मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या का ज़िम्मेदार कौन?

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नई दिल्ली: देश में हर साल की तरह इस बार भी किसान सूखे की मार झेल रहे हैं. देश के इस सूखे को लेकर किसानों में भय व्याप्त हो चुका है. आपको बता दें की इस साल फिर से सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया है। किसान सूखे की वजह से आत्महत्या करते जा रहे हैं और सरकार और स्थानीय प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है.

आपको बता दें कि औरंगाबाद के विभागीय आयुक्त के आंकड़ों के मुताबिक औसतन हर रोज़ तकरीबन चार किसान सूखे की वजह से आत्महत्या कर लेते हैं. पिछले 8 दिन में 34 किसानों ने आत्महत्या की है। औरंगाबाद जिले में 5, बीड में 12, नांदेड में 9, परभणी में 7, जालना में 6, लातूर में 5, उस्मानामबाद में 4 और हिंगोली जिले में एक किसान ने आत्महत्या की है।

विभागीय आयुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2017 से 15 अगस्त 2017 तक मराठवाडा में 580 किसानों ने आत्महत्या की है। हालांकि अधिकारिक तौर पर इन आत्महत्याओं की वजह साफ नहीं की गई है, लेकिन मराठवाड़ा में इस साल फिर से बन रही सूखे की स्थिति को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। पिछले 48 दिन से मराठवाड़ा में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई है। वहां कई जिलों में किसानों की पहली बुआई कम बारिश की भेंट चढ़ने के बाद दूसरी बुआई भी बर्बाद हो गई है।

आपकों बता दें कि पिछले चार-पांच साल से मराठवाड़ा में कम बारिश होने की वजह से सूखा पड़ गया है साथ ही यहाँ पर सिंचाई करने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है जिसकी वजह से किसानों की फसले बर्बाद हो जाती हैं और किसान आर्थिक रूप से कमज़ोर हो जाती हैं. किसान अपनी फसलों के लिए जो भी क़र्ज़ सरकार से लेते हैं उसे सूखे की वजह से चुका नहीं पाते हैं और आखिर में आत्महत्या कर लेते हैं.

मराठावाड़ा में छोटे, मंझोले और बड़े मिलाकर कुल 34 लाख 82 हजार 643 किसान हैं। इनमें से छोटे किसानों की संख्या 14 लाख 3 तीन हजार 341 है। उनके पास 2 एकड़ या उससे कम कृषि भूमि है। इसके अलावा 2 से 5 एकड़ कृषि भूमि वाले मंझोले किसानों की संख्या 13 लाख 32 हजार 559 है।

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