपचार की आवश्कता होती है, एक सप्ताह के दौरान ही कई बार इसकी देख-रेख करनी पड़ती है. इलाज के बाद सफल इलाज का प्रतिशत 85 से 95 प्रतिशत तक है. स्किन के रोगों के लिए इस तरह के इलाज का प्रयोग किया जाता है.

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