प्रधानमंत्री जी, क्या ईपीएफओ ऑफिस में ऐसे ही काम होता है!

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नई दिल्ली (प्रवीण कुमार): जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतवसियों के लिए आधारकार्ड, पेनकार्ड को ईपीएफओ से जोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं। वहीं दूसरी और यह सरकारी काम कई जगह इतना ढीला किया जा रहा है कि है शायद मोदी जी को इसकी डेटलाईन आगे बढ़ानी पड़े।

यही हाल आज नोएडा के ईपीएफओ ऑफिस (A 2C, Sector 24, Noida, Uttar Pradesh 201301) में देखने को मिला। यहां मैं प्रवीण कुमार अपने कुछ दोस्तों के साथ काम से आया था पूछताछ करने के बाद हमें द्वितीय तल पर भेज दिया गया ये बोलकर कि आपका काम द्वितीय तल हो जाएगा। यहां हमने यह देखा कि जिस समय लंच किया जा रहा था तब तक तो सब ठीक था। लेकिन लंच का समय खत्‍म होने के काफी समय बाद भी कुछ बाबू लोग अपने काम को अहमियत ना देते हुए ना जाने कहां गपशप करने में मशगूल थे। इस बीच वहां मौजूद इपीफओ के धारक और उससे जुड़े लोग परेशान थे। जब भी कोई किसी से पूछता था कि ये बाबू कब तक आएंगे तो वहां कुछ ऑफिस के स्‍टाफ के लोगों ने बताया कि लंच करने गए है, आ जाएंगे। लेकिन समय बीतता गया और किसी को यहां कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

लंच टाईम खत्म होने के काफी देर बाद भी बाबू लोग अपनी सीट से गायब रहें

इस बीच वहां एक महिला ने भी परेशान होकर ऑफिस के कुछ लोगों पर अपना गुस्सा निकाला। क्योंकि महिला को पहले तो स्टाफ के लोगों ने महिला को कभी इधर कभी उधर भेजते रहें और उसे काफी देर तक उलझाया रखा। इसके बाद लंच समय में उन्हें परेशान किया गया। महिला इतनी परेशान हुई कि वह बार-बार कह रही थी कि यहां के लोगों को थोड़ी सी भी शर्म नहीं कि कम से कम लेडिस का काम पहले निपटा दें, बस चक्कर पर चक्कर कटवा रहें है, ना जाने किस काम के बाबू बने बैठे हैं यहां ये सब।

वर्क आवर में संबंधित अधिकारी को ना पाकर झागड़ा करता एक व्यक्ति  

इसके कुछ देर बाद एक व्यक्ति ने भी इन लोगों के लंच को लेकर बवाल किया और कहा कि ये लोग ऑफिस घंटो लंच करने आते है या फिर काम करने। उसके बाद एक ऑफिस वर्कर ने उन्‍हें अपने पास बुलाया और कहा कि, सर आप यहां बैंठे गुस्सा मत करिए। वह अभी बस आते ही होंगे। ऐसा लग रहा था कि जैसे वहां सब एक दूसरे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच जब मैंने ऑफिस के स्टाफ से पूछा कि यहां लंच की टाईमिंग क्या है तो पता चला कि दोपहर 1 बजे से 1:30 तक का समय लंच टाईम का होता है। लेकिन उस समय दोपहर के 2:20 बज चुके थे। लेकिन बाबू लोगों का पेट है या कुंआ जो अभी तक भरा ही नहीं था। वहां पर उस समय भी लगभग काफी लोग अपनी सीट से गायब थे। पता करने पर बताया गया कि सब लंच पर है। कुल मिलाकर यहां का सिस्टम बहुत ही घटिया देखने को मिला। जिसकी वजह से आम लोगों को काफी परेशानी हुई।

अब आप ही बताइए प्रधानमंत्री मोदी जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, क्या सभी सरकारी ऑफिस में ऐसा ही काम किया जाता है। यहां जनता परेशान है और ऐसे लोग ऑफिस में लंच के बहाने मजे मार रहें है। उम्मीद करता हूं कि सरकारी ऑफिस में जहां भी इस तरह का माहौल होता है, वहां आप कोई कड़ा कदम उठाएंगे।

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