विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद – भाजपा बलपूर्वक कश्मीरियों के आंदोलन को कुचल पाएगी!

jammu kashmirघाटी में इन दिनों एक आम धारणा है कि यूपी और उत्तराखंड के चुनावों में भाजपा की असाधारण जीत के बाद कश्मीर के प्रति मोदी सरकार का रवैया और ज्यादा सख्त होगा. चुनाव परिणाम आने से कई सप्ताह पहले ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने घाटी में पैलेट गनों की भारी सप्लाई को मंजूरी दे दी.

इस समय सीआरपीएफ के पास 640 पैलेट गन मौजूद हैं, जिन्हें वो पिछले 9 महीने से घाटी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है, लेकिन अब आने वाले दिनों में सीआरपीएफ के पास 4,949 पैलेट गन होंगी. ज़ाहिर है कि उन घातक हथियारों की संख्या बढ़ने से हिंसा की संभावना दिखने लगी है, जिनकी वजह से जुलाई 2016 से अब तक सैंकड़ों लोग घायल और दर्जनों दृष्टिहीन हो चुके हैं.

सेना प्रमुख बिपिन रावत पहले ही यह वार्निंग दे चुके हैं कि सेना उग्रवादियों के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों को भी उग्रवादी मानेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. रक्षा मंत्री रहते हुए मनोहर पार्रिकर सेना प्रमुख के इस बयान का समर्थन भी कर चुके हैं. जिसका सा़फ मतलब है कि कश्मीर में सेना की संभावित कार्रवाई को भाजपा सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त होगा.

घाटी की दो संसदीय सीटों श्रीनगर (मध्य कश्मीर) और अनंतनाग (दक्षिणी कश्मीर) के उपचुनाव क्रमानुसार 9 और 12 अप्रैल को हो रहे हैं, यहां हालात ख़राब हो जाने की प्रबल संभावना है. पुलिस प्रमुख के अनुसार संभावित हालात से निबटने के लिए फोर्सेज की 54 और कंपनियां मंगवाई गई हैं.

जहां तक दक्षिणी कश्मीर का संबंध है, यहां 8 जुलाई को बुरहान वानी की मौत के बाद पैदा हुए हिंसक हालात के प्रभाव आज भी सा़फ दिखाई दे रहे हैं. सच्चाई यह है कि पिछले 9 महीने के दौरान ज्यादातर दिन दक्षिणी कश्मीर हिंसक हालात का ही शिकार रहा है. आज भी इस क्षेत्र में समय-समय पर हालात ख़राब हो रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियां श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के 1559 मतदान केन्द्रों को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील या अति संवेदनशील घोषित कर चुकी हैं.

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अधिकतर लोग यह आशंका जता रहे हैं कि चुनावी गतिविधियां शुरू होने के साथ ही दक्षिण कश्मीर और श्रीनगर में हिंसक हालात पैदा हो सकते हैं. विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की ओर से भी और कड़ा रुख़ देखने को मिल सकता है. वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक चट्टान के संपादक ताहिर मुहीउद्दीन ने इस सिलसिले में बात करते हुए कहा, मुझे लगता है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के साथ ही घाटी में विशेष रूप से दक्षिणी कश्मीर में हिंसक हालात पैदा होंगे.

कश्मीर के प्रति मोदी सरकार का रवैया पहले तो कड़ा था ही, लेकिन पांच राज्यों के चुनावों में ज़बरदस्त जीत से संभव है कि यह रवैया और कड़ा होगा और इसका असर सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली में भी देखने को मिल सकता है. क्योंकि सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर हमेशा ही सरकार की नीतियों का असर रहता है.

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यूपी चुनावों में भारी बहुमत से जीत के कारण भाजपा सरकार की नीतियां न केवल कश्मीर बल्कि पाकिस्तान के प्रति भी और कड़ी हो सकती हैं. पत्रकार माजिद जहांगीर का कहना है कि यह बात समझने की आवश्यकता है कि यूपी चुनावों में भाजपा ने एक बार फिर मुसलमानों का यह भ्रम तोड़ दिया है कि उनके वोट बैंक का कोई महत्व है. दो क़दम आगे बढ़कर भाजपा ने यह भी साबित किया कि उसे मुस्लिम उम्मीदवारों की भी कोई आवश्यकता नहीं है. भाजपा साबित कर चुकी है कि इस देश में हिन्दुत्ववाद के नाम पर एक मज़बूत सरकार क़ायम की जा सकती है.

मोदी सरकार ने बीते दो वर्षों के दौरान पाकिस्तान और कश्मीर के प्रति जो कड़ा रवैया अख्तियार किया हुआ है, उसके कारण देश की बड़ी हिन्दू आबादी के बीच भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी है. उसे और क्या चाहिए. मेरा मानना है कि अगले लोकसभा चुनावों में ज़बरदस्त जीत हासिल करने के लिए भाजपा मुस्लिम विरोधी, कश्मीर विरोधी और पाकिस्ताान विरोधी भावनाएं उछालकर वोटरों को लुभाने का नुस्खा इस्तेमाल करेगी.

