हाफ़िज़ सईद पर पाकिस्तानी कार्रवाई का सच: नजरबंदी में भी आज़ादी


दस महीने की नजरबंदी के बाद लाहौर हाई कोर्ट ने की आतंकी हाफिज सईद को रिहा कर दिया है. उसी रिहाई वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बनीं. भारत ने तो इसपर आपत्ति जाहिर की ही, अमेरिका ने भी पाकिस्तान को चेताया. लेकिन इस बीच खबर आ रही है कि हाफिज की नरजबंदी बस नाम मात्र की थी. नजरबंदी में भी वो पूरी तरफ से स्वतंत्र था मनमाफिक कुछ भी करने के लिए. हाफिज सईद के लिए नजरबंदी का पूरा समय बस आराम फरमाने जैसा ही होता है.

यह भी गौर करने वाली बात है कि हाफिज सईद को लेकर पाकिस्तान कभी भी गंभीर नहीं रहा. दस महीने पहले जब उसे उसके ही घर में नजरबंद किया गया था, वो समय था अमेरिका द्वारा इस्लामी चरमपंथ फैलाने वाले देशों की खिलाफ कार्रवाई का. पाकिस्तान को डर था कि कहीं उसे भी प्रतिबंधित देशों की सूची में न डाल दिया जाय. इसी दबाव के चलते पाकिस्तान ने हाफिज सईद के साथ-साथ अब्दुल्ला उबैद, जफर इकबाल, अब्दुर्रहमान आबिद और काजी काशिफ नियाज पर भी नजरबंदी की कार्रवाई की.

यह बात भी चर्चा में रही थी कि हाफीज को नजरबंद करने की कार्रवाई पाकिस्तान ने इतनी जल्दी की कि सरकार के पास इस बात का कोई स्पष्ट जवाब नहीं था कि उस पर आरोप क्या हैं और किन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा. हालांकि बाद में अमेरिका को खुश करने के लिए हाफिज सईद और उसके साथियों पर एंटी टेररिस्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की बात सामने आई. लेकिन कार्रवाई क्या हुई यह भी पता नहीं चला. हाल में हुई हाफिज की रिहाई भी इसी बात का सबूत है कि उसके खिलाफ या तो बहुत कमजोर धाराएं लगाई गईं या फिर उसे सजा दिलाने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई गई.