भोपाल त्रासदी की ओर बढ़ रहा देश

राजस्थान के झुंझनु में यूरेनियम खोज को लेकर खेतों में ड्रिलिंग की गई थी. स्थानीय विधायक शुभकरण चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में यूरेनियम की खोज के लिए करीब 113 बोरवेल खोदे गए. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी भी नहीं ली गई. इन बोरवेल के कारण जमीन का पानी जहरीला हो गया है, जिससे आमजन से लेकर पशु व फसलों को भी नुकसान हो रहा है.

झारखंड के जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम खदान को लेकर अमेरिकी समाचार एजेंसी ने रेडियोएक्टिव और जहरीले तत्व लीक होने की खबर प्रकाशित की थी.रिपोर्ट में इस बात का जिक्र था कि इस इलाके के आम जन, नदियां, जंगलों और खेती पर भी विकिरण का असर हो रहा है. रिपोर्ट में भारत के परमाणु प्रतिष्ठान पर आरोप लगाया गया कि रेडिएशन के खतरों की अनदेखी कर इन इलाकों में खनन कार्य किए जा रहे हैं.

झारखंड विधानसभा में भी यूरेनियम खदानों से 160 प्रतिशत अधिक विकिरण का मामला उठा. विधायकों ने कहा कि अगर इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह देश में दूसरी भोपाल त्रासदी को जन्म दे सकता है. जादूगोड़ा के फोटोग्राफर आशीष बिरूली यूरेनियम विकिरण से प्रभावित लोगों की तस्वीरें खींच लोगों को जागरूक करते हैं.

संथाली में वे कहते हैं जादूगोड़ा उनू मो ताना यानी जादूगोड़ा डूब रहा है, उसे बचा लो. इलाके में विकिरण से प्रभावित मासूमों की तस्वीरें देखकर लोगों की आंखें भर आती हैं, लेकिन उनकी यह मार्मिक अपील गूंगे-बहरे सरकारी अधिकारियों तक शायद ही पहुंचेे.

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