नक्सली हमले में घायल जवान शेर महम्मद ने बताया वो मंजर जब हमला हुआ

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नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। छत्तीसगढ़ में नक्सिलयों ने सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया। छिप कर की गई नक्सलों की इस कायरतापूर्ण कार्रवाई में 25 जवान शहीद हो गए जबकि 6 घायल हैं। इसके अलावा जानकारी मिल रही है कि एक कमांडर समेत 7 जवानों की जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है।

जैसे की नक्सलियों की रणनीति हैं। छिप कर हमला करने की रणनीति इस बार भी अपनाई गई। हमले की जगह और वक्त नक्सलियों ने जवानों की एनर्जी के हिसाब से चुना। नक्सलियों के हमले में घायल हुए जवान शेर मोहम्मद ने पूरे मंजर के बारे में मीडिया को बताया। उन्होने बताया कि सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के 99 जवान दुर्गापाव रैंप से रवाना हुए। यहां जवानों को दो हिस्से में बांट दिया गया। जहां कॉम्बिंग का काम करना था। क्योकि यहां सड़क निर्माण का काम चल रहा था।

इसी चिंतागुफा-बुर्कापाल-भेजी इलाके के पास करीब 300 से 400 नक्सली घात लगाए बैठे थे। अचानक नक्सलियों ने एलईडी ब्लास्ट कर दिया। जब तक जवान कुछ समझ पाते तब तक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। जवानों ने फौरन पोजीशन संभाली और अपने घायल साथियों को कवर किया।

मोहम्मद शेर बताते हैं कि नक्सल संख्या में हमसे दोगुने से भी ज्यादा थे। उनके पास आधुनिक एके-47 जैसे हथियार थे। उनकी अगुवाई हिडम्मा कर रहा था। मोहम्मद शेर ने बताया कि महिला नक्सल भी इस हमले में शामिल थीं और गांव के लोगों ने लोकेशन ट्रेस करवाई थी। उन्होने बताया कि 3-4 नक्सलियों की छाती पर गोली मोहम्मद शेर ने ही मारी थी।

घायल जवानों के मुताबिक नक्सलियों के पास मार्च महीने में हुई लूट के हथियार भी मौजूद थे। नक्सल महिलाएं भी लगातार गोलीबारी कर रहीं थी। हमले की जानकारी मिलते ही जगदलपुर में तैनात वायुसेना के एंटी नक्सल हाइटेक हेलीकॉप्टर्स को रवाना किया गया। वायुसेना जब तक पहुंचती तब तक नक्सल फरार हो चुके थे।

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