सत्याग्रह के सौ वर्ष बाद चम्पारण में स्वच्छाग्रह आंदोलन

भारत सरकार के स्वच्छता अभियान और बिहार सरकार के लोहिया स्वच्छता मिशन को कामयाब बनाने और गांधी जी के स्वच्छता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शुरू हुआ ‘चम्पारण का रण’ अभियान अब रंग दिखाने लगा है. जिलाधिकारी रमण कुमार के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान के द्वारा जिले को खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया गया है. जिलाधिकारी का कहना है कि चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर जिले को ओडीएफ करने का जो लक्ष्य है, उसे मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा. सुबह-शाम गांवों में चौपाल लगाकर व जागरूकता रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और उन्हें बताया जा रहा है कि खुले में शौच करने से क्या-क्या हानि है. इस कार्य में आंगनबाड़ी और जीविका के साथ-साथ स्वयंसेवी संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है. जिलाधिकारी का यह भी कहना है कि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद जो लोग खुले में शौच से बाज नहीं आ रहे हैं, उनके लिए दंड का भी प्रावधान किया गया है. अभियान से जुड़े लोगों और कर्मियों-पदाधिकारियों को सीटी दी गई है कि अगर कोई खुले में शौच करता या गंदगी फैलाते दिखे तो सीटी बजाकर उन्हें रोका जा सके.

ओडीएफ के लिए अपनाई गई कार्य प्रणाली का अध्ययन करने और अभियान के परिणामों का आकलन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा 45 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों की टीम को मोतिहारी के पांच प्रखंडों में भेजा गया था. पदाधिकारियों का दल इन प्रखंडों और गांवों में एक सप्ताह तक रहा और उन्होंने पूरी जानकारी ली. वहीं केन्द्र सरकार के पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर के नेतृत्व में आई एक टीम ने भी अपने तीन दिन के
चम्पारण प्रवास में पूरे अभियान को नजदीक से देखा. श्री अय्यर ने तुरकौलिया प्रखंड के जगसिंह कुशवाहा बालिका विद्यालय में जाकर भी अभियान की बारीकियों को जाना-समझा. ओडीएफ के लिए किए जा रहे कार्यों से वे प्रभावित भी हुए. उन्होंने कहा कि चम्पारण से बिहार में स्वच्छता की लहर चल पड़ी है और बिहार जल्द ही खुलेे में शौच से मुक्त देश का आठवां राज्य बन जाएगा. अपने तीन दिनों के प्रवास के दौरान श्री अय्यर ने जागरूकता रैली निकाली, मझार में जनसभा की, तुरकौलिया पूर्वी के ओडीएफ हुए चार वार्डों का भ्रमण किया और तुरकौलिया के ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे आयोजित जन सभा में लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई.

उन्होंने सुबह में खुले में शौच करने वालों से बात की और इसमें जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाईयों को भी समझा. मझार गांव में पांच लोगों के घर में शौचालय निर्माण के लिए सचिव श्री अय्यर ने खुद गड्‌ढा खोदकर स्वच्छता के महत्व का संदेश दिया. इस दौरान लोगों को टॉयलेट एक प्रेमकथा फिल्म दिखाई गई. कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के लोहिया स्वच्छता मिशन के निदेशक बाला मोरगन डी, जिलाधिकारी रमण कुमार, डीडीसी अखिलेश कुमार सिंह, तुरकौलिया के बीडीओ कुमुद कुमार, सीओ संजय कुमार झा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे. इसी दौरान बेहतर कार्य कर अपने वार्ड को ओडीएफ कराने के लिए आंगनबाड़ी सेविका लालसा देवी सहित अन्य को सम्मानित भी किया गया. अभियान की कार्यप्रणाली से प्रभावित सचिव श्री अय्यर ने कहा कि मैंने चम्पारण से बहुत कुछ सीखा है और अन्य प्रदेशों में भी इस योजना को बताने का प्रयास करूंगा. यहां की लड़कियों ने इस अभियान के राजदूत के रूप में उल्लेखनीय योगदान देने की शपथ ली है. उनके द्वारा दिया गया ‘मुझे टॉयलेट चाहिए’ का नारा मुझे काफी पसंद आया है. हम इस नारे को देश भर में चलने वाले स्वच्छता अभियान का नारा बनाएंगे.

इस अभियान की तीन कड़ी है. जिसमें ग्रामीण नागरिक, स्कूली बच्चे एवं मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है. ग्रामीणों के बीच जागरूकता फैलाकर इस अभियान को पूरी तरह धरातल पर उतारा जा रहा है, वहीं स्कूली बच्चों को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, जो अपने परिजनों पर शौचालय बनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं. यह इस अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में स्वच्छता को एक अभियान के रूप में लॉन्च किया था. उस समय देश के 39 प्रतिशत घरों में शौचालय थे. लेकिन लोगों में आई जागरूकता के कारण आज यह आंकड़ा 73 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धि है. देश से 227 जिले ओडीएफ हो चुके हैं. 2 लाख 75 हजार शौचालय बन चुके है. 7 राज्य मार्च 2018 तक ओडीएफ हो जाएंगे.प

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