जाने क्या है झारखंड में भाजपा का हिन्दू ट्रम्प कार्ड…

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नई दिल्ली: भाजपा सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए झारखंड में हिन्दू कार्ड चला है. झारखंड सरकार सूबे में धर्म परिवर्तन को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रही है. अब लालच देकर या धमका कर धर्म परिवर्तन के मामले में चार साल जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है. अगर वह अनुसूचित जाति या जनजाति का नहीं है, तो ऐसे मामले में तीन साल की सजा और पचास हजार रुपए का प्रावधान है. इसे गैर जमानतीय अपराध माना गया है. अब अगर कोई स्वेच्छा से भी धर्म परिवर्तन करना चाहेगा, तो उसे लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा.

इस विधेयक पर मंत्रिमंडल की मुहर लग चुकी है. इसे मानसून सत्र में ही पारित कराने का राज्य सरकार मन बना चुकी है. वैसे यह बिल भाजपा की प्राथमिकता सूची में शामिल था. मुख्यमंत्री रघुवर दास भी पार्टी के दबाव में कई मौकों पर धर्मान्तरण विधेयक लाने का आश्वासन दे चुके थे. चुनाव की तिथि नजदीक आते देख भाजपा ने यह हिन्दू ट्रंप कार्ड चलकर 21 प्रतिशत आदिवासियों को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए मुहिम तेज कर दी है.

इसमें ये भी कहा गया है कि अगर अनुसूचित जाति और जनजाति के किसी व्यक्ति का धर्मान्तरण कराया जाता है, तो ऐसे में चार साल की सजा और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे सम्बन्धित जिले के उपायुक्त से अनुमति लेनी होगी. बिना अनुमति के अगर कोई धर्मान्तरण करता है तो इसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. किसी भी समुदाय के नाबालिग का धर्मान्तरण अवैध माना जाएगा. राज्य सरकार अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों पर भी रोक लगाने की तैयारी कर रही है, इसके लिए भी
एक सख्त कानून लाने की बात कही जा रही है.

मुख्यमंत्री रघुवर दास जबरन धर्मान्तरण पर रोक लगाने को जरूरी मानते हैं. मुख्यमंत्री का कहना है कि देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह का कानून लागू है. गृह विभाग ने देश के अन्य भागों में लागू इस तरह के कानूनों का अध्ययन करने के बाद ही इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया है. धर्मांतरण की आधारशिला तभी रखी गई थी, जब आजादी के पूर्व रांची के समीप मैकलुस्कीगंज में अंग्रेजों ने अपना ठिकाना बनाया था. यहां सैकड़ों एंग्लो-इंडियन परिवार रहते थे, धीरे-धीरे यहां चर्च की स्थापना हुई. मिशनरी ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना शुरू किया, वह भी सुदूरवर्ती इलाकों में जहां सरकार की पहुंच भी नहीं हो पाती थी.