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संघ की ही उपज हैं मंदसौर के विद्रोही किसान नेता कक्का जी

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नई दिल्ली। “खेती के लिए खाद ख़रीदने लाइन में लगे बालक से ज़िले के कलेक्टर साहब ने कहा कि बेटा धूप में क्यों खड़े हो छांव में आ जाओ तो बालक ने जवाब दिया कि साहब किसान का बेटा जब छांव से प्रेम करेगा तो इस देश की जनता का पेट कौन पालेगा…”

यह 11 साल के बालक थे शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी, जो इन दिनों मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं.

शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी का एक ही नारा है “खुशहाली के दो आयाम, ऋण मुक्ति और पूरा दाम”

किसानों के प्रमुख नेता के रूप में पहचान रखने वाले कक्का जी इन दिनों मध्य प्रदेश में भारतीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य के रूप में किसानों की अगुवाई कर रहे है.
कौन है कक्का जी?

20 दिसंबर 2010 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 15 हज़ार किसानों ने अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों से घेर लिया था. मुख्यमंत्री निवास से लेकर शहर के सभी प्रमुख रास्तों को किसानों ने जाम कर दिया था.

उस समय आरएसएस से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ की मध्य प्रांत इकाई के अध्यक्ष के रूप में कक्का जी ने मोर्चा संभाला था.

इसी अंदोलन ने शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी को एक नई पहचान भी दी थी. मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले के वनखेडी के पास ग्राम मछेरा खुर्द में 28 मई 1952 को एक किसान परिवार में जन्में कक्का जी ने अपनी शिक्षा जबलपुर में पूरी की.

जबलपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट और एमए राजनीति शास्त्र की शिक्षा प्राप्त शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी छात्र राजनीति में शरद यादव के साथ जुडे रहे. कई बार जेल जा चुके शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी बताते है कि जेपी आंदोलन और इमरजेंसी के दौरान भी वह कई बार जेल गए.

उन्होंने 1981 में मध्य प्रदेश सरकार की विधि बोर्ड में सलाहकार के रूप में काम किया. लेकिन इस दौरान तत्कालीन मध्यप्रदेश के बस्तर में केंद्र सरकार के कानून 70 (ख) के तहत आदिवासियों की ज़मीन मुक्त करवाने के दौरान वह कई रसूखदारों के निशाने पर आ गए जिसके बाद उनका ट्रांसफर भोपाल कर दिया गया.

कुछ समय नौकरी करने के बाद वह किसान आंदोलन में कूद पड़े. वे भारतीय किसान संघ में पहले महामंत्री और बाद में अध्यक्ष रहे.

शिवराज का विरोध

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले की बरेली तहसील में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली लगने से एक किसान की मौत और आगजनी के बाद कक्का जी को गिरफ्तार कर लिया गया था वह दो महीने जेल में भी रहे.

उन पर 12 मुक़दमें भी चल रहे है. कक्का जी के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. मंजुला शर्मा हैं, जो शासकीय डिग्री कालेज में प्रिंसिपल है और दो बेटियां निहारिका और आवंतिका हैं. निहारिका स्पोर्ट्स टीचर तो आवंतिका दिल्ली में इंजीनियर है.

कक्का जी बताते है कि दिसंबर 2010 में तीन दिनों के लिए राजधानी भोपाल का घेराव किया था उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की 85 मांगों के माँग पत्र को गीता बताया था. शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कक्का जी कहते है कि शिवराज सिंह चौहान विवेकहीन और दिशाहीन है.

मध्य प्रदेश में कभी बीजेपी सरकार बनवाने में प्रमुख भूमिका रखने वाले और शिवराज सिंह चौहान के शुभचिंतकों में गिने जाने वाले कक्का जी अब उनके सबसे प्रबल विरोधियों में गिने जाते है.

शिवकुमार शर्मा किसानों के लिए बनाए गए स्वामीनाथन आयोग को लागू करने की वकालत करते हैं. 1 जून से मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में शुरू हुए किसान आंदोलन में मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की अगुवाई शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी कर रहे है जो अब किसी पहचान के मोहताज नहीं.

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