क्योंकि यह सच है कि अब तक भाजपा के लिए यह नुस्खा कामयाब साबित हुआ है. देश की बहुल हिन्दु आबादी भाजपा को इसलिए पसंद करती है, क्योंकि वो पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के बजाय सर्जिकल स्ट्राइक करने में विश्वास रखती है. ये लोग कश्मीर में अलगाववादियों के साथ कोई संबंध रखने के बजाय प्रदर्शनकारियों के खिला़फ बल प्रयोग करने को सही समझते हैं. आपको भाजपा का रवैया कितना ही बुरा क्यों न लगे, लेकिन सच तो यह है कि इस पार्टी की कामयाबी का राज इसी प्रकार की नीतियों में है.

पत्रकार माजिद का मानना है कि भाजपा का निशाना संसद पर इस हद तक नियंत्रण प्राप्त करना है, ताकि किसी भी कानून में संशोधन करने के लिए उसे विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता ही न हो. उन्होंने बताया कि भाजपा उस मुक़ाम तक पहुंचना चाहती है, जहां वो कश्मीर को विशेष हैसियत देने वाली भारतीय संविधान की धारा 370 को एक ही झटके में ख़त्म कर सके या एक हफ्ते में अयोध्या में राम मन्दिर का निर्माण करा सके. यह ताक़त मिलने के लिए ज़रूरी है कि भाजपा देश के हिन्दुओं को धर्म के नाम पर एक करे और उनका समर्थन प्राप्त करे. साथ ही उनमें दुश्मनी और पाकिस्तान के प्रति नफरत की भावना को उभारे. भाजपा यही सब कर रही है.

ऐसे हालात में यह अपेक्षा करना कि कश्मीर के प्रति मोदी सरकार का रुख़ किसी भी लिहाज़ से नरम होगा या निकट भविष्य में ये पाकिस्तारन के साथ किसी प्रकार की दोस्ती या वार्ता करेंगे, ये सोचना मूर्खता है. अगर यह बात सही मानी जाय कि भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ इन कट्टर नीतियों के कारण बढ़ रहा है, तो विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में कश्मीरी जनता को इंडियन स्टेट का और कड़ा रुख़ देखना पड़ेगा.

हालांकि जुलाई 2016 के बाद, यानि पिछले 9 महीने के दौरान अधिकतर दिनों में घाटी में हिंसा की लहर छाई रही. जनविरोध की सैकड़ों घटनाएं हुईं और उनसे निबटने के नाम पर सुरक्षा बलों ने ताक़त का बेतहाशा प्रयोग किया. इस अवधि में 100 से अधिक लोग मारे गए. दस हज़ार से अधिक लोग पैलेट लगने से घायल हुए. सैंकड़ों नौजवानों की आंखें पैलेट गन के प्रयोग की वजह से प्रभावित हुईं.

60 से अधिक युवा लड़के और लड़कियां जीवन भर के लिए अपनी दृष्टि खो बैठे. पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से हर मौके पर बल प्रयोग करना एक रूटीन बन चुका है. इस स्थिति के कारण में घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के खिला़फ आक्रोश की एक लहर देखने को मिल रही है. इस बीच यहां मिलिटेंसी की घटनाओं में असाधारण इज़ा़फा देखने को मिल रहा है. न केवल घाटी में विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी देखने को मिल रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं में भी मिलिटेंसी के प्रति रूझान देखने को मिल रहा है.

पुलिस अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में, विशेष रूप से दक्षिणी कश्मीर में, कई युवा मिलिटेंटों के समूह में शामिल हो चुके हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस के ची़फ एसपी वेद का कहना है कि फिल्हाल घाटी में 80 विदेशी मिलिटेंटों समेत 214 मिलिटेंट सक्रिय हैं, जिनमें से अधिकतर का संबंध हिज्बुल मुजाहिद्दीन के साथ है. अधिकारियों के अनुसार अधिकतर विदेशी लड़ाके उत्तरी कश्मीर में मौजूद हैं. हालांकि गैर सरकारी सूत्रों का कहना है कि घाटी में सक्रिय लड़ाकों की संख्या इससे कहीं अधिक है.

दो हफ्ते पूर्व दस लड़ाकों वाला एक समूह दक्षिण कश्मीर के शोपियां क्षेत्र में एक पुलिस अधिकारी के घर में घुस गया और वहां तोड़फोड़ मचाने के बाद घर वालों को धमकी दी कि वे उस पुलिस अधिकारी को तत्काल रूप से नौकरी छोड़ने के लिए कहें. इस घटना ने पुलिस विभाग को हिलाकर रख दिया. पुलिस विभाग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संकेत दिया कि अगर मिलिटेंटों ने पुलिस अधिकारियों के घरवालों को कोई नुक़सान पहुंचाने का सिलसिला शुरू किया, तो जवाबी कार्रवाई में मिलिटेंटों के परिवार वालों को निशाना बनाया जाएगा.

