काम के सिलसिले में बाहर जाने वाले अक्सर अवसादग्रस्त पाए जाते है

एक अध्ययन के अनुसार काम के सिलसिले में बार बार बाहर का दौरा करने वाले लोगों में बेचैनी और अवसाद  यानी डिप्रेशन  का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे लोगों के  धुम्रपान  करने की, उनके सुस्त होने की और नींद में दिक्कत का सामना करने का खतरा भी बढ़ जाता है।

अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक काम के सिलसिले में बाहर की यात्रा करने वालों बहुत से लोगों में शराब पर निर्भरता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि काम के सिलिसले में घर से बाहर रात बिताने का क्रम बढ़ने के साथ, इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल ऐंड इन्वायरनमेंटल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।

अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में असोसिएट प्रफेसर एंड्रयू रंडल ने कहा, हालांकि काम के सिलिसले में बाहर की यात्रा को कार्यस्थल पर लाभ के रूप में देखा जाता है और इससे पेशे में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। इस बात के काफी साक्ष्य हैं जो बताते हैं कि काम के सिलसिले में बार बार बाहर का दौरा करने का संबंध जीवनशैली के कारकों से संबंधित पुरानी बीमारियों के खतरे से है। यह अध्ययन 2015 में स्वास्थ्य आकलन कराने वाले 18 हजार 328 कर्मचारियों के स्वास्थ्य आंकड़े पर आधारित है।

मनोविकार (Mental disorder) किसी व्यक्ति के  मानसिक स्वस्थ्य  की वह स्थिति है जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर ‘सामान्य’ नहीं कहा जाता। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त व्यक्तियों का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) निर्धारित किया जाता है और जिसमें महत्‍वपूर्ण व्‍यथा अथवा असमर्थता अन्‍तर्ग्रस्‍त होती है। इन्हें मनोरोगमानसिक रोगमानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार भी कहते हैं।

मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन की वजह से पैदा होते हैं तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की जरूरत होती है। मनोरोग विकार से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है संतुलित आहार. यात्रा के दौरान भी कई लोग शराब का सेवन करते हैं. जोकि अवसाद को बढ़ावा देते है.

 

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