कैशलेस सोसायटी बनाने का ये तरीका अमानवीय है…

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नई दिल्ली : कहां तो नोटबंदी से महंगाई घटने वाली थी, कालाधन आने वाला था, आतंकवाद खत्म होना था और नकली नोट का सफाय होना था. लेकिन हो क्या रहा है? महंगाई अपनी जगह है, गैस सिलिन्दर का दाम लगातार बढता जा रहा है. कालाधन कितना है, इसका भी पता नहीं. नए नकली नोटों के खेप पकडे जा रहे है. इस सब के बाद, अब सरकार ने एक नया शिगूफा छोड दिया कैशलेस सोसायटी का.

कैशलेस सोसायटी बनाने की कवायद में एटीएम से पैसे की निकासी को ले कर भी रोज-रोज नए फरमान आ रहे है. अब बैंक की ओर से मिले फ्री ट्रांजैक्शन के आंकड़े को पार करने के बाद अब एटीएम से पैसा निकालने, बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक करने या मिनी स्टेटमेंट निकालने पर भी चार्ज देना होगा. एचडीएफसी बैंक ने इसकी शुरुआत पहले से ही कर दी है. अन्य बैंक भी इसे लागू कर सकते हैं. गौरतलब है कि हाल ही में प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंक्स ने बैंक ब्रांच से किए जाने वाले ट्रांजैक्शंस के लिए 4 फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट तय कर दी है. पांचवें ट्रांजैक्शन पर 150 रुपये का शुल्क देना होगा.

सरकार का मानना है कि लोग एटीएम से या बैंक से अपनी आवश्यकता से अधिक पैसा निकाल रहे हैं. सवाल है कि भारत जैसे देश में 97 फीसदी लेनदेन नगद में होता है. एक देश जो कैश के इस्तमाल का इतना अधिक अभ्यस्त है, उससे कहा जाए कि आप एटीएम से 4 बार से अधिक पैसा नहीं निकाल सकते या निकालने पर आपको शुल्क देना होगा और अब तो यहां तक कि एटीएम से बैंक स्टेटमेंट निकालने पर भी शुल्क देना होगा, एक बेकार का और अमानवीय विचार है. कैश इस्तेमाल की आदत कोबदलने में काफी समय लगेगा. लोगों को समय देना चाहिए. ईमानदारी से सरकार को मान लेना चाहिए कि नोटबंदी के फैसले ने सही तरीके से काम नहीं किया. यानी, ये असफल रहा.

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