एक और हादसे का खामोशी से इंतज़ार कर रहे हैं लोग

uttrakhandउत्तराखंड में 2013 की तबाही में कई सारी जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुईं और इसके साथ ही  तबाही का पैमाना भी काफी बढ़ गया. जैसे, निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना 16 जून, 2013 को हुई वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. बांध बह गया और इससे आस-पास की सड़कों का काफी नुकसान हुआ.

जेपी एसोसिएट्‌स की 400 मेगावाट विष्णु प्रयाग जलविद्युत परियोजना ने इस आपदा से फैली तबाही को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. माटू जनसंगठन के अनुसार इस परियोजना के कारण लंबागाड़ गांव को नुकसान हुआ. कह सकते हैं कि उत्तराखंड की 2013 की आपदा प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का नतीजा थी.

दूसरी तरफ, दो साल से वाडिया संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड की रिपोर्ट सरकार के पास पड़ी है. अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. जीवीके कंपनी की सहायक अलकनन्दा हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन द्वारा अलकनंदा नदी पर बनाए गए  श्रीनगर बांध से प्रभावित लोगों पर बांध कंपनी मौन और सरकार भी सुस्त दिखाई देती है.

श्रीनगर बांध से विद्युतघर की ओर जाने वाली सैकड़ों किलोमीटर लम्बी खुली नहर जिसे पावर चैनल कहा जाता है, कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है. 2015 में मानसून के बाद पावर चैनल के रिसाव के कारण इस चैनल और नदी के बीच रहने वाले मगंसू गांव, जिसमें ज्यादातर दलित परिवार रहते हैं, के निवासियों का जीवन खतरे में है.

पूर्व विधायक श्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने जनदबाव के बाद वाडिया संस्थान को इस पर रिपोर्ट देने के लिए कहा था. रिपोर्ट 30 दिसंबर, 2015 को आ गई. सवाल है कि जीवीके कंपनी ने वाडिया संस्थान की इस रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? पूर्व विधायक श्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने 30 दिसंबर 2015 को रिपोर्ट आने के बाद सत्ता में रहने पर भी क्यों कार्रवाई नहीं की? मंत्री जी अब तक मौन क्यों रहे, जबकि रिपोर्ट के निष्कर्ष बहुत ही गंभीर हैं.

30-12-2015 की वाडिया संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि पावर चैनल के 200 मीटर विस्तृत क्षेत्र (प्रभावित रिसाव साइट) को वाडिया संस्थान देहरादून के संरचनात्मक भूवैज्ञानिकों के साथ परामर्श कर पुनः सुदृढ़ किया जाना चाहिए. इसके अलावा पावर चैनल के ढांचे की विस्तृत जांच करने की जरूरत है. उत्तराखंड में नई सरकार को आए हुए भी 75 दिन हो गए हैं.

नहर व नदी के बीच में रहने वाले गांवों के लोग श्रीनगर बांध बनने के कारण पहले ही खेती का पानी, जमीन की उर्वरता, नदी का पानी और रास्ते खोकर कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं. इनकी जमीन बांध कंपनी ने विभिन्न कार्यों के लिए बहुत कम दामों पर, सालाना समझौते की शर्त के साथ लीज़ पर ले ली थी. अब यह ज्यादातर जमीन बेकार हो चुकी है. चूंकि सिंचाई की पुरानी छोटी नहरें पावर चैनल के कारण बंद हो गई हैं, इसलिए काफी जमीनें अब बंजर हो गई हैं. पीने का पानी भी बांध कंपनी द्वारा अनियमित रूप से लोगों को मिल पाता है.

पावर चैनल (अलकनन्दा हाइड्रोपावर कॉर्पोरेशन, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखंड) के रिसाव पर यह रिपोर्ट कई सारे तथ्यों को सामने रखती है. यह रिपोर्ट सवाल उठाती है कि पावर चैनल की खुदाई प्रक्रिया के दौरान छिद्रित पाइप चैनल के नीचे क्यों डाले गए, रिसाव की घटना में पुराने चैनल की क्या भूमिका रही और कैसे पावर चैनल का निर्माण पुराने चैनल के झुके हुए हिस्से पर किया गया?

यह रिपोर्ट बताती है कि जांच के दौरान पावर चैनल 10 से अधिक स्थानों पर टूटा हुआ पाया गया, जिसके परिणाम स्वरूप भारी मात्रा में पानी का रिसाव हुआ. इसके साथ ही पावर चैनल के साथ नई दरारें भी विकसित हो रही हैं. पावर चैनल का 100 मीटर विस्तृत क्षेत्र भूमि की सतह के पास हो रहे रिसाव से प्रभावित है. इस क्षेत्र में तीन सक्रिय दरारें पहचान में आई हैं.

रिसाव होते पानी की वजह से पावर चैनल के नीचे की ओर दवाब में वृद्धि होगी. इस रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला है कि पावर चैनल का निचला हिस्सा सक्रिय नदी तल दरारों से प्रभावित हुआ है. इसलिए ये संरचना मजबूत की जानी चाहिए और इन तकनीकी खामियों की तत्काल मरम्मत की जानी चाहिए. इसे नजरअंदाज करना दोबारा इस खतरे को आमंत्रण देना होगा. पानी के रिसाव से बनने वाला पोर प्रेशर (जो फंसा हुआ है) से पावर चैनल के बाहरी ढांचे पर असर पड़ेगा, जो आस पास के क्षेत्र में बाढ़ लाकर घरों और खेतों को डूबा सकता है. .

यह प्रभावित लोगों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है. दरार क्षेत्र में पावर चैनल का टूट जाना एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर ठीक से विचार किया जाना चाहिए. स्पष्ट रूप में पावर चैनल का तटबंध अस्थिर है, जिसका पता पानी के रिसाव होने से चलता है. वाडिया संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि पावर चैनल के लगभग 200 मीटर विस्तृत क्षेत्र (प्रभावित रिसाव साइट) को वाडिया संस्थान देहरादून के संरचनात्मक भूवैज्ञानिकों के साथ परामर्श कर पुनः सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा पावर चैनल के ढांचे  की विस्तृत जांच करने की भी जरूरत है.