इस संदर्भ में पुलिस चीफ एसपी वेद ने ट्‌‌‌‌‌वीटर पर लिखा कि हमने हमेशा मिलिटेंटों के परिवारजनों के साथ अच्छा व्यवहार किया है. हमने हमेशा उन्हें कहा कि वे अपने बच्चों का आत्मसमर्पण कराएं और उनका पुनर्वास कराएं. लेकिन उन्होंने (मिलिटेंटों ने) हमारे परिवारजनों पर हमले किए. उन्हें (मिलिटेंटों को) यह समझना चाहिए कि उनके परिवार भी कश्मीर में ही रह रहे हैं.

पिछले दिनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर ज़ाकिर मूसा, जो इस संगठन में बुरहान वानी का उत्तराधिकारी भी है, उसका एक वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर फैल गया. इस वीडियो में उसने पथराव करने वाले युवाओं की तारीफ करते हुए उन्हें नसीहत दी कि वे कौम के लिए नहीं, बल्कि इस्लाम के लिए पथराव करें. 12 मिनट के इस वीडियो संदेश में मिलिटेंट कमांडर ने घाटी में जारी आंदोलन को इस्लामी संघर्ष बताया. उसने मिलिटेंटों को अल्लाह का सिपाही बताया.

उसने दावा किया कि कश्मीर में जारी संघर्ष मूल रूप से इस्लाम की खातिर संघर्ष है. हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर के इस बयान पर घाटी में कुछ विश्लेषकों का कहना है कि हिज्ब में धार्मिक कट्टरता की यह सोच पहली बार देखने को मिल रही है. अतीत में हिज्ब का रुख यह था कि वे कश्मीर समस्या के हल के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं. हिज्बो ने अतीत में कई बार युद्धविराम की घोषणा भी की है, जो बात इस का सबूत था कि यह संगठन किसी अर्ंतराष्ट्रीय एजेंडे पर काम नहीं कर रहा है. लेकिन नए कमांडरों की नई सोच ने विभिन्न प्रकार के संशय पैदा किए हैं.

दूसरी ओर आम युवाओं में भी कट्टर सोच की कई मिसालें देखने को मिल रही हैं. घाटी में पिछले कुछ महीनों से सेना और लड़ाकों के बीच मुठभेड़ों के दौरान आम युवाओं की ओर से सेना पर पथराव की घटनाएं बढ़ रही हैं. झड़पों के दौरान सेना का ध्यान भटकाने और लड़ाकों को भागने का मौका देने के लिए आम कश्मीरी युवा पथराव कर रहे हैं. सेना प्रमुख बिपिन रावत ने इसी सिलसिले में धमकी दी है कि अगर एनकाउंटर साइट्‌‌‌‌‌स पर सेना का ध्यान हटाने के लिए पथराव का सिलसिला जारी रहा, तो सेना इन आम नौजवानों को भी लड़ाका मानकर इनके खिलाफ कार्रवाई करेगी.

सेना प्रमुख की धमकी के बावजूद आम युवाओं ने क्रैक डाउन या झड़पों के दौरान सेना पर पथराव का सिलसिला बंद नहीं किया. सेना प्रमुख की वार्निंग के दो दिनों बाद ही नौजवानों ने दक्षिणी कश्मीर में मिलिटेंटों के खिला़फ सेना की कार्रवाई में बाधा डालने के लिए इतना पथराव किया कि सेना को ऑपरेशन समेट कर वापस जाना पड़ा. इस स्थिति से साफ ज़ाहिर है कि आने वाले दिनों में घाटी में सुरक्षा एजेंसियों और लड़ाकों, दोनों ओर से सख्ती देखने को मिल सकती है.

विवादित बयानों के कारण आए दिन ख़बरों में रहने वाले विधायक इंजीनियर रशीद का कहना है कि दोनों ओर से कट्टरता की जो लहर देखने को मिल रही है, उसके कारण संभव है कि आने वाले समय में स्थिति मुस्लिम कश्मीर बनाम हिन्दु भारत की लहर में बदल जाएगी. उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार की नीतियों की वजह से पूरे भारत में राष्ट्रीयता का नैरेटिव बदल गया है. मुझे आशंका है कि आने वाले दिनों में भारत में केवल हिन्दुओं को ही राष्ट्रवादी माना जाएगा.

ऐसे हालात में कश्मीरियों को सबक़ सिखाना भारत सरकार का एक मिशन बन जाएगा और यहां अत्याचार व हिंसा का बाज़ार गरम होगा. हर गुज़रने वाले दिन के साथ ताक़तवर बनने वाली भाजपा सरकार अगर कश्मीर के आंदोलन को कुचलने के लिए बेतहाशा ताक़त का इस्तेमाल करने का फैसला करती है, तो विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि कश्मीर में मौत, अत्याचार व हिंसा का ग्राफ बहुत हद तक बढ़ जाएगा.

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