कैंडल लाइट डिनर पर मत जाना, जा सकती है आपकी जान

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : अब तक रोमांस के लिए कैंडल लाइट डिनर को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. किसी शांत जगह में अपनी महिला मित्र के साथ कैंडल लाइट डिनर यानी मोमबत्ती की दूधिया रोशनी में भोजन करना भला किसे पसंद नहीं होगा, लेकिन अब कुछ लोग इसे ख़तरनाक बता रहे हैं. शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि ऐसे रूमानी भोज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं.

साउथ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं का परीक्षण किया है. उन्होंने पाया कि पैराफ़ीन की मोमबत्तियों से निकलने वाले हानिकारक धुएं का संबंध फेफड़े के कैंसर और दमा जैसी बीमारियों से है. हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि मोमबत्ती से निकलने वाले धुएं का स्वास्थ्य पर हानिकारक असर पड़ने में कई वर्ष लग सकते हैं. ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, मोटापे और शराब सेवन से कैंसर होने का ख़तरा ज़्यादा है.

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मोमबत्तियों के कभी-कभी इस्तेमाल से लोगों को ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. मुख्य शोधकर्ता आमिर हमीदी का कहना है कि जो लोग पैराफ़ीन मोमबत्तियों का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, वे ख़तरे के दायरे में हैं. आमिर ने वाशिंगटन स्थित अमेरिकन केमिकल सोसाइटी को बताया कि कभी-कभी मोमबत्तियों के इस्तेमाल और उनसे निकलने वाले धुएं से ज़्यादा असर नहीं होगा. उनका कहना था, यदि कोई व्यक्ति कई वर्षों तक हर रोज़ पैराफ़ीन मोमबत्तियां जलाता है, ख़ासकर ऐसे कमरे में, जहां हवा आने-जाने का प्रावधान नहीं है, तब समस्या हो सकती है.

जांच-पड़ताल के लिए शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में कई तरह की मोमबत्तियां जलाईं और उनसे निकलने वाले पदार्थ एकत्र किए. पैराफ़ीन आधारित मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं के परीक्षण से पता चला कि उनके जलने से पैदा होने वाला ताप इतना तेज़ नहीं होता, जिससे ख़तरनाक कण जैसे टॉल्युइन और बेंज़ीन पूरी तरह से जल पाएं. वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुमक्खी के छत्ते से निकले मोम या सॉया से बनने वाली मोमबत्तियां जब जलती हैं तो उनसे इतनी ज़्यादा मात्रा में रसायन नहीं निकलता. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि ऐसी ही मोमबत्तियों का इस्तेमाल किया जाए.

ब्रिटेन स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉक्टर जोआना ओवेंस कहती हैं कि ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला है, जिससे कहा जा सके कि मोमबत्ती के रोज़ इस्तेमाल से कैंसर जैसी बीमारियां होने का ख़तरा हो सकता है. ओवेंस कहती हैं कि बंद कमरे में अगर सिगरेट पी जाए तो उससे प्रदूषण बढ़ता है और यह ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

जब हम कैंसर की बात करते हैं तो हमें पक्के सबूतों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए. सिगरेट, शराब, मोटापा और खाने-पीने की ग़लत आदतों से कैंसर होने की आशंका ज़्यादा होती है. ब्रिटिश लंग फ़ाउंडेशन की मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर नोएमी आइज़र कहती हैं कि पैराफ़ीन मोमबत्तियों के कभी-कभी इस्तेमाल से फेफड़ों को ख़तरा नहीं होना चाहिए, लेकिन लोगों को मोमबत्ती जलाते व़क्त कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए, जैसे कि मोमबत्तियां खुले हवादार कमरों में जलाई जाएं. अगर आप भी अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर कैंडल लाइट डिनर पर जा रहे हैं तो एक बार ज़रूर सोचिएगा.

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