1500 पुराने सबरीमाला मंदिर की इस परंपरा पर फैसला!

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केरल राज्‍य में बसा सबरीमाला श्री अयप्‍पा मंदिर सबसे बड़े तीर्थ स्‍थानों में से माना जाता है. लेकिन महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, जो सालों से बहस का विषय बना हुआ है. बता दें कि करीब 10 साल से यह मामला कोर्ट में चल रहा है. जिसका फैसला आने वाला है.

बता दें कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज शुक्रवार को मंदिर को संवैधानिक पीठ को भेज दिया है. भेजे गए याचिका में कहा गया है कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश न करने देना उनके साथ भेदभाव करना है.

वही 2007 में केरल सरकार ने मंदिर प्रशासन के समर्थन में कहा था कि धार्मिक मान्यताओं की वजह से महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. बता दें कि इससे पहले केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाना चाहिए.

मंदिर का परंपरा  – 

केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपरा का मानना है कि इस मंदिर में महिलाएं नही जा सकती. क्योंकि कि भगवान श्री अयप्‍पा ब्रह्माचारी थे.  इसलिये यहां 10 से 50 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं का आना वर्जित है. इस मंदिर में वे छोटी बच्‍चियां आ सकती हैं जो रजस्‍वला (मासिक धर्म) न हुई हों या फिर बूढ़ी औरतें, जो मासिकधर्म से मुक्‍त हो चुकी हों. मंदिर ट्रस्ट की मानें तो यहां 1500 साल से महिलाओं की प्रवेश पर बैन है.