जानिए, क्या फर्क है मोदी की भाजपा और रुपानी की भाजपा में…

narendra modi bjp rupani

मोदी की भारतीय जनता पार्टी और रूपानी की भारतीय जनता पार्टी में क्या फर्क है? इसमें कोई बहुत फर्क नहीं है. नरेन्द्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी या संघ से जुड़े तीन-साढ़े तीन लाख कार्यकर्ताओं को जोड़ा था. जिनके पास कुछ नहीं था, उन्हें अवसर देकर धीरे-धीरे करोड़पति बना दिया. लगभग साढ़े तीन लाख लोग 15 से 20 करोड़ रुपए की आर्थिक संपत्ति के स्वामी बन गए. आज वही लोग भारतीय जनता पार्टी के लिए आधार का काम करते हैं.

चुनाव में पैसा खर्च करना हो, लोगों को इकट्‌ठा करना हो, हवा बनानी हो, मीडिया को सहायता देनी हो, ये सारे काम वो तीन-साढ़े तीन लाख लोग करते हैं. इसके बावजूद कि 2014 से नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री नहीं हैं. गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री रूपानी उसी परंपरा को निभा रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में भारतीय जनता पार्टी में संघ का दखल बढ़ जाने से नए लोगों का आना रुक गया है. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार से काम कराने के लिए या किसी प्रकार की अनुमति के लिए संघ की अनुमति परम आवश्यक है, इसीलिए अब भारतीय जनता पार्टी में नए लोग नहीं आ रहे हैं. गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का मुख्य आधार पाटीदार समाज था. ये तो नहीं कह सकते कि भारतीय जनता पार्टी से पाटीदार समाज पूरी तरह से अलग हो गया है, लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा जरूर अलग हो गया है.

गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री रूपानी राजकोट के मेयर रहे. उसके बाद वो संसद में गए. इन पंक्तियों क्ले लेखक को एक अजीब चीज पता चली. रूपानी का नियम था कि वे हर हफ्ते राजकोट कॉर्पोरेशन और वहां की जिला पंचायत से पैसे लेते थे और वो पैसे पार्टी के नाम पर लेते थे. काफी लोगों ने यह बताया कि रूपानी के बारे में यह बात मशहूर है कि इन्हें पैसे दो और कोई भी काम करा लो.

जब मैंने नरेन्द्र मोदी के बारे में पूछा कि इनके बारे में लोगों की क्या राय है, तो लोगों ने कहा कि वो बाकी लोगों की तरह पैसे नहीं वसूलते थे, लेकिन उनके पास पैसे आ जाते थे. कहने वाले तो ये तक कहते मिले कि नरेन्द्र मोदी जी के 10 साल के कार्यकाल में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा अहमदाबाद या गुजरात से बाहर गए. अगर कभी भविष्य में इसकी जांच होगी, तो इस गोरखधंधे में कांग्रेस के कुछ लोग भी फंसे मिलेंगे और शायद उन्हें भी शर्मिंदगी झेलनी पड़े. मुझे लोगों ने बताया कि शंकर सिंह वाघेला ने सार्वजनिक तौर पर ये कहा था कि कांग्रेस को हराने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने ही भारतीय जनता पार्टी से सुपारी ली है.

संतोष भारतीय

संतोष भारतीय चौथी दुनिया (हिंदी का पहला साप्ताहिक अख़बार) के प्रमुख संपादक हैं. संतोष भारतीय भारत के शीर्ष दस पत्रकारों में गिने जाते हैं. वह एक चिंतनशील संपादक हैं, जो बदलाव में यक़ीन रखते हैं. 1986 में जब उन्होंने चौथी दुनिया की शुरुआत की थी, तब उन्होंने खोजी पत्रकारिता को पूरी तरह से नए मायने दिए थे.

संतोष भारतीय

संतोष भारतीय चौथी दुनिया (हिंदी का पहला साप्ताहिक अख़बार) के प्रमुख संपादक हैं. संतोष भारतीय भारत के शीर्ष दस पत्रकारों में गिने जाते हैं. वह एक चिंतनशील संपादक हैं, जो बदलाव में यक़ीन रखते हैं. 1986 में जब उन्होंने चौथी दुनिया की शुरुआत की थी, तब उन्होंने खोजी पत्रकारिता को पूरी तरह से नए मायने दिए थे.