जब तलवार दंपत्ति बेगुनाह हैं तो आखिर कौन है आरुषी का हत्यारा

who kills aarushi talwar if parents are not guilty

साल 2008 के सबसे चर्चित हाईप्रोफाइल आरुषी मर्डर केस में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आ चुका है. आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने आरुषी हत्याकांड में गाज़ियाबाद की डासना जेल में सज़ा काट रहे आरुषी के माता-पिता नुपुर तलवार और राजेश तलवार को बेगुनाह पाया है और उन्हें जेल की सज़ा से बरी कर दिया है. बता दें कि तलवार दंपत्ति पिछले चार साल से डासना जेल में सज़ा काट रहे हैं.

लेकिन जब से इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया तभी से सोशल मीडिया पर मानों पोस्ट की बाढ़ सी आ गयी है. सोशल मीडिया पर सैकड़ों लोग इस मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और ज़्यादातर ने यही सवाल किया है कि जब आरुषी के माता-पिता ने उसका मर्डर नहीं किया तो आखिर कौन है वो शख्स जिसने आरुषी और हेमराज का गला रेतकर उनकी हत्या कर दी.

आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में पूरी तरह नाकाम रही। ढाई साल की जांच और कई उलटफेर के बाद आखिरकार सीबीआइ ने हाथ जोड़ लिया था और अदालत से केस को बंद करने की अपील (क्लोजर रिपोर्ट) की थी। यही कारण है कि सीबीआइ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं करने पर विचार कर रही है।

आपको बता दें की इस मामले में नोएडा पुलिस की भी लापरवाही सामने आई है. आपको ये बात जानकार हैरानी होगी कि इस हत्याकांड के सबूतों से बुरी तरह से छेड़छाड़ की गयी थी और यही वजह है कि यह मामला आज तक नहीं सुलझ पाया और कोई भी यह नहीं जानता कि आखिर आरुषी की हत्या किसने की थी.

सही मायने में देखें तो आयुषी के गुनाहगार आज तक पुलिस की पहुँच से दूर हैं. दरअसल हत्याकांड की पूरी गुत्थी शराब के गिलास पर उंगली के एक निशान पर आकर टिक गई थी। इस गिलास पर आरुषि और हेमराज दोनों के खून से सनी उंगली के निशान थे। यानी जिसने भी शराब पी थी, उसी ने दोनों की हत्या की थी और हत्या करने के बाद भी घर में मौजूद था।

लेकिन सीबीआइ पूरी जोरआजमाइश के बाद भी इस उंगली वाले शख्स को तलाशने में विफल रही। सीबीआइ की माने तो हत्याकांड के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस की लापरवाही के कारण सबूतों के साथ हुए छेड़छाड़ ने इस केस की गुत्थी को जटिल बना दिया।